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	<title>Jubilee Post | जुबिली पोस्ट</title>
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	<description>News &#38; Information Portal</description>
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		<title>‘खामेनेई हमारे नेता…’ जुमे की नमाज में उमड़ा जनसैलाब, ईरान में दिखा गुस्सा और मातम</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/khamenei-is-our-leader-crowds-turn-out-for-friday-prayers-anger-and-mourning-in-iran/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Syed Mohammad Abbas]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 06 Mar 2026 17:27:39 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Main Slider]]></category>
		<category><![CDATA[जुबिली वर्ल्ड]]></category>
		<category><![CDATA[ब्रेकिंग न्यूज़]]></category>
		<category><![CDATA[#Iran #AliKhamenei #IranFridayPrayer #Tehran #IranProtest #MiddleEastCrisis #IsraelIranTension #USIranConflict #Khamenei #IranNews #BreakingNews #JummaNamaz #MiddleEastNews #IranLeader #WorldNews]]></category>
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					<description><![CDATA[जुबिली स्पेशल डेस्क ईरान में शुक्रवार को अदा की गई जुमे की नमाज बेहद भावुक और ऐतिहासिक माहौल में हुई। यह पहली बार था जब ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei के निधन के बाद देशभर में जुमे की नमाज पढ़ी गई। अपने नेता को याद करते हुए कई ईरानी नमाजियों की आंखें नम दिखाई &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p data-start="25" data-end="342"><span style="color: #0000ff;"><strong>जुबिली स्पेशल डेस्क </strong></span></p>
<p data-start="25" data-end="342">ईरान में शुक्रवार को अदा की गई जुमे की नमाज बेहद भावुक और ऐतिहासिक माहौल में हुई। यह पहली बार था जब ईरान के सर्वोच्च नेता <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Ali Khamenei</span></span> के निधन के बाद देशभर में जुमे की नमाज पढ़ी गई। अपने नेता को याद करते हुए कई ईरानी नमाजियों की आंखें नम दिखाई दीं और सड़कों पर शोक और गुस्से का माहौल नजर आया।</p>
<p data-start="344" data-end="667">राजधानी <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Tehran</span></span> में सुबह से ही हजारों की संख्या में लोग सड़कों पर निकल आए। महिलाएं काले लिबास और पर्दे में थीं, जबकि पुरुष भी काले कपड़ों में नजर आए। बड़ी संख्या में लोग इजरायल और अमेरिका के खिलाफ नारे लगाते हुए दिखाई दिए। कई नमाजियों के हाथों में खामेनेई की तस्वीरें और विरोध के पोस्टर भी थे।</p>
<blockquote>
<p data-start="669" data-end="1066"><strong>खामेनेई की मौत के एक सप्ताह बाद अदा की गई इस नमाज में तेहरान के <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Imam Khomeini Mosalla</span></span>, <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Enghelab Square</span></span> और शहर की कई मस्जिदों में लाखों लोग जुटे। रमजान के महीने में लोग “लब्बैक या खामेनेई”, “अमेरिका मुर्दाबाद” और “इजरायल मुर्दाबाद” जैसे नारे लगाते हुए नजर आए। यह नमाज केवल धार्मिक आयोजन नहीं रही, बल्कि इसे विरोध और एकजुटता के बड़े प्रदर्शन के तौर पर देखा गया।</strong></p>
</blockquote>
<p data-start="1068" data-end="1268">मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजरायल और अमेरिका की बमबारी के बावजूद लोगों में डर का माहौल नहीं दिखा। युद्ध और हमलों के बीच भी बड़ी संख्या में ईरानी सड़कों पर उतरकर अपने नेता को श्रद्धांजलि देते नजर आए।</p>
