Jubilee Post | जुबिली पोस्ट https://www.jubileepost.in News & Information Portal Thu, 03 Dec 2020 15:49:38 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=5.4.4 किसान और सरकार की रार कायम, 5 दिसम्बर को फिर होगी बैठक https://www.jubileepost.in/farmers-and-governments-agreement-is-maintained-meeting-will-be-held-again-on-5-december/ Thu, 03 Dec 2020 15:49:38 +0000 https://www.jubileepost.in/?p=199385 प्रमुख संवाददाता नई दिल्ली. सरकार और किसानों के बीच साढ़े सात घंटे तक चली मैराथन बैठक बेनतीजा खत्म हो गई. पांच दिसम्बर को सरकार और किसान एक बार फिर बातचीत की टेबल पर होंगे. विज्ञान भवन में हुई यह बैठक किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुँच पाई लेकिन बातचीत सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई क्योंकि किसान पांच …]]>

प्रमुख संवाददाता

नई दिल्ली. सरकार और किसानों के बीच साढ़े सात घंटे तक चली मैराथन बैठक बेनतीजा खत्म हो गई. पांच दिसम्बर को सरकार और किसान एक बार फिर बातचीत की टेबल पर होंगे. विज्ञान भवन में हुई यह बैठक किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुँच पाई लेकिन बातचीत सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई क्योंकि किसान पांच दिसम्बर को सरकार के साथ फिर बैठने को तैयार दिखे.

सरकार ने एमएसपी के ज़रिये किसानों को रिझाने की कोशिश की लेकिन किसान पूर्ण रोल बैक की मांग पर अड़े रहे. बैठक के दौरान किसानों ने सरकार का दिया चाय-नाश्ता और खाना यह कहकर ठुकरा दिया कि हम साथ लाये हैं. किसानों के साथ बैठक क्योंकि दोपहर 12 बजे से शुरू हुई थी इसलिए सरकार ने खाने की व्यवस्था की थी लेकिन किसानों ने अपने साथ लाया हुआ खाना ही खाया.

भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार के साथ कई मुद्दों पर चर्चा हुई है लेकिन यह लड़ाई क़ानून के पूर्ण रोल बैक की है. सरकार एमएसपी के अधिनियम में संशोधन के लिए तैयार है. उन्होंने कहा कि जिन मुद्दों पर सरकार का रुख ठीक रहेगा उन मुद्दों पर बातचीत जारी रहेगी.

किसान संघर्ष समिति के नेता हरजिंदर सिंह ने कहा की बातचीत में बहुत कम प्रगति है. उन्होंने कहा कि पहले आधे समय तो यही लगा कि बैठक बेनतीजा होगी. बाद के आधे समय में यह लगा कि सरकार सिर्फ आन्दोलन के दबाव में बात कर रही है.

सरकारी पक्ष की बात करें तो बैठक के बाद केन्द्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा की बैठक में किसानों और सरकार ने अपना-अपना पक्ष रखा है. किसानों की चिंता जायज़ है. सरकार खुले मन से बात कर रही है. उन्होंने कहा कि किसानों को आश्वस्त किया गया है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य को नहीं छुआ जाएगा.

तोमर ने कहा कि सरकार अहंकार में नहीं है.वह खुले दिमाग के साथ किसानों से बात कर रही है. उन्होंने कहा कि बातचीत के दौरान आने वाले मुद्दे समाधान तक पहुंचेंगे.

आज की बैठक में कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के अलावा वाणिज्य एवं खाद्य मंत्री पियूष गोयल और वाणिज्य राज्यमंत्री सोम प्रकाश ने 35 किसान संगठनों के प्रतिनिधियों से बातचीत की.

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किसानों ने क़ानून वापस लेने की बात रखी तो सरकार ने कहा किसानों की समस्याओं पर गौर के लिए एक समिति गठित कर देते हैं लेकिन समिति गठन के प्रस्ताव को किसान संगठनों ने खारिज कर दिया.

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खाने में नहीं था स्वाद इसलिए हो गयी हाथपाई, जानें फिर क्या हुआ https://www.jubileepost.in/there-was-no-taste-in-food-so-the-handcuffs-became-there-know-what-happened-then/ Thu, 03 Dec 2020 15:48:59 +0000 https://www.jubileepost.in/?p=199386 जुबिली न्यूज़ डेस्क लखनऊ। यूपी के अलीगढ़ में एक शादी में दूल्हे के बहनोई को खाने में स्वाद नहीं आया तो विवाद हो गया। दुल्हन के भाई व दूल्हे के बहनोई में जमकर मारपीट हुई। बाद में बारात बिना दुल्हन के लौट गई। मामला थाने तक पहुंचा तो पुलिस ने दोनों पक्षों को समझाने का …]]>

जुबिली न्यूज़ डेस्क

लखनऊ। यूपी के अलीगढ़ में एक शादी में दूल्हे के बहनोई को खाने में स्वाद नहीं आया तो विवाद हो गया। दुल्हन के भाई व दूल्हे के बहनोई में जमकर मारपीट हुई। बाद में बारात बिना दुल्हन के लौट गई। मामला थाने तक पहुंचा तो पुलिस ने दोनों पक्षों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन वे नहीं माने।

बुलंदशहर के खुर्जा से बुधवार रात में जवां के सिकंदरपुर कोटा में बारात आई थी। शादी की रस्म अदायगी भी लगभग पूरी हो चुकी थी। मेहमान डीजे पर नाच- गाना कर रहे थे। इस दौरान जब दूल्हे के बहनोई खाना खाने लगे तो उनको खाना स्वादहीन लगा।

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इस पर उन्होंने कमेंट करते हुए ससुराल पक्ष के लोगों के समक्ष नाराजगी जतायी। दुल्हन का भाई आया और समझाने का प्रयास करने लगा लेकिन बहनोई समझने को तैयार नहीं हुए। देखते ही देखते मेहमान एकत्रित हो गए। डीजे भी बंद कर दिया गया।

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बहनोई व दुल्हन के भाई में मारपीट की नौबत आ गई। मामला बढ़ता देख दुल्हन पक्ष के लोगों ने पुलिस बुला ली। चंद मिनट बाद ही समारोह में पुलिस का सायरन सुनाई देने लगा। पुलिस पहुंची और मौके पर ही दोनों पक्षों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन वे नहीं माने तो दूल्हे, दूल्हे के बहनोई व दुल्हन के भाई को थाने ले गई।

वहां भी दोनों पक्ष आपस में उलझते रहे। बाद में परिवार के संभ्रांत लोग थाने पहुंचे और प्रयास किया कि शादी न टूटे। लेकिन दुल्हन पक्ष ने शादी से इंकार कर दिया। बाद में बारात बिना दुल्हन के लौट गई।

दुल्हन पक्ष की ओर से बारातियों के विरुद्ध नामजद तहरीर दी गई थी। पुलिस मामले में लिखा पढ़ी करने की तैयारी कर रही थी। लेकिन बाद में दोनों पक्षों में समझौता हो गया और यह तय हुआ कि दूल्हा पक्ष को समारोह में खर्चे का भुगतान करना होगा। दूल्हे पक्ष के इस पर सहमति जताने के बाद दोनों पक्षों को थाने से भेज दिया गया।

जवां थाने के एसओ अभय शर्मा के अनुसार समारोह में दूल्हे के बहनोई को खाना पसंद नहीं आया। इस पर दोनों पक्षों में विवाद हो गया। विवाद इतना बढ़ गया कि शादी तक टूट गई। बारात को बिना दुल्हन लौटना पड़ा।

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शिवराज ने क्यों कहा- मध्य प्रदेश में ये सब नहीं चलने देंगे https://www.jubileepost.in/why-did-shivraj-say-will-not-let-all-this-work-in-madhya-pradesh/ Thu, 03 Dec 2020 15:09:03 +0000 https://www.jubileepost.in/?p=199381 जुबिली न्यूज़ डेस्क भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सरकार सभी की है, सभी धर्मों और जातियों की। कोई भेदभाव नहीं है, लेकिन अगर कोई हमारी बेटियों के साथ घृणित कुछ भी करने की कोशिश करता है, तो मैं तुम्हें तोड़ दूंगा। उन्होंने कहा कि अब ये नहीं चलेगा, कोई …]]>

जुबिली न्यूज़ डेस्क

भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सरकार सभी की है, सभी धर्मों और जातियों की। कोई भेदभाव नहीं है, लेकिन अगर कोई हमारी बेटियों के साथ घृणित कुछ भी करने की कोशिश करता है, तो मैं तुम्हें तोड़ दूंगा।

उन्होंने कहा कि अब ये नहीं चलेगा, कोई अगर बहला- फुसलाकर, दबाव या लालच देकर ऐसा करने की कोशिश करेगा तो सरकार उनसे सख्ती से निपटेगी। उन्होंने कहा कि मैं जानता हूं ऐसी बेटियों की जिंदगी तबाह और बर्बाद होकर नरक बन जाती है।

वो दर- दर की ठोकरें खाती है। मैं सबके साथ हूं, कोई भी भारतीय जनता पार्टी की सरकार से दूर नहीं है, लेकिन गड़बड़ करने की या धर्मांतरण का कुकृत्य ‘लव जिहाद’ जैसी चीज की तो आप तबाह और बर्बाद हो जाओगे। हम मध्य प्रदेश में ये सब नहीं चलने देंगे।

