CM विजय को हाई कोर्ट से बड़ा झटका, जानें क्या है मामला

चेन्नई: मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच ने करूर भगदड़ में जान गंवाने वालों के परिजनों को सरकारी नौकरी देने के मुख्यमंत्री विजय के फैसले को रद्द कर दिया है। अदालत के इस फैसले को तमिलनाडु सरकार के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मुख्यमंत्री विजय ने इस महीने की शुरुआत में करूर दौरे के दौरान भगदड़ में मारे गए लोगों के परिवारों को अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी देने की घोषणा की थी। इसके बाद राज्य सरकार ने 32 कानूनी वारिसों के लिए नियुक्ति आदेश भी जारी किए थे।
क्या है करूर भगदड़ मामला?
करूर में पिछले वर्ष 27 सितंबर को तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) की एक रैली के दौरान भगदड़ मच गई थी। इस हादसे में 41 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि कई अन्य घायल हुए थे। घटना के बाद भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठे थे।
बाद में सुप्रीम कोर्ट ने मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए जांच राज्य की विशेष जांच टीम (SIT) से केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दी थी। जांच में रैली के आयोजन, भीड़ नियंत्रण, कार्यक्रम की टाइमलाइन और आयोजकों व प्रशासन के बीच समन्वय जैसे पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।
सरकार ने क्या फैसला लिया था?
मुख्यमंत्री विजय ने हादसे में जान गंवाने वाले 32 पीड़ित परिवारों के कानूनी वारिसों को अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी देने का फैसला किया था। सरकार का कहना था कि इसका उद्देश्य प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहारा और पुनर्वास उपलब्ध कराना है।
AIADMK ने किया था विरोध
सरकार के इस फैसले का AIADMK ने विरोध किया था। पार्टी के वरिष्ठ नेता आर.बी. उदयकुमार ने आरोप लगाया था कि सरकारी नौकरियां नियमों के तहत तमिलनाडु पब्लिक सर्विस कमीशन (TNPSC) की प्रक्रिया से दी जानी चाहिए।
उन्होंने कहा था कि राजनीतिक आधार पर नियमों से हटकर सरकारी नौकरी देना उचित नहीं है और इससे उन लाखों युवाओं के साथ अन्याय होगा जो वर्षों से नियमित भर्ती प्रक्रिया का इंतजार कर रहे हैं।
अब आगे क्या?
हाई कोर्ट द्वारा सरकार के फैसले को रद्द किए जाने के बाद फिलहाल पीड़ित परिवारों को सरकारी नौकरी देने की प्रक्रिया पर रोक लग गई है। सरकार आगे इस फैसले को चुनौती देती है या नहीं, इस पर सभी की नजर रहेगी।



