मीनाक्षी नटराजन का नामांकन क्यों हुआ रद्द? जानिए फॉर्म-26 के नियम और चुनाव आयोग के प्रावधान

नई दिल्ली। राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने का मामला अब निर्वाचन आयोग तक पहुंच गया है। कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को चुनाव आयोग से मुलाकात कर रिटर्निंग अधिकारी के फैसले पर आपत्ति जताई। पार्टी का कहना है कि नामांकन रद्द करने का फैसला नियमों के अनुरूप नहीं है, जबकि चुनाव अधिकारियों का मानना है कि फॉर्म-26 में जरूरी जानकारी नहीं दी गई थी।

मध्य प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने वाली कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रिटर्निंग अधिकारी ने खारिज कर दिया। आरोप है कि उन्होंने फॉर्म-26 में तेलंगाना से जुड़े एक लंबित मामले की जानकारी नहीं दी थी।

कांग्रेस का तर्क है कि जिस मामले का जिक्र किया जा रहा है, उसमें न तो अदालत ने अपराध का संज्ञान लिया है और न ही आरोप तय हुए हैं। इसलिए उसका खुलासा करना कानूनी रूप से आवश्यक नहीं था।

नामांकन रद्द होने के बाद कांग्रेस नेताओं ने निर्वाचन आयोग से मुलाकात की। कांग्रेस नेता और वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा ने उम्मीद जताई कि आयोग संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत मामले की समीक्षा करेगा। यदि आयोग से राहत नहीं मिलती है तो पार्टी अदालत का रुख कर सकती है।

फॉर्म-26 वह शपथ पत्र है जिसे चुनाव लड़ने वाले प्रत्येक उम्मीदवार को नामांकन के साथ जमा करना होता है। इसमें उम्मीदवार को अपनी आपराधिक पृष्ठभूमि, संपत्ति, देनदारियों और शैक्षणिक योग्यता से जुड़ी पूरी जानकारी देनी होती है।

सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग के निर्देशों के अनुसार, इस फॉर्म में कोई भी कॉलम खाली नहीं छोड़ा जा सकता। यदि कोई जानकारी लागू नहीं होती है तो उसमें स्पष्ट रूप से “शून्य” या “लागू नहीं” लिखना जरूरी होता है।

1. लंबित आपराधिक मामले

उम्मीदवार के खिलाफ चल रहे सभी लंबित आपराधिक मामलों का विवरण देना होता है।

2. दोषसिद्धि की जानकारी

यदि किसी मामले में सजा हुई है तो उसका पूरा ब्योरा देना अनिवार्य है।

3. अदालत और केस का विवरण

एफआईआर नंबर, केस नंबर, अदालत का नाम और संबंधित धाराओं की जानकारी देनी होती है।

4. अपराध का संक्षिप्त विवरण

मामले की प्रकृति और आरोपों का संक्षिप्त विवरण भी दर्ज करना होता है।

5. अपील की स्थिति

यदि किसी फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय या अन्य अदालत में अपील लंबित है तो उसका उल्लेख करना पड़ता है।

सुप्रीम कोर्ट ने कई महत्वपूर्ण फैसलों में उम्मीदवारों की आपराधिक पृष्ठभूमि और संपत्ति संबंधी जानकारी सार्वजनिक करना अनिवार्य बताया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि मतदाताओं को उम्मीदवारों के बारे में पूरी जानकारी मिलनी चाहिए, ताकि वे सूचित निर्णय ले सकें।

नामांकन निम्न स्थितियों में रद्द किया जा सकता है—

  • आपराधिक मामलों की जानकारी छिपाने पर
  • संपत्ति या देनदारियों का गलत विवरण देने पर
  • फॉर्म-26 में महत्वपूर्ण कॉलम खाली छोड़ने पर
  • झूठा हलफनामा देने पर
  • निर्धारित समय में संशोधित जानकारी जमा नहीं करने पर

यदि कोई उम्मीदवार जानबूझकर गलत जानकारी देता है या महत्वपूर्ण तथ्य छिपाता है तो उसके खिलाफ जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 125A के तहत कार्रवाई हो सकती है। इसके तहत छह महीने तक की जेल, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है।

फिलहाल सभी की नजर निर्वाचन आयोग के फैसले पर टिकी है। यदि आयोग कांग्रेस की दलीलों से सहमत नहीं होता है तो मामला अदालत तक पहुंच सकता है। ऐसे में यह विवाद राज्यसभा चुनाव और चुनावी नामांकन प्रक्रिया से जुड़े नियमों पर एक महत्वपूर्ण कानूनी बहस का विषय बन सकता है।

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