पेपर लीक पर लगेगी लगाम? लोकसभा में आज परीक्षा कानून बदलने वाले बिल पर बहस

नई दिल्ली: लोकसभा में मंगलवार (28 जुलाई 2026) को पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) अमेंडमेंट बिल पर चर्चा होगी। यह बिल परीक्षाओं में नकल, पेपर लीक और अन्य अनुचित तरीकों को रोकने के लिए बनाए गए कानून में बदलाव से जुड़ा है।
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह सदन में इस बिल को पेश करेंगे और सरकार की ओर से इसके प्रावधानों की जानकारी देंगे। सरकार का कहना है कि संशोधित कानून के जरिए परीक्षा में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ और कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सकेगी।
NDA के कई बड़े नेता चर्चा में होंगे शामिल
इस बिल पर होने वाली चर्चा में NDA की ओर से कई वरिष्ठ सांसद हिस्सा ले सकते हैं। बीजेपी की तरफ से बांसुरी स्वराज, तेजस्वी सूर्या, अनुराग ठाकुर, शशांक मणि त्रिपाठी, भोला सिंह, संजय जायसवाल और विष्णु दत्त शर्मा के बोलने की संभावना है।
NDA के सहयोगी दलों की ओर से भी कई सांसद चर्चा में हिस्सा ले सकते हैं। इनमें अपना दल (S) की अनुप्रिया पटेल, राष्ट्रीय लोक दल (RLD) के चंदन चौहान, शिवसेना (शिंदे गुट) के श्रीकांत शिंदे, NCP के सुनील तटकरे और TDP के लावू कृष्णा के नाम शामिल हैं।
NDA की ओर से करीब 12 नेताओं के नाम
सूत्रों के मुताबिक, NDA की ओर से करीब 12 नेताओं के नाम चर्चा के लिए तय किए गए हैं। इनमें बीजेपी के कई युवा और अनुभवी सांसद शामिल हैं।
सहयोगी दलों की ओर से श्रीकांत शिंदे, अरुण भारती, आलोक सुमन और अनुप्रिया पटेल भी सदन में अपनी बात रख सकते हैं। इसके अलावा कुछ अन्य सांसदों के भी चर्चा में शामिल होने की संभावना है।
विपक्ष भी सरकार को घेरने की तैयारी में
विपक्ष की ओर से भी कई बड़े नेता इस बिल पर अपनी राय रख सकते हैं। कांग्रेस की तरफ से राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, केसी वेणुगोपाल और गौरव गोगोई के चर्चा में हिस्सा लेने की संभावना है।
वहीं समाजवादी पार्टी अध्यक्ष और सांसद अखिलेश यादव तथा NCP (शरद पवार गुट) की सांसद सुप्रिया सुले भी बिल पर विपक्ष का पक्ष रख सकती हैं।
पेपर लीक मामलों के बीच अहम मानी जा रही चर्चा
लोकसभा में इस बिल पर होने वाली चर्चा को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पिछले कुछ समय में देशभर में कई प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं, जिसके बाद छात्रों ने विरोध प्रदर्शन भी किए हैं।
सरकार का तर्क है कि नया प्रावधान परीक्षा व्यवस्था को पारदर्शी और सुरक्षित बनाने में मदद करेगा। वहीं विपक्ष परीक्षा व्यवस्था की खामियों, छात्रों की परेशानियों और जवाबदेही के मुद्दों को सदन में उठा सकता है।
अब देखना होगा कि लोकसभा में इस बिल पर बहस के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच किस तरह के तर्क सामने आते हैं।



