अयोध्या में ‘चंदा चोरी’ पर महा-संग्राम: पदयात्रा से पहले ही कांग्रेस के दिग्गज हाउस अरेस्ट, अजय राय होटल में नजरबंद

अयोध्या/लखनऊ। राम मंदिर चढ़ावा चोरी और दान गबन मामले ने अब उत्तर प्रदेश में एक बड़े सियासी तूफान का रूप ले लिया है। इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) को चौतरफा घेरने की कोशिश कर रहे विपक्ष के मंसूबों पर प्रशासन ने पानी फेर दिया है।
रामलला के खजाने में हुई कथित लूट के खिलाफ अयोध्या में बड़ी पदयात्रा और प्रदर्शन करने जा रहे कांग्रेस और सपा के दिग्गज नेताओं को पुलिस ने रास्ते में ही रोककर हाउस अरेस्ट (नजरबंद) कर लिया है।
1. होटल बना ‘जेल’: अजय राय ‘पदम श्री पैलेस’ में कैद
इस विरोध प्रदर्शन की कमान संभालने के लिए उत्तर प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय खुद अयोध्या पहुंचे थे। लेकिन उनके कदम बढ़ाने से पहले ही पुलिस ने कड़ी कार्रवाई की:
- होटल में घेराबंदी: अजय राय को अयोध्या के ‘पदम श्री पैलेस होटल’ में ही नजरबंद कर दिया गया है।
- सख्त पहरा: होटल के बाहर भारी पुलिस बल तैनात है। अजय राय को किसी से भी मिलने या होटल से बाहर निकलने की सख्त मनाही है।
2. अमेठी से बाराबंकी तक दिग्गजों की ‘नाकेबंदी’
प्रशासन ने सिर्फ अयोध्या ही नहीं, बल्कि आस-पास के जिलों में भी कांग्रेस नेताओं की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है ताकि कोई भी अयोध्या की सीमा में प्रवेश न कर सके:
- दीपक सिंह (वरिष्ठ नेता, अमेठी): इन्हें उनके निजी आवास पर ही पुलिस ने नजरबंद कर दिया है।
- किशोरी लाल शर्मा (सांसद, अमेठी): हालिया चुनाव में बड़ी जीत दर्ज करने वाले सांसद के घर के बाहर भी पुलिस का कड़ा पहरा है, वे हाउस अरेस्ट हैं।
- तनुज पुनिया (सांसद, बाराबंकी): इन्हें भी बाराबंकी में इनके घर पर ही रोक दिया गया है।
3. पुलिस-प्रशासन का रुख: “माहौल बिगाड़ने की इजाजत नहीं”
इस बड़ी कार्रवाई पर प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि अयोध्या एक बेहद संवेदनशील धार्मिक नगरी है। ‘चंदा चोरी’ के मामले में एसआईटी (SIT) और पुलिस पहले से ही जांच कर रही है और गिरफ्तारियां भी हुई हैं। ऐसे में किसी भी राजनीतिक दल को कानून-व्यवस्था हाथ में लेने या विरोध प्रदर्शन के नाम पर अयोध्या का माहौल खराब करने की इजाजत नहीं दी जा सकती।
विपक्ष का पलटवार: इधर नजरबंद हुए कांग्रेस नेताओं का कहना है कि सरकार भ्रष्टाचार को छुपाने के लिए विपक्ष की आवाज को दबा रही है और लोकतंत्र की हत्या की जा रही है।
साफ है कि अयोध्या की सुरक्षा और साख को लेकर जहां प्रशासन कोई जोखिम नहीं उठाना चाहता, वहीं विपक्ष इस मुद्दे को ठंडा नहीं होने देना चाहता। आने वाले दिनों में यह टकराव और बढ़ने के आसार हैं।