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मुख्यमंत्री शिवराज ने आज कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा कि कर्ज माफी के नाम पर प्रदेश के किसानों को धोखा देने वाली कांग्रेस अब केन्द्र सरकार द्वारा किसानों के हितों के लिए लाए गए कृषि सुधार बिल के नाम पर किसानों को गुमराह कर रही है।

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वो जिले के नसरुल्लागंज में ‘किसान कल्याण योजना की राशि 100 करोड़ रुपये का वितरण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आज 15 हजार से ज्यादा किसानों ने किसान कृषि बिल के समर्थन में समर्थन दिया, लेकिन कर्जमाफी के नाम पर किसानों को धोखा देने वाली कांग्रेस आज किसानों के नाम पर राजनीति कर रही है। किसानों के हित में बने कानून पर वे किसानों को भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस कानून में किसान को उपज मंडी के अलावा कहीं भी बेचने की छूट है। उन्होंने कहा कि कृषि उपज मंडियां बंद नहीं होंगी, लेकिन मंडी के अलावा अगर कोई व्यापारी किसान को फसल के अच्छे दाम दे रहा हो तो किसान मंडी के बाहर भी बेच सकता है। ये किसान की मर्जी होगी कि वो जहां चाहेगा वहां फसल बेचेगा।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किसानों के साथ खड़े हैं। किसान हित में बने नए कानून के अनुसार किसान फसल बोने से पहले व्यापारी के साथ अपनी उपज का कांट्रैक्ट कर सकेगा। उन्होंने कहा कि फसल खराब होने की चिंता से किसान मुक्त होगा।

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सीएम योगी ने दिया कोरोना संक्रमित मरीजों की विशेष देखभाल का निर्देश https://www.jubileepost.in/cm-yogi-instructed-to-take-special-care-of-corona-infected-patients/ Thu, 03 Dec 2020 14:30:52 +0000 https://www.jubileepost.in/?p=199378 जुबिली न्यूज़ डेस्क लखनऊ. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनता को गुणवत्तापरक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के के साथ ही कोविड-19 से बचाव तथा उपचार की प्रभावी व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए हैं. मुख्यमंत्री आज यहां अपने सरकारी आवास पर हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में अनलाक व्यवस्था की समीक्षा कर रहे थे. …]]>

जुबिली न्यूज़ डेस्क

लखनऊ. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनता को गुणवत्तापरक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के के साथ ही कोविड-19 से बचाव तथा उपचार की प्रभावी व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए हैं.

मुख्यमंत्री आज यहां अपने सरकारी आवास पर हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में अनलाक व्यवस्था की समीक्षा कर रहे थे. उन्होंने लखनऊ, कानपुर नगर, मेरठ, आगरा तथा वाराणसी पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि चिकित्सा शिक्षा मंत्री द्वारा लखनऊ के केजीएमयू, एसजीपीजीआई तथा आरएमएलआईएमएस के प्रमुखों के साथ बैठक कर इन चिकित्सा संस्थानों की उपचार व्यवस्था की समीक्षा करने के निर्देश भी दिए हैं.

उन्होंने यह निर्देश भी दिए कि सभी मेडिकल कालेजों में सम्बन्धित मण्डलायुक्त तथा जिलाधिकारी जाकर बैठक करें. यह सुनिश्चित किया जाए कि विशेषज्ञ चिकित्सक कोविड वार्ड में नियमित राउण्ड लें, इससे मरीजों को बेहतर उपचार सुलभ होगा.

कोविड-19 से संक्रमित मरीजों के उपचार की बेहतर व्यवस्था प्रत्येक दशा में सुनिश्चित किये जाने का निर्देश देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इसमें किसी भी स्तर पर शिथिलता नहीं बरती जानी चाहिए. यह सुनिश्चित किया जाए कि मरीजों की भर्ती में कोई समस्या न पेश आए. उन्होंने कहा कि कोविड चिकित्सालयों में बेड्स की आवश्यकता का आकलन करते हुए अतिरिक्त बेड्स की व्यवस्था के लिए विशेष प्रयास किये जाएं.

मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड-19 के संक्रमण से बचाव के लिये हर स्तर पर सतर्कता बरती जाए. इस सम्बन्ध में जागरूकता कार्यक्रम निरन्तर संचालित किया जाए. इन्टीग्रेटेड कमाण्ड एण्ड कन्ट्रोल सेन्टर का संचालन पूरी सक्रियता से किया जाए. उन्होंने कान्टैक्ट ट्रेसिंग तथा सर्विलांस सिस्टम को सुदृढ़ बनाए रखने के निर्देश भी दिए.

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इस बैठक में चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुरेश खन्ना, स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह, जल शक्ति मंत्री डॉ. महेन्द्र सिंह, मुख्य सचिव आर.के. तिवारी, कृषि उत्पादन आयुक्त आलोक सिन्हा, अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश कुमार अवस्थी, पुलिस महानिदेशक हितेश अवस्थी, अपर मुख्य सचिव वित्त संजीव मित्तल, अपर मुख्य सचिव एमएसएमई तथा अपर मुख्य सचिव सूचना नवनीत सहगल, अपर मुख्य सचिव राजस्व श्रीमती रेणुका कुमार, अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य अमित मोहन प्रसाद, अपर मुख्य सचिव चिकित्सा शिक्षा डॉ. रजनीश दुबे, अपर मुख्य सचिव पंचायतीराज एवं ग्राम्य विकास मनोज कुमार सिंह, अपर मुख्य सचिव कृषि देवेश चतुर्वेदी, अपर मुख्य सचिव औद्योगिक विकास आलोक कुमार, अपर मुख्य सचिव सिंचाई एवं जल संसाधन टी. वेंकटेश, अपर मुख्य सचिव उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण मनोज सिंह, अपर मुख्य सचिव सहकारिता एम.वी.एस. रामी रेड्डी, प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री एवं सूचना संजय प्रसाद, प्रमुख सचिव नमामि गंगे तथा ग्रामीण जल संसाधन अनुराग श्रीवास्तव, प्रमुख सचिव स्वास्थ्य आलोक कुमार, सचिव मुख्यमंत्री आलोक कुमार, सूचना निदेशक शिशिर सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे.

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किसान आंदोलन ने तो कवियों और शायरों को भी जगा दिया है https://www.jubileepost.in/farmers-movement-gives-fire-to-poets/ Thu, 03 Dec 2020 13:24:24 +0000 https://www.jubileepost.in/?p=199359 शबाहत हुसैन विजेता पूस के महीने की ठंडी रातों में भी दिल्ली के चारों तरफ किसान आंदोलन की गर्मी सभी को महसूस हो रही है। दिल्ली जाने वाली हर सड़क पर किसानों का डेरा है। जब सत्ता  इस आंदोलन को सियासी कुचक्रों में फँसाने के लिए पैंतरे चल रही है उस वक्त देश के संवेदनशील …]]>

शबाहत हुसैन विजेता

पूस के महीने की ठंडी रातों में भी दिल्ली के चारों तरफ किसान आंदोलन की गर्मी सभी को महसूस हो रही है। दिल्ली जाने वाली हर सड़क पर किसानों का डेरा है। जब सत्ता  इस आंदोलन को सियासी कुचक्रों में फँसाने के लिए पैंतरे चल रही है उस वक्त देश के संवेदनशील शायर, लेखक और कवि अपनी कविताओं, गज़लों और गीतों के जरिए किसानों को अपना समर्थन दे रहे हैं।

साहित्य को समाज का दर्पण कहने वालों ने ये बात अनायास  नहीं कही थी। वैसे भी माना जाता है कि संकट काल साहित्य सृजन के लिए सबसे ज्यादा मुफीद होता है , संवेदना के स्वर शब्दों में बांधते हैं तो संघर्ष की धार और तेज होने लगती है।

किसान अन्नदाता कहलाता है क्योंकि वह देश का पेट भरता है. जिस तरह से सीमा पर सैनिक मुस्तैद रहता है तो हम चैन की नींद सोते हैं ठीक उसी तरह से किसान खेतों में मुस्तैद रहता है तो हमें दोनों वक्त का खाना मिलता है. मगर जय जवान-जय किसान  किसान के  नारे के बावजूद किसान आत्महत्याओं के चक्र में फंसा हुआ हो तो साहित्य जगह भला कैसे चुप रहे ? .

कड़ाके की ठंड झेलता किसान इन्साफ के इंतज़ार में सड़कों पर है. व्यवस्था पर इसका असर होता दिखे या न दिखे लेकिन कवियों ने किसानों के तेवर को बहुत अच्छे से महसूस किया है. कवि देवेन्द्र आर्य ने लिखा है :-

दिल्ली में हो रही मुनादी
फसलें मांग रही आज़ादी
अन्नकोष के सिरहाने
खेतिहर आज हुए फरियादी.

