मॉनसून पर अल-नीनो का ‘ग्रहण’: देश के 111 जिलों पर महा-संकट, जानें दिल्ली में कब होगी एंट्री

नई दिल्ली। देशभर में मौसम का मिजाज जरूर बदला है, लेकिन इस साल मॉनसून की सुस्त रफ्तार ने चिंताएं बढ़ा दी हैं। अल-नीनो के कड़े तेवरों के कारण दक्षिण-पश्चिम मॉनसून अटक गया है, जिससे देश के 12 राज्यों के 111 जिलों में फसलों पर गंभीर संकट मंडराने लगा है। मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक, राजधानी दिल्ली को मॉनसून की पहली फुहारों के लिए अभी थोड़ा और इंतजार करना पड़ेगा।

दिल्ली में मॉनसून पहुंचने की सामान्य तारीख 27 जून होती है, लेकिन इस बार इसमें करीब एक हफ्ते की देरी होने की संभावना है।

  • संभावित तारीख: मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, एक नया सर्कुलेशन पैटर्न बन रहा है। अगर यह 4 जुलाई से रफ्तार पकड़ता है, तो दिल्ली-एनसीआर और उत्तर-पश्चिम भारत में 4 से 5 जुलाई के आसपास मॉनसून दस्तक दे सकता है।
  • अगले 5 दिन का हाल: अगले 5 दिनों तक दिल्ली और आसपास के इलाकों में मॉनसून के आगे बढ़ने की उम्मीद कम है। हालांकि, अगले 2-3 दिनों में यह गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, यूपी, बिहार और उत्तराखंड के कुछ हिस्सों में आगे बढ़ेगा।

मौसम विभाग की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल जून के महीने में देश में औसत से बेहद कम बारिश दर्ज की गई है।

क्षेत्र/पैमानासामान्य बारिशइस साल हुई बारिश (29 जून तक)कमी (%)
अखिल भारतीय औसत157.7 mm92.2 mm42% कम
सेंट्रल इंडिया (मध्य भारत)54% कम (सबसे प्रभावित)
पूर्वी व उत्तर-पूर्वी भारत41% कम
उत्तर-पश्चिम भारत30% कम
दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत28% कम

चेतावनी: भले ही मॉनसून सुस्त हो, लेकिन 29 जून से 3 जुलाई के बीच सब-हिमालयन पश्चिम बंगाल, सिक्किम, कोंकण, गोवा और मध्य महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट भी जारी किया गया है।

कमजोर मॉनसून के कृषि पर पड़ने वाले बुरे असर से निपटने के लिए केंद्रीय कृषि मंत्रालय और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने कमर कस ली है। वैज्ञानिक डेटा के आधार पर देश के 315 संवेदनशील जिलों का आकलन किया गया है, जहां कम बारिश और सिंचाई संकट का खतरा सबसे ज्यादा है।

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने तैयारियों को लेकर अहम जानकारियां साझा की हैं:

  • रोजगार की गारंटी: अल-नीनो से प्रभावित जिलों में खेती या रोजगार का संकट होने पर प्रभावित लोगों को ‘जी राम जी’ कानून के तहत रोजगार मुहैया कराया जाएगा।
  • जल संरक्षण को सर्वोच्च वरीयता: 1 जुलाई से शुरू हो रहे नए दिशा-निर्देशों के तहत राज्यों को पुरानी जल संरचनाओं (Water Bodies) को ठीक करने और नए छोटे जलाशय बनाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि बारिश के पानी की एक-एक बूंद को सहेजा जा सके।

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