<p data-start="1270" data-end="1616">ईरान के अन्य शहरों जैसे <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Qom</span></span>, <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Mashhad</span></span>, <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Isfahan</span></span> और <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Shiraz</span></span> में भी इसी तरह का माहौल देखने को मिला। कुम में महिलाएं रोते हुए सीना पीटती दिखाई दीं, जबकि मशहद में पुरुष “खामेनेई हमारे नेता, हम शहीदों की औलाद” के नारे लगा रहे थे।</p>
<p data-start="1618" data-end="1762" data-is-last-node="" data-is-only-node="">ईरान की सरकारी मीडिया ने इसे “ऐतिहासिक जुमे की नमाज” बताया और कहा कि युद्ध और हमलों के बावजूद ईरानी समाज पहले से ज्यादा एकजुट होकर सामने आया है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>“जायोनी शासन ने बड़ी गलती की है&#8230;जंग के बीच खामेनेई के X अकाउंट से पोस्ट</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/the-jews-made-a-big-mistake-a-post-from-khameneis-x-account-amid-the-iran-us-conflict/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Syed Mohammad Abbas]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 06 Mar 2026 17:18:32 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Main Slider]]></category>
		<category><![CDATA[जुबिली वर्ल्ड]]></category>
		<category><![CDATA[ब्रेकिंग न्यूज़]]></category>
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					<description><![CDATA[जुबिली स्पेशल डेस्क ईरान के सर्वोच्च नेता Ayatollah Ali Khamenei की मौत के बाद उनके आधिकारिक X अकाउंट से पहली पोस्ट सामने आई है। इस पोस्ट में इजरायल को कड़ी चेतावनी दी गई है और एक AI से तैयार तस्वीर भी साझा की गई है, जिसमें मिसाइल के निर्माण से लेकर लक्ष्य पर हमले तक &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p data-start="0" data-end="295"><span style="color: #0000ff;"><strong>जुबिली स्पेशल डेस्क </strong></span></p>
<p data-start="0" data-end="295">ईरान के सर्वोच्च नेता <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Ayatollah Ali Khamenei</span></span> की मौत के बाद उनके आधिकारिक X अकाउंट से पहली पोस्ट सामने आई है। इस पोस्ट में इजरायल को कड़ी चेतावनी दी गई है और एक AI से तैयार तस्वीर भी साझा की गई है, जिसमें मिसाइल के निर्माण से लेकर लक्ष्य पर हमले तक की पूरी प्रक्रिया दिखाई गई है।</p>
<p data-start="297" data-end="486">खामेनेई के X हैंडल से उनकी मौत के बाद यह पहला संदेश माना जा रहा है। 86 वर्षीय खामेनेई की 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के समन्वित हमलों में मौत हो गई थी, जिसकी पुष्टि 1 मार्च को की गई थी।</p>
<p data-start="488" data-end="668">पोस्ट में एक AI-जनरेटेड तस्वीर साझा की गई है। इसमें वैज्ञानिकों को मिसाइल तैयार करते हुए, सैन्य अधिकारियों को उसे लॉन्च करते हुए और अंत में लक्ष्य पर हमला करते हुए दिखाया गया है।</p>
<p data-start="670" data-end="916">ट्वीट में सीधे तौर पर <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Israel</span></span> को चेतावनी दी गई है। पोस्ट में लिखा गया है कि “जायोनी शासन ने बड़ी गलती की है और इसके परिणाम उसे निराश कर देंगे।” साथ ही यह भी कहा गया कि ईश्वर की कृपा से इसके परिणाम जल्द सामने आएंगे।</p>
<p data-start="918" data-end="1120">यह संदेश ऐसे समय में सामने आया है जब <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Middle East</span></span> में पहले से ही तनाव चरम पर है। इस पोस्ट को ईरान की ओर से इजरायल के लिए एक सख्त और प्रतीकात्मक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।</p>
<p data-start="1122" data-end="1443" data-is-last-node="" data-is-only-node="">दरअसल, 28 फरवरी को शुरू हुए हमलों का मकसद शुरुआत में ईरान के सैन्य और परमाणु ढांचे को निशाना बनाना बताया गया था।</p>