पूस की रात में हल्कू के संग
कउड़ा ताप रही हैं दादी
खेती खुद्दारी होती है
जैसे देशप्रेम थी खादी

हमां शुमां को बेच के कालिख
चिक्कन भये करोनावादी
सड़कों पर बैठी संसद ने
लोकतंत्र की मेल छुड़ा दी
होके रहेगी होके रहेगी
तानाशाही की बर्बादी

किसानों के हालात की तस्वीर खींचते हुए कवि संजय सिंह मस्त लिखते हैं :-

माहौल है तनाव में सब आसपास का
कितना है बेमिसाल ये माडल विकास का
डंडे बरस रहे हैं किसानों की पीठ पर
जैसे धुनाई करता है धुनिया कपास का
दिखती नहीं है नग्न पीठ कौम की उसे
इस कद्र शौक है उसे महंगे लिबास का.
दीवारे कहकहा में फंसे जा रहे हैं लोग
रस्ता नहीं बचा है कोई भी विकास का

एक अर्सा पहले बेकल उत्साही ने जो लिखा था किसान तो आज भी उसी मुहाने पर खड़ा है :-

अब तो गेंहूँ न धान बोते हैं।
अपनी किस्मत किसान बोते हैं।
फसल तहसील काट लेते हैं।
हम मुसलसल लगान बोते हैं।।
अपनी खेतियां उजाड़कर हम।
शहर जाकर मकान बोते हैं।।

वरिष्ठ पत्रकार और कवि राजकुमार सिंह भी किसानों के बारे में बड़ी शिद्दत से सोचते हैं. उन्होंने लिखा है :-

गर्मी की चिलचिलाती दोपहर
या जाड़े की ठिठुरती रात
जब खेतों में उन्होंने अपने हाड़ गलाए
तब शहरों में हमारे तन बड़े हुए
जब-जब
कोई किसान अपना प्रोटीन, वसा और कार्बोहाइड्रेट गलाता है
तब-तब
हमारी थाली में रोटी, दाल और चावल आता है
हाँ, मैं किसानों के साथ खड़ा हूँ
मैंने उनका अन्न खाया है.

राजकुमार की ये बानगी भी देखने के लायक है :-
सबसे सुंदर कविताएं
खेतों में उगती हैं
हाँ
कविता से पेट भरता है.

कवियत्री डॉ. मालविका हरिओम ने पैदल घर लौटते मजदूरों की बात भी बहुत अच्छी तरह से की थी और धरने पर अन्नदाता हैं तो उनकी अर्जी भी सरकार तक इस अंदाज़ में पहुंचा रही हैं :-

खड़े हैं कब से सड़कों पर हमारी बात तो सुन लो
हमीं जनता, हमीं वोटर हमारी बात तो सुन लो
हमीं खेतों में जुटते हैं तो मिलता है तुम्हें भोजन
हमीं भूखे, हमीं बेघर हमारी बात तो सुन लो

हिन्दी कविता को देश दुनिया में नई ऊंचाइयां देने वाले डॉ. कुमार विश्वास ने किसान आन्दोलन पर तथ्यहीन बातें करने वालों को लताड़ते हुए ट्वीट किया कि अपने बंगलों व अपार्टमेंटों की बालकनियों में बैठकर बौध्दिक जुगाली कर रहे अभिनेताओं और ज्ञानियों से सादर अनुरोध है कि वे farmers agitation का समर्थन करें न करें पर कम से कम किसानों की वास्तविक समस्याओं पर अपना अधकचरा तप्सरा तो बंद करें. किसान धान उगाता है तो समाधान भी उगा ही लेगा.

कुमार विश्वास ने अपने ही अंदाज़ में दिल्ली सरकार और केन्द्र सरकार को किसानों के मुद्दे पर घेरते हुए जो कुछ भी लिखा है उसे ज्यों का त्यों यहाँ दिया जा रहा है.

डॉ. कुमार विश्वास ने लिखा :-

मैं चूँकि भोग चुका हूँ इसलिए आपसे कह रहा हूँ.

भीषण जाड़े की असुविधा-जनक आहटों के बीच किसानों का बड़ा आंदोलन दिल्ली की चौखट पर बेचैनी पैदा कर रहा है ! आशा करता हूँ कि दिल्ली दरबार अपने द्वार पर आए इन चिंतित भूमिपुत्रों को उसी सम्मान और समाधान के साथ विदा करेगा जैसे एक साधुता भरे कृषक सुदामा को हर द्वारिकाधीश विदा करता रहा है! जगत को अमृत मिल सके इस सदिच्छा के लिए ज़हर पी जाने वाले देवाधिदेव हर-हर शंकर के पुण्यधाम से सांसद प्रधानमंत्री Narendra Modi से प्रार्थना है कि आप तो पराए दलों के उन नेताओं तक को गले लगाने की कला में निष्णात हैं जिन्होंने दो पीढ़ियों तक कभी आपको भर-भर कर गालियाँ दी है तो फिर ये किसान तो आपकी हमारी भारतमाता के वो बेटे हैं जिनके पसीने की महक पर मुग्ध होकर हमारी-आपकी धरती माँ खलिहान-खलिहान भर अन्न न्योछावर करती रही है ! आप बुलाकर ज़रा गले तो लगाइए अपने घर के इन बड़ों को, पैर छू लीजिए इन माँओ के, कंधे पर बड़े भाई जैसा हाथ रखिए दशमेश पिता के इन बेलौस-बेमिसाल वंशजों के ! मुझे पूरा भरोसा है कि आप हर चुनौती की तरह यह संवाद भी साध ही लेंगे!

अब हाथ जोड़कर एक प्रार्थना आप सबसे भी ! हर आंदोलन के हर तरह के पक्ष होते ही हैं ! अपनी परेशानियों का हल ढूँढते सच्चे लोगों से लेकर उनके अंदर की सच्ची आग में अपनी कच्ची पक्की सियासी रोटियाँ सेंकने वाले आत्माहीन बौनों तक, घाघों तक ! उस आंदोलन की बेबस गहमागहमी को खबरिया नमक-मिर्ची लगाकर टीआरपी बटोरने की कोशिश में जुटे दिल्ली दरबारों के बँधुआ पक्षकारों-पत्रकारों से लेकर, हाशिए पर पड़े राजनैतिक आकाओं के अनुरूप-अनुकूल निर्मम प्रहार करते सोशल-मीडिया के ट्रोल-गिद्धों तक ! पर हमारे टीवी व सोशल-मीडिया पर उस आंदोलन के पक्ष-विपक्ष को लेकर उतरती आरोपित और पूर्वनियोजित सूचनाओं के बीच हम सब की ज़िम्मेदारी है कि इन पेड-ट्रोल्स व पद्मश्रियों के लिए अपनी चेतना का बधियाकरण करा चुके इन स्वयंभू सेलिब्रिटीज़ से प्रभावित हुए बिना अपनी राय खुद निर्धारित करें ! दोनों पक्षों की ग़लतियाँ, हठधर्मिताएँ और मजबूरियाँ हो सकती हैं पर आंदोलनों को महज़ इसलिए ख़ारिज करना क्यूँकि वो आपकी मनभावनी सरकारों-सत्ताओं या दलों के ख़िलाफ़ जा रहे हैं, ठीक नहीं है ! या इन आंदोलनों की आड़ में होने वाली किसी भी देश विरोधी हरकत को इसलिए ढँक देना क्यूँकि इस आंदोलन से आपकी विरोधी पार्टी को छवि का नुक़सान होगा भी, ठीक नहीं है !

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याद रखिए सत्ता तो परिवर्तनशील है ! कल किसी अनाचार या दुश्चिंता के ख़िलाफ़ हमें-आपको भी ऐसी ही कोई आवाज़ उठानी पड़ सकती है तब हमारी किसी सच्ची कोशिश पर ऐसा ही कोई बेशर्म आक्रमण हमें कितना व्यथित करेगा ? देश हमारा है, सरकार हमारी है, सड़कों पर उतरे हिंद के बेटे हमारे हैं, लाठी टेककर खेत छोड़ सड़क पर उतरी माँएं हमारी हैं तो इस समस्या के समाधान तक ले जाने की ज़िम्मेदारी भी तो हमारी ही है ना? थोड़ी संजीदगी दिखाओ यारो

स्वर्गीय कवि माधव मधुकर ने  कभी लिखा था

“कैसा हुआ विकास कि जब आज भी किसान,

तकता है आसमान ही , खेतों को जोत कर ।” 

किसान आंदोलन ने जब देश के नौजवान कवियों और शायरों के भीतर एक नई चिंगारी भर दी है, तब लाजिम है कि इस आंदोलन से न सिर्फ समाज जागेगा बल्कि जन साहित्य और भी मजबूत होगा।

 

 

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‘माँ बाराही देवी धाम’ के नाम पर होगा ये रेलवे स्टेशन https://www.jubileepost.in/this-railway-station-will-be-named-after-maa-barahi-devi-dham/ Thu, 03 Dec 2020 13:21:04 +0000 https://www.jubileepost.in/?p=199369 जुबिली न्यूज़ डेस्क लखनऊ। यूपी में नाम बदलने का सिलसिला अभी थमा नहीं है। अब यूपी के एक और रेलवे स्टेशन का नाम बदलने का ऐलान योगी सरकार ने किया है। लखनऊ- वाराणसी रेल खंड पर प्रतापगढ़ बादशाहपुर के बीच स्थित दांदूपुर रेलवे स्टेशन का नाम अब ‘माँ बाराही देवी धाम’ होगा। इस संबंध में …]]>

