‘SIT का मतलब Share in Theft है क्या?’ चढ़ावा विवाद पर अखिलेश यादव का बड़ा हमला

लखनऊ। अयोध्या के राम मंदिर में कथित चढ़ावा गड़बड़ी और SIT जांच रिपोर्ट को लेकर समाजवादी पार्टी प्रमुख Akhilesh Yadav ने उत्तर प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि आस्था और विश्वास से जुड़े मामले में किसी भी तरह की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जा सकती और यदि चढ़ावे में अनियमितता हुई है तो यह “महापाप” है।

अखिलेश यादव ने कहा कि अयोध्या में जो कुछ हुआ है, वह बेहद गंभीर मामला है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर में देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर से श्रद्धालु चढ़ावा भेजते हैं और यह सनातन परंपरा का हिस्सा है।

उन्होंने कहा, “पूरे प्रदेश, देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर से जो चढ़ावा आता है, वह लोगों की आस्था से जुड़ा है। अगर इस पर सवाल उठ रहे हैं तो यह बहुत संवेदनशील विषय है। आस्था के साथ खिलवाड़ स्वीकार नहीं किया जा सकता।”

राम मंदिर चढ़ावा मामले में गठित SIT की जांच को लेकर अखिलेश यादव ने तंज कसते हुए कहा, “SIT का मतलब क्या हुआ, Share in Theft? यह विश्वास में सेंध लगाने जैसा है। यह महापाप हुआ है और आस्था के साथ खिलवाड़ हुआ है।”

उनके इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर राम मंदिर और चढ़ावा विवाद को लेकर बहस तेज होने की संभावना है।

मुख्यमंत्री Yogi Adityanath के बेंगलुरु दौरे और निवेशकों से मुलाकात को लेकर भी अखिलेश यादव ने सवाल उठाए।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में बड़े पैमाने पर जमीनें दी जा रही हैं और अब सरकार निवेश के लिए बेंगलुरु जा रही है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “ये बेंगलुरु में निवेश लाने नहीं, डोसा खाने जा रहे हैं। जब सरकार जाने वाली हो तो निवेश कौन लेकर आएगा?”

लखनऊ के अलीगंज इलाके में हुए अग्निकांड को लेकर भी सपा प्रमुख ने सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते सुरक्षा उपाय किए गए होते और पर्याप्त संसाधन उपलब्ध होते तो कई जिंदगियां बचाई जा सकती थीं।

अखिलेश यादव ने कहा, “अगर समय पर सभी सुविधाएं मौजूद होतीं और पहले से ध्यान दिया गया होता तो यह हादसा नहीं होता। सरकार समय रहते जाग जाती तो बच्चों की जान बचाई जा सकती थी।”

सपा प्रमुख ने दावा किया कि राहत और बचाव कार्यों में कई कमियां सामने आईं। उन्होंने कहा कि कई मामलों में लोगों की मौत आग से ज्यादा धुएं और दम घुटने के कारण हुई।

उन्होंने सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि आपात स्थिति में बचाव कार्यों के लिए पर्याप्त उपकरण तक उपलब्ध नहीं थे। साथ ही उन्होंने पूर्व की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि सुरक्षा मानकों को लेकर सरकार को पहले से सतर्क रहना चाहिए था।

राम मंदिर चढ़ावा विवाद और लखनऊ अग्निकांड को लेकर दिए गए अखिलेश यादव के बयानों के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। एक ओर विपक्ष सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहा है, वहीं सत्तापक्ष इन आरोपों का जवाब देने की तैयारी में है।

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