<p data-start="1122" data-end="1443" data-is-last-node="" data-is-only-node="">लेकिन कुछ ही दिनों में यह संघर्ष व्यापक हो गया और मिसाइल, ड्रोन तथा हवाई हमलों के चलते पूरे क्षेत्र में तनाव फैल गया। इन हमलों में खामेनेई समेत ईरान के नेतृत्व से जुड़े कई प्रमुख लोगों की मौत की खबर सामने आई।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-337638" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2026/03/Screenshot-2026-03-06-223738.jpg" alt="" width="663" height="873" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2026/03/Screenshot-2026-03-06-223738.jpg 663w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2026/03/Screenshot-2026-03-06-223738-228x300.jpg 228w" sizes="(max-width: 663px) 100vw, 663px" /></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>नीतीश के बेटे निशांत कल जेडीयू में शामिल होंगे, डिप्टी सीएम की अटकलें</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/nitishs-son-nishant-to-join-jdu-tomorrow-speculation-on-deputy-cm/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Syed Mohammad Abbas]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 06 Mar 2026 17:07:23 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Main Slider]]></category>
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		<category><![CDATA[JDU latest news Bihar Hashtags: #NishantKumar #NitishKumar #BiharPolitics #JDU #BiharNews #DeputyCM #IndianPolitics #BreakingNews #PoliticalNews #PatnaNews]]></category>
		<category><![CDATA[JDU में निशांत कुमार शामिल]]></category>
		<category><![CDATA[Nishant Kumar Deputy CM speculation]]></category>
		<category><![CDATA[Nitish Kumar son Nishant politics entry]]></category>
		<category><![CDATA[निशांत कुमार JDU जॉइन]]></category>
		<category><![CDATA[निशांत कुमार डिप्टी सीएम चर्चा]]></category>
		<category><![CDATA[निशांत कुमार राजनीति में एंट्री]]></category>
		<category><![CDATA[नीतीश कुमार के बेटे निशांत]]></category>
		<category><![CDATA[बिहार राजनीति खबर]]></category>
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					<description><![CDATA[जुबिली स्पेशल डेस्क पटना: बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आवास पर आयोजित जेडीयू की अहम बैठक में उनके राज्यसभा जाने के प्रस्ताव पर सर्वसम्मति से मुहर लगा दी गई। इसी के साथ उनके बेटे निशांत कुमार की सक्रिय राजनीति में एंट्री का रास्ता भी साफ &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p data-start="0" data-end="366"><span style="color: #0000ff;"><strong data-start="0" data-end="9">जुबिली स्पेशल डेस्क </strong></span></p>
<p data-start="0" data-end="366"><strong data-start="0" data-end="9">पटना:</strong> बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। मुख्यमंत्री <strong data-start="75" data-end="90">नीतीश कुमार</strong> के आवास पर आयोजित जेडीयू की अहम बैठक में उनके राज्यसभा जाने के प्रस्ताव पर सर्वसम्मति से मुहर लगा दी गई।</p>
<p data-start="0" data-end="366">इसी के साथ उनके बेटे <strong data-start="217" data-end="233">निशांत कुमार</strong> की सक्रिय राजनीति में एंट्री का रास्ता भी साफ हो गया है। बताया जा रहा है कि निशांत कुमार शनिवार को जेडीयू की सदस्यता ग्रहण करेंगे।</p>
<p data-start="368" data-end="638">बैठक में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विधायकों और सांसदों को संबोधित करते हुए कहा कि वह राज्यसभा जा रहे हैं, लेकिन इससे बिहार के कामकाज पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वह राज्य के विकास कार्यों पर नजर बनाए रखेंगे और पार्टी के साथ मजबूती से जुड़े रहेंगे।</p>