जुबिली न्यूज़ डेस्क

लखनऊ। यूपी में नाम बदलने का सिलसिला अभी थमा नहीं है। अब यूपी के एक और रेलवे स्टेशन का नाम बदलने का ऐलान योगी सरकार ने किया है। लखनऊ- वाराणसी रेल खंड पर प्रतापगढ़ बादशाहपुर के बीच स्थित दांदूपुर रेलवे स्टेशन का नाम अब ‘माँ बाराही देवी धाम’ होगा।

इस संबंध में केंद्र सरकार की सहमति मिल गई है, वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी नाम परिवर्तन को हरी झंडी दे दी है। सीएम के अनुमोदन के बाद अब जल्द ही नाम परिवर्तन के संबंध में अधिसूचना जारी कर दी जाएगी। गुरुवार को मुख्यमंत्री कार्यालय ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी।

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यूपी के जनपद प्रतापगढ़ के रानीगंज तहसील मुख्यालय स्थित इस रेलवे स्टेशन का नाम बदलने की मांग लंबे समय से चल रही थी। जन आकांक्षाओं का सम्मान करते हुए स्थानीय धार्मिक और आध्यात्मिक स्थलों को विशिष्ट पहचान देने के संकल्पों के क्रम में अब इसका नाम ‘माँ बाराही देवी धाम’ किया जा रहा है।

बता दें कि दांदूपुर स्टेशन पर एक्सप्रेस व पैसेंजर सहित कई ट्रेनों का ठहराव होता है। यहां दिल्ली से वाराणसी आने जाने वाली काशी विश्वनाथ ट्रेन, रायबरेली- जौनपुर एक्सप्रेस, लखनऊ- वाराणसी इंटरसिटी एवं पीवी ट्रेन का ठहराव होता है।

स्टेशन से करीब छह किलोमीटर दूर परसरामपुर गांव में ऊंचे टीले पर मां बाराही देवी का मंदिर है। यहां दर्शन करने के लिए काफी संख्या में लोग आते हैं व मेला भी लगता है।

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रिपोर्ट में दावा: कोरोना की पिक्चर अभी बाकी है https://www.jubileepost.in/lancet-countdown-fifth-annual-report-on-climate-change/ Thu, 03 Dec 2020 13:00:58 +0000 https://www.jubileepost.in/?p=199357 जुबिली न्यूज़ डेस्क नई दिल्ली। कोरोना के खौफ के आगे दुनिया ने घुटने टेक दिए है, लेकिन रिपोर्ट में दवा किया गया है कि दुनिया में कहीं भी स्वास्थ्य सेवाओं का तंत्र ऐसे किसी हालात के लिये तरह से तैयार नहीं है। वैसे भी बढ़ती गर्मी की वजह से पूरी दुनिया में मृत्‍यु दर में …]]>

जुबिली न्यूज़ डेस्क

नई दिल्ली। कोरोना के खौफ के आगे दुनिया ने घुटने टेक दिए है, लेकिन रिपोर्ट में दवा किया गया है कि दुनिया में कहीं भी स्वास्थ्य सेवाओं का तंत्र ऐसे किसी हालात के लिये तरह से तैयार नहीं है। वैसे भी बढ़ती गर्मी की वजह से पूरी दुनिया में मृत्‍यु दर में तेजी से इज़ाफा हो रहा है।

साथ ही ये तपिश करोड़ों लोगों की रोजीरोटी के लिये भी खतरा बन रही है। लेकिन जलवायु परिवर्तन और कोविड-19 महामारी के संकट से एक साथ निपट कर करोड़ों लोगों की जिंदगी और सेहत को बचाया जा सकता है।

लांसेट काउंटडाउन की पाँचवीं वार्षिक रिपोर्ट में कहा गया है कि जन स्‍वास्‍थ्‍य पर जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के असर की बेहद खौफनाक और अब तक की सबसे चिंताजनक तस्‍वीर पेश करती है स्‍वास्‍थ्‍य एवं जलवायु परिवर्तन के बीच सम्‍बन्‍धों पर आधारित 40 से ज्‍यादा संकेतकों पर पड़ताल करती ये रिपोर्ट चिंताजनक है।

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कोविड के इस प्रकोप के दौरान हम बस भविष्य की सम्भावनाओं एक झलक भर देख रहे हैं। और अगर अभी भी जलवायु परिवर्तन के ख़िलाफ़ सही नीतिगत फैसले नहीं लिए गए तो यह संभावनाएं भयावह हक़ीक़त की शक्ल ले लेंगी क्योंकि दुनिया का कोई भी देश जलवायु परिवर्तन के कारण सेहत को होने वाले नुकसान से अछूता नहीं रह सकता।

2016 से हर साल, “द लांसेट काउंटडाउन”- जो कि डॉक्टर और जलवायु वैज्ञानिकों सहित 120 से अधिक विशेषज्ञों से बना एक सहयोगी परियोजना है- जो जाने माने ब्रिटिश जर्नल द लांसेट में एक रिपोर्ट प्रकाशित करते हैं जिसमें जलवायु परिवर्तन और वायु प्रदूषण के प्रभाव से लोगों के स्वास्थ्य को पहुँच रहे नुकसान के बारे में बताया जाता है। यह व्यापक रूप से इस विषय पर दुनिया की सबसे आधिकारिक रिपोर्ट मानी जाती है।

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रिपोर्ट के लेखक कहते हैं कि कोविड-19 महामारी से हुए नुकसान की भरपाई की प्रक्रिया हमें जलवायु परिवर्तन पर काम करने का एक सुनहरा मौका भी देती है। संकट में तब्दील हो रहे हालात में साथ मिलकर काम करने से जन स्वास्थ्य में सुधार करने, एक सतत अर्थव्यवस्था का निर्माण करने और पर्यावरण की सुरक्षा करने का मौका मिल रहा है।

लान्सेट काउंटडाउन के अधिशासी निदेशक इयान हैमिल्टन ने कहा कोविड-19 महामारी ने हमें दिखाया है कि जब वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य को खतरा पैदा होता है तो हमारी अर्थव्यवस्थाएं और जीवन जीने का तरीका बिल्कुल ठहर सकता है। जलवायु परिवर्तन की वजह से इंसान के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले खतरे कई गुना बढ़ गए हैं और जब तक हम अपना तौर-तरीका नहीं बदलते, तब तक भविष्य में हमारी स्वास्थ्य सेवा व्यवस्थाओं पर जोर पड़ने का खतरा बना रहेगा।

उन्होंने कहा इस साल अमेरिका के जंगलों में लगी विध्वंसकारी आग और कैरेबियन तथा पेसिफिक में चक्रवाती तूफान की घटनाएं कोविड-19 महामारी के साथ-साथ हुई हैं। इससे यह दुखद एहसास बिल्कुल साफ हुआ है कि दुनिया एक वक्त में सिर्फ एक संकट से निपटने जैसी आरामदायक स्थिति में नहीं है।

काउंटडाउन रिपोर्ट में सामने आए नए तथ्यों से जाहिर होता है कि गर्मी के कारण अधिक उम्र के लोगों की मौत की घटनाओं में 54% का इजाफा हुआ है। इसके अलावा वर्ष 2019 में 65 साल से अधिक उम्र के लोगों पर हीटवेव एक्सपोजर के रिकॉर्ड 2.9 अरब अतिरिक्त दिन दर्ज किए गए हैं। यह आंकड़ा पूर्व में दर्ज किए गए सर्वाधिक आंकड़े का लगभग दो गुना है।

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नवगठित लान्सेट काउंटडाउन रीजनल सेंटर फॉर एशिया की निदेशक और बीजिंग स्थित सिंघुवा यूनिवर्सिटी से जुड़ी डॉक्टर वेनजिया काई ने कहा पेरिस समझौते की पांचवी वर्षगांठ के मौके पर हमें जलवायु परिवर्तन के कारण जन स्वास्थ्य तथा हमारी पीढ़ी पर पड़ने वाले सबसे बुरे प्रभावों पर बात करनी चाहिए। जलवायु परिवर्तन को लेकर अपनी संकल्पबद्धताओं को पूरा करने में हमारी नाकामी कुछ प्रमुख सतत विकास लक्ष्यों को हमसे बहुत दूर ले जा सकती है। साथ ही तपिश को कम करने की हमारी क्षमता भी घट सकती है।

लांसेट काउंटडाउन के अध्यक्ष और इंटेंसिव केयर डॉक्टर प्रोफेसर ह्यू मोंटगोमरी ने कहा जलवायु परिवर्तन एक क्रूर स्थिति की तरफ ले जा रहा है, जिससे देशों के बीच और उनके अंदर स्वास्थ्य संबंधी मौजूदा असमानताएं और गहरी हो जाएंगी। हमारी रिपोर्ट से ये जाहिर होता है कि कोविड-19 के कारण बुजुर्ग लोग खासतौर पर अधिक खतरे के घेरे में हैं और दमे तथा डायबिटीज से पहले से ही ग्रस्त लोगों पर खतरा और भी बढ़ गया है।

