ईरान में राजकीय शोक: 101 वर्षीय ग्रैंड आयतुल्लाह नूरी हमेदानी पढ़ाएंगे खामेनेई के जनाजे की नमाज, जानिए क्यों खास है मशहद

तेहरान / मशहद। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की अंतिम विदाई की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। इस ऐतिहासिक और बेहद संवेदनशील मौके पर शिया समुदाय के सबसे वरिष्ठ और सम्मानित धार्मिक नेता ग्रैंड आयतुल्लाह हुसैन नूरी हमेदानी का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है। 101 वर्ष की उम्र में भी शिया जगत पर मजबूत पकड़ रखने वाले हमेदानी, मशहद शहर में खामेनेई के जनाजे की नमाज का नेतृत्व करेंगे।

साल 1925 में ईरान के हमेदान शहर में जन्मे हुसैन नूरी हमेदानी शिया इस्लाम के सर्वोच्च धार्मिक पद ‘मरजा ए तकलीद’ (Marja-e-Taqlid) पर आसीन हैं।

क्रांति के बाद से ही नूरी हमेदानी को अली खामेनेई का सबसे वफादार और मजबूत समर्थक माना जाता रहा है। उन्होंने हर राजनीतिक और धार्मिक मोड़ पर खामेनेई के नेतृत्व का खुलकर समर्थन किया। यही कारण है कि ईरानी प्रशासन और धार्मिक परिषद ने खामेनेई के जनाजे की नमाज के लिए उनके नाम को सबसे उपयुक्त और सम्मानजनक माना है।

अयातुल्ला अली खामेनेई का जन्म ईरान के मशहद शहर में हुआ था और उनकी अंतिम इच्छा के अनुसार ही उनका तजहीज-ओ-तकफीन (अंतिम संस्कार) इसी पवित्र शहर में किया जा रहा है।

  • धार्मिक महत्व: मशहद शिया मुसलमानों के लिए दुनिया के सबसे पवित्र स्थानों में से एक है, क्योंकि यहां शिया समुदाय के आठवें इमाम, इमाम रजा की दरगाह स्थित है।
  • परंपरा का निर्वाह: शिया परंपरा के मुताबिक, किसी सर्वोच्च राष्ट्रीय या धार्मिक नेता के जनाजे की नमाज केवल समाज का सबसे वरिष्ठ और प्रतिष्ठित ग्रैंड आयतुल्लाह ही पढ़ा सकता है। 101 साल के नूरी हमेदानी द्वारा इस नमाज की अगुवाई करना उनके सर्वोच्च धार्मिक कद को रेखांकित करता है।

Related Articles

Back to top button