<blockquote>
<p data-start="640" data-end="952"><strong>जेडीयू नेता नीरज कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार की मौजूदगी में सांसदों, मंत्रियों और विधायकों की बैठक हुई, जिसमें सभी ने सर्वसम्मति से उनके फैसले का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार ने ही पार्टी को खड़ा किया है, इसलिए जेडीयू का पूरा संगठन उनके साथ खड़ा है।</strong></p>
</blockquote>
<p data-start="954" data-end="1210">वहीं पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री <strong data-start="1006" data-end="1018">ललन सिंह</strong> ने कहा कि अब समय आ गया है कि निशांत कुमार राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाएं। पार्टी के नेताओं और विधायकों ने इस फैसले का स्वागत किया है और उनके जेडीयू में शामिल होने का रास्ता साफ हो गया है।</p>
<p data-start="1212" data-end="1250"><span style="color: #800000;"><strong>पूरे बिहार का दौरा करेंगे निशांत</strong></span></p>
<p data-start="1251" data-end="1475">पार्टी नेताओं के मुताबिक, जेडीयू की सदस्यता लेने के बाद निशांत कुमार राज्यभर का दौरा करेंगे और संगठन को मजबूत करने का काम करेंगे। नेताओं का कहना है कि उनकी सक्रियता बिहार की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटना साबित हो सकती है।</p>
<p data-start="1477" data-end="1517"><span style="color: #800000;"><strong>नीतीश का राष्ट्रीय राजनीति पर फोकस</strong></span></p>
<p data-start="1518" data-end="1799">सूत्रों के मुताबिक, नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद उनका फोकस राष्ट्रीय राजनीति पर बढ़ सकता है। वहीं राज्य में नई राजनीतिक जिम्मेदारियों को लेकर भी अटकलें तेज हैं। माना जा रहा है कि पार्टी और सरकार में नई भूमिका तय होने के बाद निशांत कुमार जेडीयू का प्रमुख चेहरा बन सकते हैं।</p>
<p data-start="1801" data-end="1931" data-is-last-node="" data-is-only-node="">फिलहाल बिहार की राजनीति की नजरें अब उस औपचारिक समारोह पर टिकी हैं, जिसमें निशांत कुमार के जेडीयू में शामिल होने की घोषणा की जाएगी।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>बालेन शाह की अगुवाई में नेपाल, भारत के साथ संबंधों की चुनौतियाँ</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/challenges-to-india-in-balen-regime/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Utkarsh Sinha]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 06 Mar 2026 13:03:02 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Main Slider]]></category>
		<category><![CDATA[ओपिनियन]]></category>
		<category><![CDATA[जुबिली डिबेट]]></category>
		<category><![CDATA[जुबिली वर्ल्ड]]></category>
		<category><![CDATA[nepal election 2026]]></category>
		<category><![CDATA[बालेन शाह]]></category>
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					<description><![CDATA[डा.उत्कर्ष सिन्हा नेपाल के 2026 के आम चुनावों के नतीजे आ चुके हैं, और ये नतीजे न केवल हिमालयी राष्ट्र की राजनीति में एक क्रांतिकारी मोड़ का संकेत देते हैं, बल्कि दक्षिण एशिया के भू-राजनीतिक समीकरण को भी नया आकार देने की क्षमता रखते हैं। 5 मार्च को संपन्न हुए मतदान के बाद 6 मार्च &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><img loading="lazy" decoding="async" class="alignleft wp-image-328477 size-thumbnail" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2025/09/utkarsh-pic-150x150.jpeg" alt="" width="150" height="150" /><span style="color: #0000ff;">डा.उत्कर्ष सिन्हा </span></strong></p>