रिपोर्ट में पेश किए गए आंकड़ों से ये पता चलता है कि तमाम सुधारों के बावजूद मौजूदा स्वास्थ्य सेवाओं की क्षमता भविष्य में आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए काफी नहीं है। सर्वेक्षण के दायरे में लिए गए केवल 50% देशों ने ही अभी तक अपने यहां स्वास्थ्य तथा जलवायु संबंधी राष्ट्रीय योजनाएं तैयार की हैं और उनमें से मात्र चार देशों ने ही यह बताया है कि उनके पास इसके लिए पर्याप्त राष्ट्रीय फंडिंग मौजूद है।

प्रोफेसर ह्यू मोंटगोमरी ने कहा कोविड-19 महामारी ने जलवायु परिवर्तन के कारण भविष्य में उत्पन्न होने वाले स्वास्थ्य संबंधी संकटों से निपटने की मौजूदा क्षमताओं पर रोशनी डाली है। आग की लपटें, बाढ़ और अकाल जैसी मुसीबतें किसी भी देश की सीमाओं या बैंक खातों में जमा रकम को नहीं देखतीं। किसी भी देश की धन संपदा वहां तापमान में बढ़ोत्‍तरी के कारण स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव से तनिक भी बचाव नहीं कर सकतीं। यहां तक कि वह वैश्विक तापमान में 1.2 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोत्‍तरी को भी बर्दाश्त करने की ताकत नहीं पैदा कर सकतीं।

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नई रिपोर्ट के साथ प्रकाशित हुआ लान्सेट संपादकीय ये जाहिर करता है कि जलवायु परिवर्तन और प्राणीजन्य महामारी के खतरे साझा कारणों से उत्पन्न होते हैं, नतीजतन एक- दूसरे से जटिल तरीके से गुथे होने के कारण उनसे एक साथ निपटना होगा। जलवायु परिवर्तन और उसके कारकों के कारण नगरीयकरण बढ़ने, सघन कृषि तथा गैर सतत खाद्य प्रणालियों, हवाई यात्रा तथा पर्यटन, व्यापार और जीवाश्म ईंधन आधारित जीवन शैली से पर्यावरण को नुकसान होता है। इससे ऐसी परिस्थितियां पैदा होती हैं जिनसे प्राणीजन्य बीमारियों को बढ़ावा मिलता है।

लांसेट के एडिटर इन चीफ डॉक्टर रिचर्ड हॉर्टन ने कहा अगर हम भविष्य में महामारियों का खतरा कम करना चाहते हैं तो हमें जलवायु परिवर्तन संबंधी संकट पर प्राथमिकता से काम करना होगा। जलवायु परिवर्तन आज जूनोसेस पैदा करने वाली सबसे शक्तिशाली ताकतों में से एक है। अब हम सभी के लिए जलवायु संबंधी संकल्पों को और भी ज्यादा गंभीरता से लेने का वक्त है। हमें जलवायु संबंधी आपातस्थिति से निपटना होगा, अपनी जैव विविधता की सुरक्षा करनी होगी और उन प्राकृतिक प्रणालियों को मजबूत करना होगा जिन पर हमारी सभ्यता निर्भर करती है।

ताजा रिपोर्ट के मुताबिक वैश्विक तापमान में बढ़ोत्‍तरी को 2 डिग्री सेल्सियस से नीचे रखकर और जलवायु तथा महामारी के कारण हुए नुकसान की भरपाई को एक दूसरे के अनुरूप बनाकर हमारी दुनिया स्वास्थ्य तथा अर्थव्यवस्था संबंधी अल्पकालिक तथा दीर्घकालिक लाभों को हासिल कर सकती है।

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अगर भारत की बात करे तो 2010 के बाद से भारत में हीटवेव एक्सपोजर के 10 उच्चतम रैंकिंग वर्षों में से आठ हुए हैं। इस बीच 65 से अधिक वर्ष के लोगों मेंगर्मी से संबंधित मौतों की शुरुआत 2000 के दशक के बाद से दोगुनी हो कर 2018 में 31,000 से अधिक हो गई है।

स्वास्थ्य एडापटेशन भारत का प्रति व्यक्ति खर्च सिर्फ $ 0.80 है, लेकिन 2015/16 में $ 0.60 प्रति व्यक्ति से यह बढ़ गया है। नवीनतम वर्ष में उपलब्ध (2018) में इनडोर और बाहरी वायु प्रदूषण से लगभग 7 मिलियन मौतों के साथ वायु प्रदूषण का मानव स्वास्थ्य पर व्यापक प्रभाव है। जबकि समस्या वैश्विक चिंता का विषय है, भारत जैसे देशों में निरपेक्ष संख्या सबसे बड़ी है, जहाँ बाहरी वायु प्रदूषण के मुख्य स्रोत से एक वर्ष में लगभग आधे मिलियन लोगों की मृत्यु होती है। घरों, बिजली संयंत्रों और उद्योग द्वारा कोयला दहन इनमें से लगभग 100,000 के लिए जिम्मेदार था।

रिपोर्ट के अन्य प्रमुख तथ्य

  • खोजे जाने वाले नए आंकड़े गर्मी से संबंधित मृत्यु दर, तपिश के कारण होने वाली मौतों के परिणाम स्वरूप आर्थिक नुकसान और श्रम शक्ति को हानि, कम कार्बन युक्त आहार के स्वास्थ्य संबंधी फायदे।
  • बढ़ते हुए तापमान और चरम मौसमी परिघटनाओं की बढ़ती आवृत्ति की वजह से वैश्विक खाद्य सुरक्षा खतरे में है। दुनिया की प्रमुख फसलों के रखने की क्षमता में वर्ष 1981 से अब तक 1.8 से लेकर 5.6% तक की गिरावट हुई है।
  • 15 करोड़ 60 लाख से ज्यादा लोग बड़े नगरीय क्षेत्रों (10 लाख से ज्यादा आबादी वाले) में रहते हैं जहां हरियाली का स्तर चिंताजनक रूप से काफी कम है।
  • रिपोर्ट पढ़े: https://www.lancetcountdown.org/launching-the-2020-report-of-the-lancet-countdown-on-health-and-climate-change/

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किसान आंदोलन के समर्थन में कनाडा की सड़कों पर उतरे लोग, देखें वीडियो https://www.jubileepost.in/sikh-community-of-canada-protest-with-indian-farmers/ Thu, 03 Dec 2020 11:19:06 +0000 https://www.jubileepost.in/?p=199351 जुबिली न्यूज़ डेस्क किसान कानून को लेकर देश में चल रहा किसान आंदोलन लगातार बढ़ता ही जा रहा है। कानून के विरोध में पंजाब और हरियाणा के किसान दिल्ली बॉर्डर पर करीब छह दिन से डटे हुए हैं। इस किसान आन्दोलन का असर अब देश ही नहीं विदेश में दिखने लगा है। इस आंदोलन को …]]>

जुबिली न्यूज़ डेस्क

किसान कानून को लेकर देश में चल रहा किसान आंदोलन लगातार बढ़ता ही जा रहा है। कानून के विरोध में पंजाब और हरियाणा के किसान दिल्ली बॉर्डर पर करीब छह दिन से डटे हुए हैं। इस किसान आन्दोलन का असर अब देश ही नहीं विदेश में दिखने लगा है। इस आंदोलन को देखते हुए कनाडा के सिख समुदाय ने भारतीय किसानों के साथ एकजुटता दिखाने का समर्थन किया।

यह विरोध कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत के सरे में हुआ। यहां सिख समुदाय ने इकट्ठा होकर किसानो के समर्थन में सड़कों पर आ गये। हालांकि ये विरोध शांतिपूर्ण रहा। इस विरोध में बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक शामिल दिखे। सभी के हाथों में तख्तियां भी थी। इन तख्तियों में अलग अलग स्लोगन लिखे हुए थे। किसी में लिखा है नो फार्मर नो फ़ूड तो किसी ने कुछ और लिखा हुआ है।

 

बता दें कि देश में तीन कृषि कानून के विरोध में पंजाब और हरियाणा के किसान दिल्ली बॉर्डर पर करीब हफ्ते हर से डटे हुए हैं। किसानों की मांग है कि केंद्र सरकार संसद में लाए गए तीनों कृषि कानून को रद्द करे। किसानों के प्रदर्शन को अब अन्य राज्यों के किसानेां का भी समर्थन मिलना शुरू हो गया है।

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इस बैंक में है आपका अकाउंट तो जान ले आरबीआई ने उठाया क्या कदम https://www.jubileepost.in/know-your-account-in-this-bank-what-action-did-the-rbi-take/ Thu, 03 Dec 2020 11:00:01 +0000 https://www.jubileepost.in/?p=199346 जुबिली न्यूज़ डेस्क नई दिल्ली। आप भी अगर बैंक अकाउंट को लेकर सजग रहते है और बैंक के बनाये नियमों का पालन करते है तो ये खबर आपके लिए ही है। क्योंकि आपके बैंक पर नज़र रखने के लिए आरबीआई हमेशा सतर्क रहता है, इसलिए एचडीएफसी बैंक पर ये सख्त कदम उठाया गया है। आरबीआई …]]>

जुबिली न्यूज़ डेस्क

नई दिल्ली। आप भी अगर बैंक अकाउंट को लेकर सजग रहते है और बैंक के बनाये नियमों का पालन करते है तो ये खबर आपके लिए ही है। क्योंकि आपके बैंक पर नज़र रखने के लिए आरबीआई हमेशा सतर्क रहता है, इसलिए एचडीएफसी बैंक पर ये सख्त कदम उठाया गया है।

