Thursday - 24 September 2020 - 1:27 PM

रूस की कोरोना वैक्सीन पर डब्ल्यूएचओ को क्यों है संदेह?

जुबिली न्यूज डेस्क

जुलाई माह में रूस के वैज्ञानिकों ने ऐलान किया कि उसने कोरोना वैक्सीन बना लिया है। पूरी दुनिया कोरोना के टीके का इंतजार कर रही है पर रूस के इस ऐलान पर कोई खास खुशी देखने को नहीं मिली। अलबत्ता डब्ल्यूएचओ ने ऐलान के दूसरे ही दिन कहा कि लोगों को कोरोना के साथ जीना सीख लेना चाहिए। दवा और टीके पर उसने कहा कि अभी इस दिशा में कोई उम्मीद नहीं दिखाई दे रही है। उसी समय सवाल उठा था कि आखिर रूस के टीके को लेकर डब्ल्यूएचओ गंभीर क्यों नहीं है।

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आखिरकार विश्व स्वास्थ्य संगठन ने रूस के टीके को लेकर अपनी मंशा जाहिर कर ही दिया। मंगलवार को रूस की वैक्सीन को लेकर डब्ल्यूएचओ ने संदेह जताया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि वैक्सीन उत्पादन के लिए कई गाइडलाइन्स बनाई गई हैं। दरअसल रूस अक्टूबर महीने से कोरोना वायरस की वैक्सीन का उत्पादन शुरू करने जा रहा है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रवक्ता क्रिस्टियन लिंडमियर से यूएन प्रेस ब्रीफिंग के दौरान पूछा गया कि अगर किसी वैक्सीन का तीसरे चरण का ट्रायल किए बगैर ही उसके उत्पादन के लिए लाइसेंस जारी कर दिया जाता है तो क्या संगठन इसे खतरनाक मानेगा?

प्रवक्ता क्रिस्टियन लिंडमियर ने कहा, ‘जब भी ऐसी खबरें आएं या ऐसे कदम उठाए जाएं तो हमें सावधान रहना होगा। ऐसी खबरों के तथ्यों की जांच सतर्कता के साथ की जानी चाहिए।”

क्रिस्टियन लिंडमियर ने कहा, ‘कई बार ऐसा होता है कि कुछ शोधकर्ता दावा करते हैं कि उन्होंने कोई खोज कर ली है जो कि वाकई बहुत अच्छी खबर होती है, लेकिन कुछ खोजने या वैक्सीन के असरदार होने के संकेत मिलने और क्लीनिकल ट्रायल के सभी चरणों से गुजरने में बहुत बड़ा फर्क होता है। हमने आधिकारिक तौर पर ऐसा कुछ नहीं देखा है। अगर आधिकारिक तौर पर कुछ होता तो यूरोप के हमारे दफ्तर के सहयोगी जरूर इस पर ध्यान देते।”

उन्होंने आगे कहा, ”एक सुरक्षित वैक्सीन बनाने को लेकर कई नियम बनाए गए हैं और इसे लेकर गाइडलाइन्स भी हैं। इनका पालन किया जाना जरूरी है ताकि हम जान सकें कि वैक्सीन या कोई भी इलाज किस पर असरदार है और किस बीमारी के खिलाफ लड़ाई में मदद कर सकती है।”

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उन्होंने कहा, गाइडलाइन का पालन करने से हमें ये भी पता चलता है कि क्या किसी इलाज या वैक्सीन के साइड इफेक्ट हैं या फिर कहीं इससे फायदे के बजाय नुकसान तो ज्यादा नहीं हो रहा है.

रूस के स्वास्थ्य मंत्री ने शनिवार को कहा था कि उनका देश अक्टूबर महीने से कोविड-19 के खिलाफ बड़े स्तर पर वैक्सीन कैंपेन शुरू करने की तैयारी कर रहा है। रूस के स्वास्थ्य मंत्री मिखाइल मुराश्को ने पत्रकारों से बातचीत में कहा था कि वैक्सीन की कोई फीस नहीं ली जाएगी और सबसे पहले इसे डॉक्टर्स और अध्यापकों को दिया जाएगा।

रूसी स्वास्थ्य मंत्री ने कहा था कि उत्पादन के साथ-साथ वैक्सीन का क्लीनिकल ट्रायल भी जारी रहेगा और इसे बेहतर बनाने की कोशिश की जाएगी।

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अपनी वेबसाइट पर क्लीनिकल ट्रायल से गुजर रहीं 25 वैक्सीन को सूचीबद्ध किया है जबकि 139 वैक्सीन अभी प्री-क्लीनिकल स्टेज में हैं।

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