अयोध्या में भारी तनाव! राम मंदिर दान चोरी मामले में चंपत राय पर FIR के लिए अड़े वकील, अरविंद केजरीवाल बोले- ‘8 महीने की सीसीटीवी फुटेज गायब’

Ram Mandir Donation Theft Case Updates: अयोध्या के भव्य राम मंदिर में सामने आए कथित दान गबन मामले ने देश की राजनीति और धर्मनगरी में हलचल तेज कर दी है। एक तरफ जहां अयोध्या के वकील राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और अन्य पदाधिकारियों के खिलाफ सीधे थानों में पहुंच गए हैं, वहीं दूसरी तरफ विपक्ष ने सरकार और ट्रस्ट को घेरते हुए बेहद संगीन आरोप लगाए हैं। इस पूरे मामले को लेकर उत्तर प्रदेश पुलिस और विशेष जांच दल (SIT) का एक्शन भी काफी तेज हो चुका है।
1. चंपत राय के खिलाफ FIR की मांग पर अड़े वकील; बढ़ाई गई सुरक्षा
राम मंदिर चंदा गबन मामले पर अयोध्या के वकीलों का गुस्सा फूट पड़ा है। गुरुवार (2 जुलाई, 2026) को फैजाबाद बार एसोसिएशन संघ के नेतृत्व में भारी संख्या में वकीलों ने कचहरी परिसर से थाना राम जन्मभूमि (सिविल लाइंस) के लिए कूच किया।
- चार पदाधिकारियों पर शिकायत: वकील कालिका प्रसाद मिश्र ने बताया कि पुलिस को लिखित शिकायत सौंप दी गई है, जिसमें राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा और गोपाल राव समेत चार लोगों के नाम शामिल हैं। पुलिस ने जल्द ही प्राथमिकी (FIR) पंजीकृत करने का आश्वासन दिया है।
- कारसेवकपुरम में भारी सुरक्षा बल तैनात: वकीलों के कड़े विरोध और बढ़ते विवाद के बाद चंपत राय के निवास स्थान (तीर्थ क्षेत्र भवन) और कारसेवकपुरम की सुरक्षा चाक-चौबंद कर दी गई है। चंपत राय की सुरक्षा में सादी वर्दी के जवानों के अलावा 4 दारोगा और पीएसी (PAC) का एक दस्ता तैनात किया गया है। इसके साथ ही तीर्थ क्षेत्र भवन में मीडियाकर्मियों की एंट्री पर पूरी तरह बैन लगा दिया गया है।
2. अरविंद केजरीवाल का तीखा हमला: ‘इंजीनियरों से मांगा जाता था 40% कमीशन’
आम आदमी पार्टी (AAP) के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली में इस मामले पर एक बड़ी प्रेस कॉन्फ्रेंस की। केजरीवाल ने सीधे राम मंदिर ट्रस्ट के कर्ता-धर्ताओं और केंद्र सरकार को कटघरे में खड़ा किया।
केजरीवाल द्वारा लगाए गए मुख्य आरोप:
- फुटेज गायब करने का आरोप: राम मंदिर दान चोरी के सबूतों को छुपाने के लिए पिछले 8 महीने की सीसीटीवी फुटेज को डिलीट कर दिया गया है।
- जमीन की हेराफेरी: साल 2021 में एक पाठक परिवार ने जो जमीन 2 करोड़ रुपये में पार्टी के एक नेता को बेची थी, उसे महज 10 मिनट के भीतर ट्रस्ट को 18 करोड़ रुपये में बेच दिया गया। इसी तरह 3 करोड़ की जमीन 24 करोड़ में और 24 करोड़ की जमीन 95 करोड़ रुपये में ट्रस्ट के नाम ट्रांसफर की गई।
- कमीशनखोरी का खेल: मंदिर निर्माण के कार्य में लगे इंजीनियरों का आरोप है कि उनसे इस पुनीत कार्य के बदले 40% तक कमीशन मांगा जा रहा था।
3. SIT जांच का दूसरा चरण आज से; CBI को भी मिल सकती है कमान
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में उत्तर प्रदेश की योगी सरकार काफी सख्त नजर आ रही है। पहले चरण की जांच में चोरी की पुष्टि होने के बाद, सरकार ने एसआईटी (SIT) की समय सीमा को 15 दिनों के लिए और बढ़ा दिया है।
- ट्रस्ट का होगा वित्तीय ऑडिट: जांच के दूसरे चरण में एसआईटी की टीम राम मंदिर ट्रस्ट के हर एक बैंक अकाउंट, वित्तीय लेनदेन और ऑडिट रजिस्टरों की गहराई से स्क्रूटनी करेगी। मीडिया रिपोर्ट्स (इंडियन एक्सप्रेस) के मुताबिक, मामले की गंभीरता को देखते हुए इस पूरे घोटाले की जांच केंद्रीय जांच एजेंसी CBI को भी ट्रांसफर की जा सकती है।
- बुलडोजर एक्शन की तैयारी: इस मामले में सह-आरोपी लवकुश मिश्रा के निर्माणाधीन मकान पर बुलडोजर चलाने के लिए प्रशासन द्वारा नोटिस जारी कर दिया गया है। वहीं, मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला को 48 घंटे की पुलिस कस्टडी रिमांड पर लेने के लिए एंटी करप्शन स्पेशल कोर्ट अयोध्या में अर्जी दी गई है, जिसके घर से पुलिस ने पहले ही ₹20.39 लाख नगद और 1121 डॉलर जब्त किए थे।
4. आरोपों पर ट्रस्ट का पहला आधिकारिक बयान
इन सभी गंभीर विवादों और इस्तीफा देने की मांग के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य और निर्मोही अखाड़ा के महंत दिनेन्द्र दास जी महाराज चंपत राय के समर्थन में उतर आए हैं।
महंत दिनेन्द्र दास ने कहा
“मैं चंपत राय जी को पिछले 12-15 सालों से जानता हूं। ट्रस्ट में कोई भी निर्णय अकेले नहीं बल्कि सर्वसम्मति से लिया जाता है। मुझे कामकाज में किसी तरह की कोई गड़बड़ी नजर नहीं आती, इसलिए इस्तीफे का कोई सवाल ही नहीं उठता।”
उन्होंने स्पष्ट किया कि आगामी 6 और 12 जुलाई को गोविंद देव गिरी जी की अध्यक्षता में ट्रस्ट की दो महत्वपूर्ण बैठकें होने जा रही हैं, जिसमें सभी वित्तीय पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
श्रद्धालुओं के लिए अपडेट: अयोध्या के एसपी सुरक्षा बलरामचारी दुबे ने बताया कि मंदिर में आम जनता के लिए दर्शन व्यवस्था पूरी तरह सामान्य है और सुरक्षा कारणों से मीडियाकर्मियों को केवल मुख्य प्रवेश द्वार की स्टील रेलिंग तक ही कवरेज करने की अनुमति दी गई है।

