‘2 दिन में जा सकती है जान…’ सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल जबरन खत्म कराने के लिए कोर्ट में याचिका, हालात बेहद नाजुक!
17 दिनों में घटा 8.5 किलो वजन! जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक की बिगड़ती हालत देख वकील पहुंचे कोर्ट; क्या जबरन खिलाया जाएगा खाना?…
नई दिल्ली। दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहा आंदोलन अब एक बेहद संवेदनशील मोड़ पर पहुंच गया है। नीट (NEET) पेपर लीक मामले को लेकर देश के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़े मशहूर शिक्षाविद और एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल का आज 18वां दिन है।
इस बीच उनकी लगातार बिगड़ती सेहत को देखते हुए अदालत में एक आपातकालीन जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है, जिसने हड़कंप मचा दिया है।
कार्यकर्ता और वकील राकेश कुमार सैनी द्वारा दायर इस याचिका में दावा किया गया है कि यदि सोनम वांगचुक का अनशन तुरंत नहीं रुकवाया गया, तो अगले दो दिनों के भीतर उनकी जान जा सकती है।
कोर्ट से गुहार: अस्पताल ले जाएं और जबरन खाना खिलाएं
याचिका में केंद्र और दिल्ली सरकार को सख्त निर्देश देने की मांग की गई है। वकील ने अपील की है कि:
- सोनम वांगचुक की स्थिति को देखते हुए उन्हें तुरंत अस्पताल (Hospital) में भर्ती कराया जाए।
- उनकी जान बचाने के लिए उन्हें जबरन खाना (Forced Feeding) खिलाया जाए।
याचिका में बड़ी चेतावनी: “अनशन के दौरान वांगचुक का वजन 8.5 किलोग्राम तक गिर चुका है। अगर देश के इतने बड़े शिक्षाविद को कुछ होता है, तो यह पूरे देश और दुनिया के लिए बेहद शर्मनाक बात होगी।”
मेडिकल रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता, चक्कर आने के कारण उठना भी मुश्किल
जंतर-मंतर पर डॉक्टरों की एक विशेष टीम लगातार वांगचुक की निगरानी कर रही है। आंदोलन के आयोजकों और ‘सीजेपी’ के संस्थापक अभिजीत दीपके द्वारा साझा किए गए मेडिकल आंकड़े डराने वाले हैं:
- वजन में गिरावट: अब तक करीब 8.5 किलो वजन कम हो चुका है।
- ब्लड प्रेशर (BP): घटकर 107/70 mmHg रह गया है।
- ब्लड शुगर लेवल: गिरकर 67 mg/dL पर पहुंच चुका है।
फिलहाल वांगचुक प्रदर्शन स्थल पर सफेद गद्दे पर लेटे हुए हैं और काफी कमजोर हो चुके हैं। हालात इतने गंभीर हैं कि उन्हें बैठने, खड़े होने और यहाँ तक कि वॉशरूम जाने में भी गंभीर दिक्कतों और दर्द का सामना करना पड़ रहा है।
20 जुलाई को संसद मार्च का एलान, कोर्ट के फैसले पर टिकी नजरें
नीट पेपर लीक विवाद के बाद शुरू हुए इस प्रदर्शन में अब आर-पार की लड़ाई की तैयारी है। प्रदर्शनकारियों ने 20 जुलाई 2026 को संसद तक विशाल पदयात्रा (संसद मार्च) निकालने का एलान किया है।
अब हर किसी की नजरें अदालत पर टिकी हैं कि वांगचुक की जान बचाने के लिए दायर की गई इस याचिका पर कोर्ट कब और क्या फैसला सुनाता है।

