Tuesday - 11 August 2020 - 10:20 PM

ओली को भारी पड़ रहा है भारत विरोध

जुबिली न्यूज डेस्क

नेपाल में राजनीतिक अस्थिरता की ओर बढ़ रहा है। वर्तमान में नेपाल में जो हालात है उसे ऐसे ही संकेत मिल रहे हैं। प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली का भारत के विरोध चलाया जा रहा अभियान उनके ही लोगों को रास नहीं आ रहा है। जिसके चलते ओली पर पद छोड़ने का भी दबाव बढ़ रहा है।

नेपाल में सियासी हलचल तेज हो गई है। जिस तरह वहां का माहौल है उससे ओली के प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देने की भी अटकलें भी शुरु हो गई हैं। ऐसे कयास इसलिए भी लगाए जा रहे हैं क्योंकि ओली ने राष्ट्रपति बिध्या देवी भंडारी से शीतल निवास पर मुलाकात की है। इसके अलावा नेपाल सरकार ने संसद के बजट सत्र को रद्द करने का फैसला किया है।

भारतीय सीमा पर और चौकसी बढ़ायेगा नेपाल

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कोरोना महामारी के बीच नेपाल में पिछले एक माह सियासी सरगर्मी बढ़ी हुई है। ओली के भारत के खिलाफ उठाए जा रहे कदम को उनके ही देश में समर्थन नहीं मिल रहा है। भारत के खिलाफ बयानबाजी को लेकर प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली पर पद छोड़ने  का दबाव बढ़ रहा है।

कम्युनिस्ट पार्टी के नेता भी लगातार ओली से उनके इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। भारत के लेकर ही ओली और पूर्व प्रधानमंत्री पुष्पा कमल दहल प्रचंड के बीच भी विवाद बढ़ता जा रहा है। इसके अलावा पार्टी में विभाजन की खबरों के बीच बुधवार को ओली ने कैबिनेट मंत्रियों सहित अपने प्रमुख विश्वासपात्रों के साथ बैठक की थी। एनसीपी की बुधवार की स्थायी समिति की बैठक के दौरान 17 सदस्यों ने ओली के इस्तीफे की मांग की। यह पहली बार है जब कुल 44 स्थायी समिति के सदस्यों में से 31 ओली के खिलाफ खड़े हुए हैं।

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ओली का सबसे ज्यादा विरोध हाल ही किए गए नेपाली नागरिकता कानून में संसोधन को लेकर हो रहा है। नेपाली पुरुषों के साथ विवाह करने वाली विदेशी महिलाओं को शादी के सात साल बाद नागरिकता देने के प्रस्ताव का नेपाल की विपक्षी और तराई के इलाके का प्रतिनिधित्व करने वाली राजनीतिक पार्टियां विरोध कर रही हैं।

इस सिलसिले में सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल के सचिवालय की शनिवार को हुई बैठक के बाद ये सिफारिश की गई है कि ऐसी शादी करने वाली महिलाओं को पहचान पत्र मुहैया कराया जाए, जो उन्हें नागरिकता प्राप्त करने तक राजनीतिक स्थिति को छोड़कर सभी अधिकार प्रदान करे।

नेपाल के संविधान के अनुच्छेद 11 (6) के प्रावधान के अनुसार, नेपाली पुरुष से विवाह करने वाली विदेशी महिला कानून के अनुसार नेपाल की नागरिकता ले सकती है। विदेशी महिला को नागरिकता लेते समय वैवाहिक संबंध और पिछली नागरिकता त्यागने के प्रमाण प्रस्तुत करने होते हैं।

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हालांकि इस बदलाव का विरोध कर रहे नेपाली कांग्रेस और तराई-केंद्रित दलों ने कहा है कि संविधान के अनुसार पिछले प्रावधान को जारी रखा जाना चाहिए। इस पर कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल के नेताओं की दलील है कि नेपाली पुरुषों से शादी

करने वाली महिलाएं पहचान पत्र के माध्यम से आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकारों का लाभ ले सकती हैं। पहचान पत्र धारक को चल संपत्ति खरीदने, उपभोग करने और बेचने, लाभ कमाने, व्यवसाय चलाने और उद्योग, व्यापार और व्यवसाय स्थापित करने और संचालित करने के अधिकार होंगे।

सरकार की इस दलील लोगों को संतुष्टï नहीं कर पा रही है। लोगों का कहना है कि नागरिकता पर नया प्रावधान बहुत गलत है। इससे सामाजिक समरसता बिगड़ रही है। संविधान में पहले से ही उन महिलाओं को प्राकृतिक नागरिकता प्रदान करने का प्रावधान करता है जिन्होंने यहां शादी की है और दूसरे देशों से आते हैं। इस तरह के प्रावधान की फिर से आवश्यकता क्यों है जबकि ये कहा गया है कि प्राकृतिक नागरिकता वाले लोगों को छह प्रमुख पदों को रखने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

लोग यहां तक कह रहे हैं कि भारत और अन्य देशों से शादी करने के बाद हजारों महिलाएं नेपाल आई हैं। उन्होंने अपमानित महसूस किया है और भविष्य में भी महिलाएं अपमानित महसूस कर सकती हैं। विरोधी दलों का कहना है कि सरकार के पास अपनी गलतियों और कमियों को छिपाने और अपनी विफलताओं को ढंकने के लिए एक जरिया मिल गया है। ये अच्छा नहीं है।

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