चीन का नया कानून: क्या दुनिया भर में बैठे विरोधियों को निशाना बना सकता है?

बीजिंग/शांग्री-ला: 23 वर्षीय झांग यादी, जिन्हें ‘तारा’ के नाम से भी जाना जाता है, को लेकर सामने आई रिपोर्टों ने चीन की आंतरिक नीतियों और विदेश में रहने वाले असहमति जताने वाले नागरिकों के अधिकारों पर नई बहस छेड़ दी है। माना जा रहा है कि तारा को पिछले साल चीन के युन्नान प्रांत के शांग्री-ला शहर में हिरासत में लिया गया था और फिलहाल वह चीनी अधिकारियों की कस्टडी में हैं।

रिपोर्टों के मुताबिक, तारा ब्रिटेन की एक प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रही थीं और फ्रांस में भी शिक्षा के दौरान उन्होंने तिब्बती अधिकारों से जुड़े एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म में संपादन कार्य में सहयोग किया था।

तारा की आखिरी चर्चित सोशल मीडिया गतिविधियों में से एक ‘X’ (पूर्व ट्विटर) पर की गई पोस्ट थी, जिसमें उन्होंने तिब्बती आध्यात्मिक नेता दलाई लामा को उनके जन्मदिन की शुभकामनाएं दी थीं। इसके बाद ही उनके खिलाफ चीन में कार्रवाई की आशंका जताई जा रही है।

चीन सरकार दलाई लामा को लंबे समय से “अलगाववादी” मानती है, जबकि दलाई लामा तिब्बत के लिए सांस्कृतिक और धार्मिक स्वायत्तता की वकालत करते रहे हैं।

इन्हीं गतिविधियों को लेकर आरोप है कि तारा पर “देश की एकता को कमजोर करने और अलगाववाद को बढ़ावा देने” का आरोप लगाया गया है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, तारा पिछले साल जुलाई में चीन लौटी थीं। इसी दौरान उन्हें युन्नान प्रांत के शांग्री-ला शहर में हिरासत में लिया गया। इसके बाद से उनके बारे में सार्वजनिक रूप से कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

अभी तक चीनी प्रशासन की ओर से उनके मामले पर विस्तृत आधिकारिक बयान नहीं दिया गया है।

यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब चीन ने ‘एथनिक यूनिटी लॉ’ नामक नया कानून लागू किया है, जो 1 जुलाई से प्रभावी हुआ है। इस कानून के तहत सरकार को यह अधिकार मिल सकता है कि वह विदेशों में रह रहे चीनी नागरिकों के खिलाफ भी कार्रवाई कर सके, यदि वे चीन की “राष्ट्रीय एकता” के खिलाफ गतिविधियों में शामिल पाए जाएं।

मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि यह कानून विदेशों में रहने वाले असहमति जताने वाले नागरिकों पर दबाव बढ़ा सकता है।

मानवाधिकार समूहों और यूरोपीय सांसदों ने चेतावनी दी है कि यदि इस कानून का इस्तेमाल विदेशों में रहने वाले लोगों के खिलाफ किया गया, तो इससे चीन और पश्चिमी देशों के संबंध प्रभावित हो सकते हैं।

आलोचकों का कहना है कि यह कानून तिब्बत, शिनजियांग और अन्य अल्पसंख्यक क्षेत्रों में पहले से चल रहे विवादों को और गहरा कर सकता है।

चीन सरकार लंबे समय से तिब्बत और शिनजियांग जैसे क्षेत्रों में अलगाववादी गतिविधियों को लेकर सख्त रुख अपनाती रही है। सरकार का दावा है कि उसका उद्देश्य देश की “राष्ट्रीय एकता” को बनाए रखना है।

लेकिन मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि इस नीति के तहत शांतिपूर्ण असहमति और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर भी रोक लगाई जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि तारा का मामला सिर्फ एक व्यक्ति की गिरफ्तारी नहीं है, बल्कि यह चीन की उस व्यापक नीति को दर्शाता है जिसके तहत विदेश में रहकर सरकार की आलोचना करने वालों पर भी कार्रवाई की जा सकती है।

तारा की गिरफ्तारी के बाद यह आशंका भी जताई जा रही है कि ऐसे मामलों में विदेश में रहने वाले नागरिकों के परिवारों पर भी दबाव बनाया जा सकता है।

निर्वासन में रह रहे तिब्बती कार्यकर्ता इस कानून और ऐसे मामलों को लेकर खास तौर पर चिंतित हैं। उनका कहना है कि इससे न केवल उनकी आवाज़ दब सकती है, बल्कि चीन लौटने पर उन्हें कानूनी कार्रवाई का सामना भी करना पड़ सकता है।

तारा यानी झांग यादी का मामला अभी जांच और अनिश्चितता के बीच है, लेकिन इसने चीन की नीतियों, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और विदेशों में रहने वाले असहमति जताने वाले नागरिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

फिलहाल सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि चीन प्रशासन इस मामले में आगे क्या कदम उठाता है और क्या तारा को लेकर कोई आधिकारिक स्थिति सार्वजनिक की जाती है।

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