आरबीआई ने निजी क्षेत्र के एचडीएफसी बैंक के सारे डिजिटल लॉन्च और नए क्रेडिट कार्ड जारी करने पर अस्थाई रोक लगाने को कहा है। एचडीएफसी के कामकाज में बार-बार समस्या आने के कारण RBI ने ये सख्त कार्रवाई की है। आरबीआई ने साथ ही बैंक के बोर्ड से कहा है कि वह कमियों की जांच करें और जवाबदेही तय करें।

एचडीएफसी बैंक के डेटा सेंटर में पिछले महीने कामकाज प्रभावित हुआ था जिसके बाद केंद्रीय बैंक ने ये आदेश दिया। दो साल के अंतराल में ये तीसरा मौका था जब एचडीएफसी का कामकाज प्रभावित हुआ।

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आरबीआई ने अपने आदेश में बैंक को सलाह दी है कि वह अपने कार्यक्रम डिजिटल 2.0 और अन्य प्रस्तावित आईटी अनुप्रयोगों के तहत आगामी डिजिटल व्यापार विकास गतिविधियों और नए क्रेडिट कार्ड ग्राहकों की सोर्सिंग को रोक दे। एचडीएफसी बैंक के मुताबिक आरबीआई के आदेश का पालन होने के बाद ये पाबंदियां हटा ली जाएंगी।

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एचडीएफसी का कहना है कि इस सुपरवाइजरी एक्शन का बैंक के कामकाज पर कोई असर नहीं होगा। केंद्रीय बैंक के आदेश का बैंक के मौजूदा कामकाज प्रभावित नहीं होगा। इसमें मौजूदा क्रेडिट कार्ड और डिजिटल बैंकिंग शामिल है।

बैंक के देशभर में 2848 शहरों और कस्बों में 15292 एटीएम हैं। बैंक ने अब तक 1.49 करोड़ क्रेडिट और 3.38 करोड़ डेबिट कार्ड इश्यू किए हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक प्राइमरी डेटा सेंटर में बिजली जाने से ये परेशानी हो रही है। जब पहले ऐसा हुआ था तो आरबीआई ने इसकी रिपोर्ट मांगी थी। इससे एटीएम ऑपरेशंस, कार्ड्स और यूपीआई ट्रांजैंक्शन जैसी बैंकिंग सेवाएं कुछ समय के लिए प्रभावित हुई थीं। अंतिम बार 21 नवंबर को बैंक का कामकाज प्रभावित हुआ था जिसके बारे में आरबीआई ने बैंक से स्पष्टीकरण मांगा था।

उससे पहले पिछले साल दिसंबर में बैंक का कामकाज बुरी तरह प्रभावित हुआ था जिस पर सोशल मीडिया में काफी हंगामा हुआ था। तब बैंक के लाखों ग्राहक दो दिन से भी अधिक समय तक अपने मोबाइल बैंकिंग/ नेट बैंकिंग अकांउट का यूज नहीं कर पाए थे। तब बैंक का कहना था कि ट्रांजैक्शनल एक्विटीज बढ़ने से समस्या पैदा हुई थी।

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पद्म विभूषण वापस करके किसान आंदोलन को दे रहे हैं ताकत https://www.jubileepost.in/former-cm-prakash-singh-badal-returns-padma-vibhushan-award/ Thu, 03 Dec 2020 10:55:10 +0000 https://www.jubileepost.in/?p=199345 जुबिली न्यूज़ डेस्क किसान कानून को लेकर देश में चल रहा किसान आंदोलन लगातार बढ़ता ही जा रहा है। कानून के विरोध में पंजाब और हरियाणा के किसान दिल्ली बॉर्डर पर करीब छह दिन से डटे हुए हैं। इस बीच इस आंदोलन में एक नया मोड़ आ गया है। अब इस आन्दोलन में अवार्ड वापसी …]]>

जुबिली न्यूज़ डेस्क

किसान कानून को लेकर देश में चल रहा किसान आंदोलन लगातार बढ़ता ही जा रहा है। कानून के विरोध में पंजाब और हरियाणा के किसान दिल्ली बॉर्डर पर करीब छह दिन से डटे हुए हैं। इस बीच इस आंदोलन में एक नया मोड़ आ गया है। अब इस आन्दोलन में अवार्ड वापसी का दौर शुरू हो गया है।

जी हां पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने भारत सरकार पर किसानो के साथ विश्वासघात का आरोप लगाते हुए आंदोलन के समर्थन में पद्म विभूषण लौटा दिया है। उनके साथ ही अकाली दल के एक और नेता सुखदेव सिंह ढींढसा ने भी अपना पद्म भूषण/सम्मान लौटाने की बात कही है।

प्रकाश सिंह बादल ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को करीब 3 पन्ने की चिट्ठी लिखते हुए कृषि कानूनों का विरोध जताया। साथ ही किसानो पर हो रहे एक्शन को लेकर निंदा की। उन्होंने लिखा कि, मैं इतना गरीब हूं कि किसानों के लिए कुर्बान करने के लिए मेरे पास कुछ और नहीं है, मैं जो भी हूं किसानों की वजह से हूं। ऐसे में अगर किसानों को अपमान हो रहा है, तो किसी तरह का सम्मान रखने का कोई फायदा नहीं है।

गौरतलब है कि पिछले एक हफ्ते से किसान केंद्र सरकार द्वारा पास कराए गए किसान बिलों के विरोध में आंदोलन कर रहे हैं। तीन कृषि कानूनों के विरोध में संसद के मानसून सत्र के दौरान ही अकाली दल के हिस्से से काबीना मंत्री रहीं हरसिमरत कौर ने भी इस्तीफा दे दिया था। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन से बाहर हो गई थी।

बता दें कि अकाली दल पंजाब में लगातार कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रही है। हालांकि, कैप्टन अमरिंदर सिंह भी अकाली दल पर हमलावर हैं और लगातार अकाली दल को घेरे हुए हैं। अमरिंदर ने ये आरोप लगाया था कि जब अकाली दल केंद्र सरकार में शामिल थी, और ये कानून तैयार हुए थे उस समय विरोध क्यों नहीं किया गया था।

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जानिये देश के सर्वश्रेष्ठ थाने कौन से हैं https://www.jubileepost.in/know-which-are-the-best-police-stations-of-the-country/ Thu, 03 Dec 2020 10:33:56 +0000 https://www.jubileepost.in/?p=199337 जुबिली न्यूज़ डेस्क नई दिल्ली. गृह मंत्रालय ने देश के टॉप 10 पुलिस थानों की लिस्ट जारी की है. इसमें एक थाना उत्तर प्रदेश का भी है. गृह मंत्रालय ने इस लिस्ट में उन पुलिस थानों को रखा है जिन्होंने चुनौतीपूर्ण हालात में भी अपना कर्तव्य पालन करके दिखाया. गृह मंत्रालय ने टॉप 10 थानों …]]>

जुबिली न्यूज़ डेस्क

नई दिल्ली. गृह मंत्रालय ने देश के टॉप 10 पुलिस थानों की लिस्ट जारी की है. इसमें एक थाना उत्तर प्रदेश का भी है. गृह मंत्रालय ने इस लिस्ट में उन पुलिस थानों को रखा है जिन्होंने चुनौतीपूर्ण हालात में भी अपना कर्तव्य पालन करके दिखाया.

गृह मंत्रालय ने टॉप 10 थानों के चयन में बहुत सी चीज़ों को शामिल किया है. कोरोना महामारी से निबटने के लिए सरकार द्वारा जारी किये गए प्रोटोकाल का पालन इन थानों ने सर्वश्रेष्ठ तरीके से करवाया. सरकार के दिशा निर्देशों का पालन कराने में भी यह थाने सर्वश्रेष्ठ पाए गए.

गृह मंत्रालय ने कुछ देर पहले सर्वश्रेष्ठ थानों की जो सूची जारी की है उसमें उत्तर प्रदेश के अलावा मणिपुर, तमिलनाडु, अरुणांचल प्रदेश, छत्तीसगढ़ और गोवा के थाने शामिल किये गए हैं.

मणिपुर के थौबल का नोंगपोक सेमकई थाने के सर्वश्रेष्ठ थानों में पहला नम्बर मिला है. दूसरे नम्बर पर तमिलनाडु के सालेम जिले का एडब्ल्यूपीएस सुरमंगलम थाना है. तीसरे नम्बर पर अरुणांचल प्रदेश के चांगलांग जिले का खरसांग थाना है. चौथे नम्बर पर छत्तीसगढ़ के सुरजापुर जिले का झिलमिल और पांचवें नम्बर पर दक्षिण गोवा का संगुएम थाना है.

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सर्वश्रेष्ठ थानों में छठे नम्बर पर अंडमान-निकोबार द्वीप समूह का कालीघाट थाना है. सिक्किम के पूर्वी जिले के पाकयोंग थाने को सातवाँ स्थान मिला है. आठवें नम्बर पर उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले के कांठ थाने को चुना गया है. दादरा और नागर हवेली के खानवेल थाने ने देश में नवां और तेलंगाना के करीमनगर जिले के जम्मीकुंटा टाउन को दसवां स्थान प्राप्त हुआ है.

