क्या मिडल ईस्ट में इजरायल को अकेला छोड़ देगा अमेरिका?

Donald Trump vs Benjamin Netanyahu: मिडल ईस्ट की जंग में अब तक कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे अमेरिका और इजरायल के बीच अब बड़ी दरार पड़ती दिख रही है। ईरान के खिलाफ जिस इजरायल का अमेरिका सबसे बड़ा ढाल बना हुआ था, अब उसी को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दोटूक अल्टीमेटम दे दिया है। ट्रंप के बदले तेवरों से साफ है कि वाइट हाउस अब बेंजामिन नेतनयाहू की मनमानी के मूड में नहीं है।

अमरीकी मीडिया आउटलेट Axios की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप और नेतनयाहू के बीच ईरान नीति को लेकर मतभेद गहरे हो गए हैं। ट्रंप ने नेतनयाहू को चेतावनी देते हुए यहाँ तक कह दिया है कि अगर इजरायल ने दोबारा ईरान से पंगा लिया, तो उसे यह जंग अकेले ही लड़नी पड़ सकती है

Axios को दिए एक फोन इंटरव्यू में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद इस बात का खुलासा किया कि उन्होंने इजरायली पीएम से क्या कहा। ट्रंप के मुताबिक:

“मैंने बीबी (बेंजामिन नेतनयाहू) से साफ कह दिया है— ‘बीबी, आपको सावधान रहना चाहिए, नहीं तो बहुत जल्द आप खुद को बिल्कुल अकेला पाएंगे।'”

ट्रंप का यह बयान साफ संकेत देता है कि 28 फरवरी को ईरान पर साझा हमले के बाद, अब अमेरिका पश्चिम एशिया में किसी और बड़े और लंबे युद्ध में सीधे तौर पर फंसना नहीं चाहता।

इस पूरे विवाद के पीछे दोनों नेताओं की अलग-अलग रणनीतियां और सियासी हित हैं:

  • ट्रंप की ‘डील’ वाली कूटनीति: डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि ईरान अब परमाणु हथियार न बनाने के लिए राजी हो रहा है। ट्रंप अगले दो हफ्तों के भीतर ईरान पर अपनी कूटनीतिक जीत का एलान करना चाहते हैं। वे बातचीत के जरिए तनाव कम कर अमेरिका को युद्ध से दूर रखना चाहते हैं।
  • नेतनयाहू का ‘नो कॉम्प्रोमाइज’ रुख: दूसरी तरफ, इजरायली पीएम बेंजामिन नेतनयाहू ईरान को पूरी तरह नेस्तनाबूद करने पर तुले हैं। नेतनयाहू का मानना है कि ‘तानाशाह खामेनेई और नसरल्लाह’ को खत्म करने के बाद अब ईरान को परमाणु शक्ति बनने से रोकने का यह आखिरी मौका है, जिसे वे गंवाना नहीं चाहते।

यह कड़वाहट ऐसे समय में सामने आई है जब इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष के 100 दिन पूरे हो चुके हैं। हाल ही में दोनों ओर से हुए मिसाइल हमलों ने सीजफायर की उम्मीदों पर पानी फेर दिया था। वाइट हाउस को डर है कि नेतनयाहू की कोई भी नई सैन्य कार्रवाई अमेरिका की शांति और समझौते की कोशिशों को पूरी तरह पटरी से उतार सकती है।

हालांकि, ट्रंप की इस चेतावनी के बाद भी नेतनयाहू झुकने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने साफ किया, “अगर ईरान ने दोबारा गलती की तो उसे जबरदस्त जवाब मिलेगा। इजरायल को आत्मरक्षा का अधिकार है और हम इसका इस्तेमाल करेंगे। यही बात मैंने अपने दोस्त राष्ट्रपति ट्रंप से भी कह दी है।”

अब देखना यह होगा कि क्या नेतनयाहू सुपरपावर अमेरिका की इस चेतावनी को गंभीरता से लेते हैं, या फिर मिडल ईस्ट में ‘महायुद्ध’ का एक नया दौर शुरू होने वाला है।

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