भारत में क्यों बंद हो रहे हैं सिनेमाघर? 25 हजार से घटकर रह गए हजारों थिएटर, जानिए पूरी कहानी

एक समय था जब शुक्रवार का इंतजार सिर्फ फिल्म प्रेमियों को नहीं, बल्कि पूरे फिल्म उद्योग को रहता था। नई फिल्म रिलीज होते ही सिनेमाघरों के बाहर लंबी कतारें लग जाती थीं और टिकट के लिए मारामारी होती थी। लेकिन अब तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। आज बड़ी संख्या में लोग सिनेमाघर की बजाय घर बैठे OTT प्लेटफॉर्म पर फिल्में देखना पसंद कर रहे हैं।
इस बदलाव का सबसे बड़ा असर देश के सिंगल स्क्रीन थिएटरों पर पड़ा है। पिछले तीन दशकों में भारत में 20 हजार से ज्यादा सिंगल स्क्रीन सिनेमाघर बंद हो चुके हैं। अब केंद्र सरकार इस स्थिति को बदलने के लिए पूरे देश में सिनेमाघर खोलने के नियम आसान और एक समान बनाने की तैयारी कर रही है।
भारत में क्यों कम होते जा रहे हैं सिनेमाघर?
सिनेमाघरों की घटती संख्या के पीछे कई कारण हैं। OTT प्लेटफॉर्म के तेजी से बढ़ते प्रभाव ने दर्शकों की देखने की आदत बदल दी है। अब लोग कम कीमत में घर बैठे नई फिल्में और वेब सीरीज देखना पसंद कर रहे हैं।
इसके अलावा मल्टीप्लेक्स में महंगे टिकट, खाने-पीने का बढ़ता खर्च, बिजली और रखरखाव की लागत, सोशल मीडिया पर तुरंत आने वाले रिव्यू और अच्छे कंटेंट की कमी ने भी थिएटर कारोबार को प्रभावित किया है।
सबसे ज्यादा असर छोटे शहरों और कस्बों के सिंगल स्क्रीन थिएटरों पर पड़ा है, जहां दर्शकों की संख्या लगातार कम हुई है।
25 हजार से घटकर रह गए करीब 6 हजार सिंगल स्क्रीन
उद्योग से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, 1990 के दशक में भारत में करीब 25 हजार सिंगल स्क्रीन थिएटर थे। अब इनकी संख्या घटकर लगभग 6 हजार या उससे भी कम रह गई है।
जुलाई 2025 तक उपलब्ध इंडस्ट्री डेटा के मुताबिक देश में कुल करीब 17,698 स्क्रीन हैं, जिनमें मल्टीप्लेक्स और सिंगल स्क्रीन दोनों शामिल हैं।
भारत की आबादी के मुकाबले बेहद कम हैं थिएटर
भारत की आबादी 140 करोड़ से अधिक है, लेकिन इसके मुकाबले सिनेमाघरों की संख्या काफी कम है।
बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान का कहना है कि भारत में कुल करीब 10 हजार स्क्रीन हैं, जबकि अमेरिका में लगभग 40 हजार और चीन में 80 हजार से ज्यादा स्क्रीन मौजूद हैं। उनका मानना है कि थिएटरों की कमी की वजह से भारतीय फिल्म उद्योग अपनी पूरी क्षमता तक नहीं पहुंच पा रहा।
आमिर खान ने यह भी कहा कि देश की सबसे बड़ी हिट फिल्में भी केवल करीब 2 प्रतिशत आबादी ही थिएटर में जाकर देख पाती हैं।
शाहरुख खान ने भी उठाया था मुद्दा
अभिनेता शाहरुख खान ने भी कई बार कहा है कि फिल्में देखना धीरे-धीरे बड़े शहरों तक सीमित होता जा रहा है।
उनके अनुसार छोटे शहरों और कस्बों में कम लागत वाले आधुनिक सिनेमाघर बनाए जाने चाहिए ताकि आम लोग भी कम कीमत में बड़े पर्दे पर फिल्म देखने का आनंद उठा सकें।
चीन कैसे निकल गया भारत से आगे?
एक समय भारत में चीन से ज्यादा थिएटर स्क्रीन थीं। साल 2009 में चीन में केवल 6,323 स्क्रीन थीं, जबकि भारत में करीब 12 हजार स्क्रीन मौजूद थीं।
लेकिन अगले नौ वर्षों में चीन ने तेजी से निवेश किया और 2018 तक वहां स्क्रीन की संख्या बढ़कर 55,623 हो गई। अब चीन में 80 हजार से ज्यादा थिएटर स्क्रीन हैं। यही वजह है कि वहां फिल्मों की कमाई भी कई गुना ज्यादा होती है।
विदेशों में भारतीय फिल्मों की बड़ी कमाई
भारतीय फिल्मों को विदेशों में शानदार सफलता मिल रही है।
- ‘दंगल’ ने चीन में रिकॉर्ड कमाई की।
- ‘RRR’ को जापान, अमेरिका और कई अन्य देशों में जबरदस्त सफलता मिली।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भारत में भी चीन जैसी स्क्रीन संख्या होती तो कई भारतीय फिल्मों का घरेलू बॉक्स ऑफिस कलेक्शन कहीं अधिक हो सकता था।
क्यों बढ़ रही है OTT की लोकप्रियता?
OTT प्लेटफॉर्म ने दर्शकों को सुविधा और विकल्प दोनों दिए हैं।
इसके प्रमुख कारण हैं—
- घर बैठे नई फिल्में देखने की सुविधा।
- थिएटर की तुलना में कम खर्च।
- किसी भी समय कंटेंट देखने की आजादी।
- वेब सीरीज और अंतरराष्ट्रीय कंटेंट की बढ़ती उपलब्धता।
इसी वजह से दर्शक अब हर फिल्म थिएटर में देखने नहीं जाते।
सरकार क्या कर रही है?
केंद्र सरकार देशभर में नए सिनेमाघर खोलने की प्रक्रिया को आसान बनाना चाहती है।
इसके लिए राज्यों को मॉडल सिनेमा रेगुलेशन भेजा गया है, ताकि सभी राज्यों में नियम लगभग एक जैसे हों और मंजूरी की प्रक्रिया तेज हो सके।
इसके अलावा गीतकार प्रसून जोशी की अध्यक्षता में एक हाई-लेवल कमेटी बनाई गई है, जो भारतीय फिल्म उद्योग के विकास के लिए रोडमैप तैयार करेगी।
सरकार का उद्देश्य छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में भी नए सिनेमाघरों को बढ़ावा देना है, जिससे फिल्म उद्योग को नई रफ्तार मिल सके।
क्या नए थिएटर बदल पाएंगे तस्वीर?
सरकार की पहल से नए सिनेमाघरों का रास्ता आसान हो सकता है, लेकिन चुनौती सिर्फ नए थिएटर बनाने की नहीं है। जब मौजूदा सिंगल स्क्रीन दर्शकों की कमी और बढ़ती लागत के कारण बंद हो रहे हैं, तब फिल्म उद्योग को कंटेंट, टिकट कीमत, दर्शक अनुभव और डिजिटल प्रतिस्पर्धा जैसे कई मोर्चों पर भी काम करना होगा।
यही तय करेगा कि आने वाले वर्षों में बड़े पर्दे का आकर्षण फिर लौटेगा या OTT का दबदबा और मजबूत होगा।