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UP MLC ELECTION: देर शाम तक होगा प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला https://www.jubileepost.in/up-mlc-election-results/ Thu, 03 Dec 2020 10:23:45 +0000 https://www.jubileepost.in/?p=199334 जुबिली न्यूज़ डेस्क लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधान परिषद (एमएलसी) स्नातक शिक्षक चुनाव के 11 सीटों के लिए आज सुबह आठ बजे से मतगणना का कार्य कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच जारी है। बता दें कि इन 11 सीटों पर भाजपा, सपा, कांग्रेस व अन्य को मिलाकर टोटल 199 प्रत्‍याशी हैं। इनके भाग्य का निर्धारण देर …]]>

जुबिली न्यूज़ डेस्क

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधान परिषद (एमएलसी) स्नातक शिक्षक चुनाव के 11 सीटों के लिए आज सुबह आठ बजे से मतगणना का कार्य कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच जारी है। बता दें कि इन 11 सीटों पर भाजपा, सपा, कांग्रेस व अन्य को मिलाकर टोटल 199 प्रत्‍याशी हैं। इनके भाग्य का निर्धारण देर शाम तक आने की संभावना है। मतगणना स्‍थलों के पास सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।

बता दें कि मतगणना के लिए प्रशासन ने पहले ही रणनीति तैयार कर ली थी। सबसे पहले शिक्षक निर्वाचन और उसके बाद स्‍नातक निर्वाचन के परिणाम आएंगे। इस चुनाव में मतदान बैलेट पेपर से होने के कारण मतगणना प्रक्रिया धीमी गति से प्रारंभ हुई है और परिणाम भी देर से मिलने की संभावना है।

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ऐसा बताया जा रहा है कि शाम 4 बजे से रुझान आने की संभावना रहेगी। गौरतलब है कि निर्वाचन क्षेत्र में शामिल झांसी समेत प्रयागराज, कौशांबी ,फतेहपुर, चित्रकूट, बांदा, हमीरपुर, महोबा, जालौन व ललितपुर में कुल 65,304 मतदाताओं ने मतदान किया था।

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लखनऊ में एक प्रत्‍याशी और उनके समर्थकों ने सत्‍ता के दुरुपयोग और प्रशासन पर भाजपा के पक्ष में काम करने का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। उन्‍होंने मतगणना स्‍थल अराजक तत्‍वों की मौजूदगी का आरोप लगाया। मौके पर पहुंचे डीएम और अन्‍य वरिष्‍ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने हंगामा कर रहे लोगों को समझा-बुझाकर किसी तरह शांंत कराया।

वाराणसी में दोपहर दो बजे सपा ने मतगणना में धांधली का आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया। पुलिस ने हंगामा कर रहे लोगों को बाहर करना शुरू किया तो भारी संख्या में सपा के लोग पहुंच गए और मतगणना स्थल पहाड़िया मंडी गेट पर धरना शुरू कर दिया।

सबसे ज्‍यादा मेरठ, लखनऊ में सबसे कम उम्‍मीदवार

सबसे ज्‍यादा 30 प्रत्‍याशी मेरठ स्‍नातक क्षेत्र में हैं, जबकि सबसे कम 11 उम्‍मीदवार लखनऊ शिक्षक खंड निर्वाचन क्षेत्र में हैं। इसके अलावा आगरा स्‍नातक खंड क्षेत्र में 22, इलाहाबाद- झांसी स्‍नातक खंड क्षेत्र में 16, लखनऊ खंड स्‍नातक क्षेत्र में 24, वाराणसी खंड स्‍नातक में 22, आगरा खंड शिक्षक क्षेत्र में 16, बरेली-मुरादाबाद खंड शिक्षक क्षेत्र में 15, गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक क्षेत्र में 16, मेरठ खंड शिक्षक क्षेत्र में 15 और वाराणसी खंड शिक्षक क्षेत्र में 12 प्रत्‍याशी हैं।

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कुली नंबर 1 के इस गाने ने रिलीज़ होते ही मचाया धमाल https://www.jubileepost.in/bollywood-varun-dhawan-film-coolie-no-1-song-release-today/ Thu, 03 Dec 2020 10:16:20 +0000 https://www.jubileepost.in/?p=199330 जुबिली न्यूज़ डेस्क बॉलीवुड एक्टर वरुण धवन और सारा अली खान की फिल्म कुली नंबर 1 क्रिसमस के मौके पर रिलीज़ होने वाली है। फिल्म का ट्रेलर पहले ही रिलीज़ हो चुका है जिसको दर्शकों ने खूब सराहा है। इस बीच फिल्म का पहला गाना ‘तेरी भाभी’ आज रिलीज़ कर दिया गया। इस गाने लिरिक्स …]]>

जुबिली न्यूज़ डेस्क

बॉलीवुड एक्टर वरुण धवन और सारा अली खान की फिल्म कुली नंबर 1 क्रिसमस के मौके पर रिलीज़ होने वाली है। फिल्म का ट्रेलर पहले ही रिलीज़ हो चुका है जिसको दर्शकों ने खूब सराहा है। इस बीच फिल्म का पहला गाना ‘तेरी भाभी’ आज रिलीज़ कर दिया गया। इस गाने लिरिक्स और म्यूजिक सुनकर आपको 90 के दशक का फील आने वाला है।

इसके अलाव इस गाने को देख कर आपको ये अंदाजा लगा सकते हैं कि इस गाने में किये गये डांस स्टेप  और एक्सप्रेशन्स के मामले में वरुण कहीं न कहीं गोविंदा की तरह परफॉर्म करने की कोशिश करते हुए नजर आ रहे हैं।

इस गाने के बोल दानिश सबरी ने लखा है। वहीं इसको देव नेगी और नेहा कक्कड़ ने अपनी आवाज दी है। ये गाना सोशल मीडिया पर इतना वायरल हो रहा है कि गाने के रिलीज़ होने के बाद ही कुछ ही मिनटों के भीतर इसे एक लाख से ज्यादा बार देखा जा चुका है।

इस गाने की लोग जमकर तारीफ कर रहे हैं। फिल्म की बात की जाए तो इसे 25 दिसंबर के दिन क्रिसमस के मौके पर अमेजन प्राइम पर रिलीज किया जाएगा। डेविड धवन के निर्देशन में बनी ये 45वीं फिल्म है जो कि साल 1995 में रिलीज हुई गोविंदा व करिश्मा कपूर स्टारर फिल्म का रीमेक है।

बॉलीवुड की इस रोमांटिक कॉमेडी फिल्म को निर्देशित किया है डेविड धवन ने। वहीं फिल्म के निर्माता हैं वाशु भगनानी, जैकी भगनानी और दीपशिखा देशमुख। इसके साथ ही फिल्म में परेश रावल, राजपाल यादव, जावेद जाफरी और जॉनी लीवर भी शामिल हैं।

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लखनऊ विश्वविद्यालय में दिखा नया नजारा, मारपीट करते नज़र आए जॉन अब्राहम https://www.jubileepost.in/john-abraham-seen-fighting-in-lucknow-university/ Thu, 03 Dec 2020 09:41:15 +0000 https://www.jubileepost.in/?p=199324 प्रमुख संवाददाता लखनऊ. अपने सौ साल के पूरे होने के जलसे से उबरते ही लखनऊ विश्वविद्यालय का कैंपस नई गतिविधि का केंद्र बन गया है। इन दिनों यहां जॉन अब्राहम की अपकमिंग फिल्म सत्यमेव जयते- 2 की शूटिंग चल रही है। बुधवार को यहां एक फाइट सिक्वेंस फिल्माया गया. फिल्म अभिनेता को शूटिंग करते हुए …]]>

प्रमुख संवाददाता

लखनऊ. अपने सौ साल के पूरे होने के जलसे से उबरते ही लखनऊ विश्वविद्यालय का कैंपस नई गतिविधि का केंद्र बन गया है। इन दिनों यहां जॉन अब्राहम की अपकमिंग फिल्म सत्यमेव जयते- 2 की शूटिंग चल रही है। बुधवार को यहां एक फाइट सिक्वेंस फिल्माया गया. फिल्म अभिनेता को शूटिंग करते हुए देखने के लिए छात्र-छात्राओं और प्रशंसकों की भारी भीड़ के बावजूद शूटिंग पूरी की गई.

इस फिल्म में जॉन एक पुलिस अफसर की भूमिका में है. लखनऊ विश्वविद्यालय में जो सिक्वेंस फिल्माया गया है उसमें जॉन पर हमले का दृश्य है. अचानक बड़ी संख्या में गुंडों ने जॉन पर हमला कर दिया. इस हमले से वह घबराए नहीं. उन्होंने गुंडों की बुरी तरह से पिटाई की.

जॉन अब्राहम की फुर्ती को देखकर लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्र ठगे से रह गए. एक छात्र ने दूसरे से कहा कि ऐसा तो सिर्फ फिल्मों में ही होता है. यह तो असल ज़िन्दगी में भी शानदार फाइट करता है.

जॉन अब्राहम के लिए लखनऊ नया शहर नहीं है. इससे पहले वह बाटला हाउस की शूटिंग के लिए लखनऊ आये थे. सत्यमेव जयते की शूटिंग भी लखनऊ में हो चुकी है. सत्यमेव जयते-2  के नाम से उसी फिल्म का सिक्वल बन रहा है.

