G7 Summit 2026: फ्रांस में लेबनान सीजफायर पर G7 देशों का साझा प्रस्ताव; प्रस्ताव के बीच इजरायल का लेबनान पर बड़ा हमला, 4 की मौत!

मुख्य बिंदु
- ज्वाइंट स्टेटमेंट जारी: फ्रांस में समिट के आखिरी दिन बुधवार सुबह हुई बैठक में G7 देशों ने लेबनान में तुरंत और मजबूत सीजफायर की मांग उठाई।
- हिज्बुल्लाह को ‘वेपन फ्री’ करने की तैयारी: लेबनान की संप्रभुता और हथियारों पर वहां की सरकार की मोनोपोली का दुनिया की महाशक्तियों ने किया समर्थन।
- कूटनीतिक विरोधाभास: एक तरफ फ्रांस में जुटे दुनिया के दिग्गज नेता, दूसरी तरफ इजरायल ने साउथ लेबनान पर किया एयरस्ट्राइक, 4 नागरिकों की मौत।
- नाटो (NATO) का बड़ा बयान: ईरान और अमेरिका के बीच हुई ऐतिहासिक डील का नाटो ने किया स्वागत, ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ को खोलने की योजना को बताया बड़ा कदम।
नया एंगल: कूटनीतिक टेबल पर शांति का प्रस्ताव, जमीन पर बरस रहे इजरायली बम!
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे चौंकाने वाला और गंभीर पहलू यह है कि जब दुनिया की सात सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के प्रमुख फ्रांस में वैश्विक शांति का खाका खींच रहे थे, ठीक उसी वक्त इजरायल ने इस कूटनीतिक प्रयास को ठेंगा दिखा दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मौजूदगी में जब G7 देश लेबनान शांति प्रस्ताव पर मुहर लगा रहे थे, तभी इजरायली फाइटर जेट्स ने साउथ लेबनान को निशाना बनाया। इस भीषण हमले में 4 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जिसने इस वैश्विक बैठक की टाइमिंग और इजरायल के अड़ियल रुख पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
‘द गार्जियन’ का खुलासा: हिज्बुल्लाह को हथियारों से मुक्त करने का प्लान
अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थान ‘द गार्जियन’ के मुताबिक, G7 देशों द्वारा जारी आधिकारिक ज्वाइंट स्टेटमेंट में लेबनान संकट को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाया गया है। साझा बयान में कहा गया है:
“हम लेबनान में तुरंत और एक मजबूत सीजफायर की मांग करते हैं। इसके साथ ही हम लेबनान की लीडरशिप की उन कोशिशों का पूरा समर्थन करते हैं, जिनका मकसद हिज्बुल्लाह को पूरी तरह वेपन-फ्री (हथियार मुक्त) करना है। लेबनान में हथियारों पर सिर्फ वहां की चुनी हुई सरकार की मॉनोपोली (एकाधिकार) होनी चाहिए, ताकि इंटरनेशनल सिक्योरिटी की गारंटी के साथ देश की अखंडता की रक्षा हो सके।”
मोदी-ट्रंप मुलाकात ने बटोरी सुर्खियां, भारत ने मांगा स्थायी समाधान
इस महा-बैठक के बीच भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की द्विपक्षीय मुलाकात ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा। पीएम मोदी ने इस वैश्विक मंच से एक बार फिर साफ किया कि किस्तों में शांति के बजाय इस युद्ध का एक ‘स्थायी और कूटनीतिक समाधान’ खोजा जाना चाहिए, ताकि बेगुनाह नागरिकों की जान बचाई जा सके। दोनों वैश्विक नेताओं के बीच हुई इस गर्मजोशी भरी मुलाकात को इस समिट का सबसे बड़ा आकर्षण माना जा रहा है।
नाटो (NATO) ने किया यूएस-ईरान ऐतिहासिक डील का स्वागत
मिडिल ईस्ट में शांति की बहाली के लिए एक और बड़ी खबर पश्चिमी देशों के सैन्य संगठन नाटो (NATO) की तरफ से आई है। नाटो के सेक्रेटरी जनरल मार्क रुटे ने एक प्रेस ब्रीफिंग में मध्य-पूर्व में युद्ध खत्म करने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच हुई हालिया डील का खुलकर स्वागत किया।
मार्क रुटे ने कहा “वैश्विक व्यापार के लिए ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने की जो योजना बनाई गई है, वह कूटनीति के लिहाज से बहुत बड़ा और ऐतिहासिक कदम साबित होगी। मुझे खुशी है कि फ्रांस और यूके के नेतृत्व वाली इस शांति पहल के जरिए नाटो के कई सहयोगी देश इसके समर्थन में मजबूती से खड़े हैं।”
साल 2026 का यह G7 शिखर सम्मेलन एक बेहद नाजुक मोड़ पर खत्म हुआ है। जहां कागजों पर अमेरिका, नाटो और G7 देश ईरान-यूएस डील और लेबनान सीजफायर का खाका तैयार कर चुके हैं, वहीं इजरायल के लगातार होते हमले यह दर्शाते हैं कि कूटनीति की राह अभी इतनी आसान नहीं है। अब देखना यह होगा कि ट्रंप प्रशासन और भारतीय प्रधानमंत्री मोदी का साझा प्रभाव इजरायल को इस शांति समझौते के दायरे में लाने में कितना कामयाब होता है।



