“क्या मैं मर गई हूं?”-TMC में बगावत और दफ्तर पर कब्जे के बाद ममता बनर्जी का रौद्र रूप, खुद बनीं प्रदेश अध्यक्ष; कुणाल-मदन को बड़ी कमान

मुख्य बातें
- बड़ा फैसला: सुब्रत बख्शी की बीमारी का हवाला देकर ममता बनर्जी ने खुद संभाली पश्चिम बंगाल TMC अध्यक्ष की कमान।
- नई टीम: विधायक कुणाल घोष और पूर्व मंत्री मदन मित्रा बनाए गए पार्टी के नए महासचिव।
- खुली चुनौती: ममता बनर्जी ने बागियों से कहा— “हिम्मत है तो सीधे बीजेपी में शामिल हो जाओ, गद्दारी की सीमा होती है।”
- कार्यालय विवाद: तृणमूल भवन पर कब्जे को लेकर दिखाए चेक, कहा-“अक्टूबर 2027 तक का किराया एडवांस दिया है।”
कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में करारी शिकस्त के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के अस्तित्व पर आए संकट के बीच पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शनिवार को फेसबुक लाइव आकर विरोधियों और बागियों को ललकारा है। बेहद आक्रामक अंदाज में ममता बनर्जी ने ऐलान किया कि वह अब खुद प्रदेश तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष रहेंगी और संगठन की कमान अपने हाथों में लेंगी।
“क्या मैं मर गई हूं?”— असली TMC और सिंबल पर दोटूक
पार्टी के भीतर ‘असली टीएमसी किसकी’ को लेकर चल रही कानूनी और राजनीतिक जंग पर ममता बनर्जी ने तीखा सवाल दागा। उन्होंने कहा, “आप लोग क्या सोचते हैं? क्या मैं मर गई हूं? हम जानते हैं कि शायद सिंबल (प्रतीक चिन्ह) आपके पक्ष में चला जाए, भले ही वनीश कुमार बाबू आपको सिंबल दे दें, तो क्या फर्क पड़ता है? जब मैं इसी प्रतीक चिन्ह को अपने गले में लटकाकर बंगाल की जनता के बीच जाऊंगी, तो क्या आप मेरी आवाज को दबा पाएंगे?”
बागी गुट और पुलिस-प्रशासन पर बरसीं ममता
ममता बनर्जी ने उन विधायकों और नेताओं को ‘गद्दार’ और ‘बेवफा’ करार दिया जो 2023 के बाद टीएमसी का अस्तित्व न होने की बात कह रहे हैं।
- टिकट का अहसान याद दिलाया: ममता ने कहा, “जो लोग आज सवाल उठा रहे हैं, वे मेरे हस्ताक्षर वाले सिंबल पर ही जीतकर उम्मीदवार और फिर विधायक बने थे। अगर 2023 के बाद पार्टी नहीं थी, तो 2026 के चुनाव में आपका प्रदर्शन कैसा रहा?”
- पुलिस और बीजेपी पर साठगांठ का आरोप: उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस अधिकारी और ब्लॉक अध्यक्ष मिलकर टीएमसी कार्यकर्ताओं को डरा रहे हैं और हवालात भेजने की धमकी देकर बागी गुट में शामिल होने का दबाव बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग डर या पैसे के लालच में गए हैं, मैं उन्हें दोष नहीं देती, लेकिन मेरा परिवार टीएमसी के ‘मां-माटी-मानुष’ का परिवार है।
तृणमूल भवन पर कब्जे पर दिखाए दस्तावेज़ और चेक
पार्टी कार्यालय (तृणमूल भवन) पर विरोधी गुट द्वारा केंद्रीय बलों की मदद से किए गए कब्जे पर ममता बनर्जी ने कड़ा रुख अपनाया। मकान मालिक के किराए न मिलने के दावों को खारिज करते हुए ममता ने लाइव में चेक और दस्तावेज़ दिखाए।
“यह संगठन की संपत्ति है, किसी व्यक्ति की बपौती नहीं। हमने अक्टूबर 2027 तक का किराया (1 लाख रुपये प्रति माह) एडवांस दे रखा है। केंद्रीय बलों के दम पर आप मकानों पर तो कब्जा कर सकते हैं, लेकिन आम जनता के दिलों पर कब्जा नहीं कर सकते।” — ममता बनर्जी, टीएमसी चीफ
चंद्रिमा भट्टाचार्य के इस्तीफे पर टिप्पणी
वरिष्ठ नेता चंद्रिमा भट्टाचार्य द्वारा सभी पदों से दिए गए इस्तीफे पर ममता बनर्जी ने कहा कि यह कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं था, यह काफी समय से चल रहा था क्योंकि उनका बेटा पहले ही बागी गुट के साथ जा चुका था। ममता ने साफ किया कि तृणमूल कांग्रेस किसी एक या दो नेताओं पर निर्भर नहीं है, बल्कि यह आम कार्यकर्ताओं और जनता की पार्टी है।
‘शहीद सभा’ होकर रहेगी, चाहे रिक्शे से करनी पड़े
कोलकाता में अगस्त तक धारा 144 लागू होने और पुलिस द्वारा रैली की अनुमति न मिलने पर ममता ने सवाल उठाया। उन्होंने ऐलान किया कि 21 जुलाई को टीएमसी की ‘शहीद सभा’ हर हाल में होगी। अगर पुलिस मंच लगाने की अनुमति नहीं देती है, तो वह एक रिक्शे पर खड़े होकर सभा करेंगी, लेकिन आयोजन रद्द नहीं होगा।