सत्यमेव जयते-2 में जॉन अब्राहम पुलिस अधिकारी की भूमिका में हैं. लखनऊ विश्वविद्यालय में गुंडे उन्हें जान से मारने आये थे लेकिन वह खुद मार खा गए. अनलॉक के बाद 21 अक्तूबर से ही लखनऊ में इस फिल्म की शूटिंग शुरू हुई थी. इस फिल्म की काफी शूटिंग अगले दो महीने तक चलेगी. लखनऊ के कई हिस्सों में इस फिल्म की शूटिंग हो चुकी है. इस फिल्म में जॉन के साथ अभिनेत्री के तौर पर दिव्या कुमार खोसला है।

टी सीरीज के भूषण कुमार की पत्नी दिव्या कुमार इस फिल्म में अपनी भूमिका को लेकर बेहद उत्साहित हैं। उन्होंने अक्तूबर में इस फिल्म की शूटिंग शुरू होने के बाद ही ट्वीट कर इस बात की जानकारी सार्वजनिक की थी। दिव्या ने पिछले ही महीने इस फिल्म के सेट पर ही अपना जन्मदिन मनाया था। उनके जन्मदिन पर भूषण कुमार भी लखनऊ में मौजूद थे।

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सत्यमेव जयते-2 की शूटिंग अभी लखनऊ विश्वविद्यालय में और होनी है. इसके अलावा बड़ा व छोटा इमामबाड़ा, कुड़िया घाट, लामार्टीनियर कालेज और मोती महल लॉन में शूटिंग होगी. कोरोना महामारी की वजह से लम्बे समय से बंद शूटिंग का सिलसिला अब शुरू हो चुका है. अगले दो महीने लखनऊ के विभिन्न स्थानों पर शूटिंग का सिलसिला चलता रहेगा. इस फिल्म में दिव्या खोसला के अलावा ऋतु राज सिंह मुख्य भूमिका में हैं.

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तो क्या आपके घर भी आया है मिलावटी शहद ! https://www.jubileepost.in/so-has-adulterated-honey-come-to-your-house-too/ Thu, 03 Dec 2020 09:33:14 +0000 https://www.jubileepost.in/?p=199323 जुबिली न्यूज़ डेस्क नई दिल्ली। भारत में बिकने वाले कई प्रमुख ब्रांड के शहद में चीनी शरबत की मिलावट पाई गई है, पर्यावरण नियामक सीएसई ने जारी एक अध्ययन रिपोर्ट में इस बात का दावा किया है। सेंटर फ़ॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) के खाद्य शोधकर्ताओं ने भारत में बिकने वाले प्रसंस्कृत और कच्चे शहद …]]>

जुबिली न्यूज़ डेस्क

नई दिल्ली। भारत में बिकने वाले कई प्रमुख ब्रांड के शहद में चीनी शरबत की मिलावट पाई गई है, पर्यावरण नियामक सीएसई ने जारी एक अध्ययन रिपोर्ट में इस बात का दावा किया है।

सेंटर फ़ॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) के खाद्य शोधकर्ताओं ने भारत में बिकने वाले प्रसंस्कृत और कच्चे शहद की शुद्धता की जांच करने के लिए 13 छोटे बड़े ब्रांड का चयन किया। इसने पाया कि 77 प्रतिशत नमूनों में चीनी शरबत की मिलावट थी। जांच किए गए 22 नमूनों में से केवल पांच सभी परीक्षण में सफल हुये।

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अध्ययन में कहा गया कि डाबर, पतंजलि, बैद्यनाथ, झंडू, हितकारी और एपिस हिमालय जैसे प्रमुख ब्रांड के शहद के नमूने एनएमआर (न्यूक्लियर मैग्नेटिक रेजोनेंस) परीक्षण में विफल रहे।

इसका जवाब देते हुए इमामी (झंडू) के प्रवक्ता ने कहा कि एक जिम्मेदार संगठन के रूप में इमामी सुनिश्चित करता है कि उसका झंडू शुद्ध शहद भारत सरकार और उसके प्राधिकरण एफएसएसएआई द्वारा निर्धारित सभी नियम- शर्तों और गुणवत्ता मानदंडों / मानकों के अनुरूप हो और उनका पालन करे।’

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डाबर ने भी दावे का खंडन करते हुए कहा कि हालिया रिपोर्ट ‘दुर्भावना और हमारे ब्रांड की छवि खराब करने के उद्देश्य से प्रेरित’ लगती है। उसने कहा है कि डाबर, शहद के परीक्षण के लिए भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण द्वारा अनिवार्य सभी 22 मानदंडों का अनुपालन करती है।

डाबर ने कहा कि इसके अलावा, एफएसएसएआई द्वारा अनिवार्य रूप से एंटीबायोटिक दवाओं की उपस्थिति के लिए डाबर शहद का भी परीक्षण किया जाता है। डाबर भारत में एकमात्र कंपनी है, जिसके पास अपनी प्रयोगशाला में एनएमआर परीक्षण उपकरण है और उसी का उपयोग नियमित रूप से शहद का परीक्षण करने के लिए किया जाता है और भारतीय बाजार में बेचा जा रहा है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि डाबर शहद 100 फीसदी शुद्ध हो।

इस घटनाक्रम पर टिप्पणी करते हुए, पतंजलि आयुर्वेद के प्रवक्ता एस के तिजारावाला ने कहा कि हम केवल प्राकृतिक शहद का निर्माण करते हैं, जिसे खाद्य नियामक एफएसएसएआई द्वारा अनुमोदित किया जाता है। हमारा उत्पाद एफएसएसएआई द्वारा निर्धारित मानकों को पूरा करता है।’

उन्होंने ये भी आरोप लगाया कि ये रिपोर्ट देश के प्राकृतिक शहद उत्पादकों को बदनाम करने की साजिश है। उन्होंने कहा कि यह जर्मन तकनीक और महंगी मशीनरी को बेचने की साजिश है। यह देश के प्राकृतिक शहद उत्पादकों को बदनाम करने और प्रसंस्कृत शहद को बढ़ावा देने के लिए भी एक साजिश है।

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राष्ट्रीय मधुमक्खी बोर्ड के कार्यकारी सदस्य देवव्रत शर्मा ने कहा कि न्यूक्लियर मैग्नेटिक रेजोनेंस (एनएमआर) परीक्षण में इस बात का भी पता मिल सकता है कि कोई खास शहद किस फूल से, कब और किस देश में निकाला गया है। इस परीक्षण में चूक होने की गुंजाइश नहीं है।’

उन्होंने कहा कि भारतीय खाद्य नियामक, एफएसएसएआई को अपने शहद के मानकों में एनएमआर परीक्षण को अनिवार्य कर देना चाहिये ताकि हमारे देशवासियों को भी शुद्ध शहद खाने को मिले।

गुजरात में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड में सेंटर फॉर एनालिसिस एंड लर्निंग इन लाइवस्टॉक एंड फ़ूड (सीएएलएफ) में पहली बार सीएसई द्वारा इन ब्रांड के शहद के नमूनों का परीक्षण किया गया।

परीक्षणकर्ता, सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट के अनुसार, लगभग सभी शीर्ष ब्रांड, शुद्धता के परीक्षणों में सफल हुए, जबकि कुछ छोटे ब्रांडों में सी-4 चीनी का पता लगने से वे परीक्षणों को विफल रहे। सी-4 ऐसी बुनियादी मिलावट का प्रारूप है जिसमें गन्ना चीनी का उपयोग किया जाता है।

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परीक्षणकर्ता ने कहा कि जब न्यूक्लियर मैग्नेटिक रेजोनेंस (एनएमआर) का उपयोग करके उन्हीं ब्रांडों के नमूनों का परीक्षण किया गया तो लगभग सभी छोटे बड़े ब्रांड परीक्षण में विफल पाये गये। न्यूक्लियर मैग्नेटिक रेजोनेंस (एनएमआर) परीक्षण में किसी भी प्रकार की मिलावट का पता लगाया जा सकता है।

मिलावट की पक्की जांच के लिए विश्व स्तर पर एनएमआर परीक्षण का उपयोग किया जा रहा है। इस एनएमआर परीक्षण में 13 ब्रांडों के परीक्षणों में से केवल तीन सफल हो पाये। यह परीक्षण, जर्मनी में एक विशेष प्रयोगशाला द्वारा किया गया था।

सीएसई की महानिदेशक सुनीता नारायण ने कहा कि कि हम शहद का सेवन कर रहे हैं- महामारी से लड़ने के लिए। लेकिन चीनी के साथ मिलावटी शहद हमें स्वस्थ नहीं बनाएगा। यह वास्तव में, हमें और भी कमजोर बना देगा।

दूसरी ओर हमें इस बात की भी चिंता करनी चाहिए कि मधुमक्खियों के नष्ट होने से हमारी खाद्य प्रणाली ध्वस्त हो जाएगी क्योंकि पर-परागण के लिए मधुमक्खियाँ महत्वपूर्ण हैं। यदि शहद में मिलावट है, तो न केवल हमारा स्वास्थ प्रभावित होगा बल्कि हमारी कृषि उत्पादकता पर भी असर आयेगा।

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