लखनऊ अग्निकांड: फोरेंसिक टीम घटनास्थल पर पहुंची, अब तक क्या-क्या हुआ?

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज इलाके में सोमवार दोपहर हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। उषा मेहता मार्ग स्थित तीन मंजिला व्यावसायिक इमारत में लगी आग में 15 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि नौ लोग घायल हुए हैं। हादसे के बाद मंगलवार को फोरेंसिक टीम घटनास्थल पर पहुंची और आग लगने के कारणों की जांच शुरू कर दी। प्रारंभिक जांच में एसी डक्ट से आग लगने की आशंका जताई जा रही है, हालांकि वास्तविक कारण फोरेंसिक रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

सोमवार दोपहर अचानक इमारत में आग लगने के बाद कुछ ही मिनटों में पूरा परिसर धुएं से भर गया। इमारत में कोचिंग सेंटर, लाइब्रेरी और एनिमेशन स्टूडियो संचालित हो रहे थे, जहां बड़ी संख्या में छात्र और कर्मचारी मौजूद थे। आग के साथ फैले जहरीले धुएं ने लोगों को बाहर निकलने का मौका नहीं दिया और कई लोग अंदर ही फंस गए।

सूचना मिलते ही दमकल विभाग और राहत-बचाव दल मौके पर पहुंचे। घंटों तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान कुल 22 लोगों को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के डॉक्टरों ने इनमें से 15 लोगों को मृत घोषित कर दिया। सात घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई, जबकि दो लोगों का इलाज अभी भी जारी है।

नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा के अनुसार शुरुआती जांच में सामने आया है कि अधिकांश लोगों की मौत आग की लपटों से नहीं बल्कि धुएं के कारण दम घुटने से हुई। इमारत में पर्याप्त आपातकालीन निकास व्यवस्था नहीं होने और धुआं तेजी से फैलने के कारण लोग बाहर नहीं निकल सके।

स्थानीय विधायक नीरज बोरा ने भी कहा कि बड़ी संख्या में लोगों की मौत धुएं के कारण हुई है। उन्होंने अलीगंज और जानकीपुरम क्षेत्र में बढ़ते कोचिंग संस्थानों को देखते हुए लंबे समय से फायर स्टेशन की मांग किए जाने की बात भी कही।

हादसे में जान गंवाने वाले 24 वर्षीय आदित्य श्रीवास्तव के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। आदित्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा था और बड़े सपने लेकर कोचिंग जाता था। उसके मामा ने कहा कि परिवार ने एक होनहार युवा खो दिया है, जिसकी जिंदगी अभी शुरू ही हुई थी।

वहीं 24 वर्षीय अब्दुल रहमान भी इस हादसे का शिकार हो गया। वह परिवार का इकलौता कमाने वाला सदस्य था। उसके पिता लकवाग्रस्त हैं और मां बेटे की मौत के सदमे से टूट चुकी हैं। हादसे के बाद उसका दोस्त परिवार के साथ अस्पताल से लेकर पोस्टमार्टम हाउस तक मौजूद रहा।

हादसे के दौरान कई छात्रों ने अपने परिजनों को फोन कर मदद मांगी थी। सूचना मिलते ही परिजन घटनास्थल पर पहुंचे, लेकिन आग और धुएं की भयावह स्थिति को देखते हुए किसी को भी अंदर जाने की अनुमति नहीं दी गई। मौके पर कई परिवार अपने बच्चों के लिए बिलखते नजर आए। एक मां लगातार अपने बेटे तक पहुंचने की गुहार लगाती रही, लेकिन राहतकर्मियों ने सुरक्षा कारणों से उसे रोक दिया।

हादसे के बाद प्रशासन ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस ने इमारत के मालिकों समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में राम कृष्ण उपाध्याय, वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला, तुषार कृष्ण जायसवाल और सुरेश कुमार साहू शामिल हैं।

इसके अलावा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर बिजली विभाग, अग्निशमन विभाग और लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) के चार अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। प्रशासन यह जांच कर रहा है कि भवन में अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना की जांच के लिए दो सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। एसआईटी को सात दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। टीम आग लगने के कारणों, सुरक्षा मानकों में हुई लापरवाही और जिम्मेदार लोगों की भूमिका की जांच करेगी।

घटना की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपना अलीगढ़ दौरा बीच में छोड़कर लखनऊ पहुंचे। उन्होंने घटनास्थल का निरीक्षण किया और केजीएमयू पहुंचकर घायलों से मुलाकात की। रक्षा मंत्री एवं लखनऊ के सांसद राजनाथ सिंह ने भी घटनास्थल और ट्रॉमा सेंटर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्यों का जायजा लिया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हादसे पर गहरा दुख जताते हुए मृतकों के परिजनों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से दो-दो लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की सहायता देने की घोषणा की है। वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मृतकों के परिवारों को पांच-पांच लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया है।

फिलहाल फोरेंसिक टीम घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्यों की जांच कर रही है। पूरे प्रदेश की निगाहें अब एसआईटी और फोरेंसिक रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिनसे यह स्पष्ट होगा कि आखिर 15 जिंदगियों को लील लेने वाली इस भयावह त्रासदी के पीछे जिम्मेदार कौन है।

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