बकरीद से पहले बड़ा फैसला! सुप्रीम कोर्ट का तमिलनाडु में गोहत्या बैन पर बड़ा फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार को बड़ी राहत देते हुए मद्रास हाईकोर्ट के उस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसमें राज्य में बकरीद या किसी भी अन्य दिन गाय और बछड़े के वध पर पूरी तरह रोक लगाने का निर्देश दिया गया था।

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने सोमवार को तमिलनाडु सरकार की विशेष अनुमति याचिका (SLP) पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने मामले में नोटिस जारी कर संबंधित पक्षों से जवाब भी मांगा है।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया मद्रास हाईकोर्ट के फैसले के अंतिम हिस्से में बदलाव की आवश्यकता दिखाई देती है। इसी आधार पर कोर्ट ने उस हिस्से के अमल पर फिलहाल रोक लगा दी, जिसमें पूरे राज्य में गाय और बछड़े के वध पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया था।

दरअसल, मद्रास हाईकोर्ट ने मई 2026 में एक आदेश जारी करते हुए तमिलनाडु सरकार को निर्देश दिया था कि बकरीद या किसी भी अन्य दिन राज्य में गाय और बछड़ों की हत्या या कुर्बानी न होने दी जाए।

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि गाय की बलि इस्लाम में अनिवार्य धार्मिक प्रथा नहीं है।

राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने सुप्रीम कोर्ट में पक्ष रखा। सरकार ने दलील दी कि हाईकोर्ट का आदेश तमिलनाडु पशु संरक्षण अधिनियम, 1958 के प्रावधानों के विपरीत है।

सरकार के अनुसार, कानून के तहत 10 साल से अधिक उम्र की ऐसी गायों का वध सक्षम अधिकारी के प्रमाण पत्र के आधार पर किया जा सकता है, जो काम करने या प्रजनन के योग्य नहीं हैं।

सरकार ने यह भी कहा कि पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 और स्लॉटर हाउस से जुड़े नियम पशुओं के वध को नियंत्रित करते हैं, लेकिन इनमें पूर्ण प्रतिबंध का प्रावधान नहीं है।

मद्रास हाईकोर्ट में यह मामला हिंदू मक्कल काची के महासचिव के. सूर्य प्रसांत की जनहित याचिका पर पहुंचा था। याचिका में मांग की गई थी कि बकरीद के दौरान गोवंश का वध केवल अधिकृत स्थानों पर हो और सार्वजनिक जगहों पर इसे रोका जाए।

हालांकि, हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद पूरे राज्य में गाय और बछड़े के वध पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का आदेश दे दिया था।

सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में तमिलनाडु सरकार ने कहा कि हाईकोर्ट का फैसला विरोधाभासी है। सरकार का तर्क था कि एक तरफ अदालत ने अधिकृत बूचड़खानों में नियमों के तहत वध की बात कही, वहीं दूसरी ओर पूरे राज्य में पूर्ण रोक लगा दी।

सरकार ने यह भी कहा कि हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता की मांग से आगे बढ़कर आदेश दिया, जबकि याचिका में केवल सार्वजनिक स्थानों पर गोवंश वध रोकने की मांग की गई थी।

सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद अब मद्रास हाईकोर्ट का राज्यव्यापी पूर्ण प्रतिबंध वाला आदेश फिलहाल लागू नहीं रहेगा। मामले में अगली सुनवाई के बाद ही अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।

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