<p>नेपाल के 2026 के आम चुनावों के नतीजे आ चुके हैं, और ये नतीजे न केवल हिमालयी राष्ट्र की राजनीति में एक क्रांतिकारी मोड़ का संकेत देते हैं, बल्कि दक्षिण एशिया के भू-राजनीतिक समीकरण को भी नया आकार देने की क्षमता रखते हैं। 5 मार्च को संपन्न हुए मतदान के बाद 6 मार्च को जारी प्रारंभिक परिणामों में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) ने जबरदस्त प्रदर्शन किया है। बालेन  शाह के नेतृत्व वाली इस युवा-केंद्रित पार्टी ने 275 सदस्यीय प्रतिनिधि सभा में 94 सीटों पर बढ़त बना ली है, जो बहुमत के आंकड़े (137) को पार करने की दिशा में मजबूत संकेत है। नेपाली कांग्रेस (एनसी) और सीपीएन-यूएमएल जैसी पारंपरिक पार्टियां पीछे छूट गई हैं—एनसी को मुश्किल से दोहरी अंकों तक पहुंचने की उम्मीद है, जबकि केपी शर्मा ओली की यूएमएल को भारी नुकसान हुआ है। यह जीत 2025 के जेन-जेड प्रदर्शनों की विरासत है, जिन्होंने भ्रष्टाचार-विरोधी लहर को जन्म दिया और पुरानी सत्ता को उखाड़ फेंका।</p>
<p>लेकिन सवाल यह है कि क्या यह नया दौर नेपाल को स्थिरता और समृद्धि की ओर ले जाएगा? और बालेन शाह की भारत-नीति, जो विवादास्पद रही है, हमारे द्विपक्षीय संबंधों पर क्या छाया डालेगी?</p>
<h5><span style="color: #0000ff;"><strong>नेपाल के लिए क्या हैं मायने ?</strong></span></h5>
<p>पहले तो समझें कि ये नतीजे नेपाल के लिए क्या मायने रखते हैं। नेपाल की राजनीति लंबे समय से अस्थिरता का शिकार रही है—2015 के संविधान के बाद से सात प्रधानमंत्री बदले, और आर्थिक संकट ने युवाओं को देश से बाहर धकेल दिया। 2025 के प्रदर्शनों में 77 मौतें हुईं, लेकिन उन्होंने एक नई पीढ़ी को जन्म दिया, जो भ्रष्टाचार, nepotism और विदेशी हस्तक्षेप से तंग आ चुकी थी। आरएसपी का उदय इसी असंतोष का प्रतीक है। पार्टी ने 165 प्रत्यक्ष सीटों में से 60 से अधिक पर बढ़त बनाई है, जबकि अनुपातिक प्रतिनिधित्व (पीआर) में भी 35-40 सीटें उनके पक्ष में हैं। बालेन  शाह, जो काठमांडू के मेयर के रूप में पहले ही लोकप्रिय हो चुके हैं, अब प्रधानमंत्री पद के प्रबल दावेदार हैं। एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, आरएसपी की लैंडस्लाइड जीत युवा मतदाताओं (10 लाख नए वोटरों) की 80% भागीदारी से संभव हुई, जो एंटी-इनकंबेंसी वेव का परिणाम है।</p>
<p>भावी परिदृश्य की बात करें तो नेपाल एक &#8216;युवा क्रांति&#8217; के दौर में प्रवेश कर रहा है। बालेन  शाह की सरकार यदि बनी, तो प्राथमिकताएं स्पष्ट हैं: भ्रष्टाचार-रोधी सुधार, रोजगार सृजन और इंफ्रास्ट्रक्चर। आरएसपी का मेनिफेस्टो &#8216;नागरिक करारपत्र&#8217; में हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स, सड़क नेटवर्क विस्तार और पर्यावरण संरक्षण पर जोर है। अर्थव्यवस्था, जो कोविड के बाद 4% ग्रोथ पर अटकी है, को 7-9% तक ले जाने का वादा है। लेकिन चुनौतियां कम नहीं। उन्हें गठबंधन की जरूरत पड़ेगी तो नेपाली कांग्रेस या मधेशी पार्टियों से समर्थन लेना पड़ सकता है, जो स्थिरता को प्रभावित करेगा। यदि आरएसपी अकेले बहुमत हासिल कर लेती है, तो नेपाल पहली बार एक &#8216;नॉन-डाइनास्टी&#8217; सरकार देखेगा, जो लंबे समय तक टिक सकती है। बीबीसी के अनुसार, यह चुनाव &#8216;ओल्ड गार्ड&#8217; का अंतिम परीक्षण था, और युवा नेतृत्व अब स्थिरता ला सकता है। लेकिन यदि आंतरिक कलह हुआ, तो 2027 तक नई अस्थिरता का खतरा है। कुल मिलाकर, नेपाल का भविष्य आशावादी है—युवा ऊर्जा से समृद्धि की राह, लेकिन शासन अनुभव की कमी से जोखिम भरा।</p>
<h5><span style="color: #0000ff;"><strong>भारत के लिए क्या मायने है ?</strong></span></h5>
<p>अब आते हैं बालेन  शाह की भारत-नीति पर, जो नेपाल के परिदृश्य को सबसे ज्यादा प्रभावित करेगी। बालेन  शाह की छवि एक राष्ट्रवादी नेता की है, जो नेपाल की &#8216;स्वतंत्रता&#8217; पर जोर देते हैं। काठमांडू मेयर रहते उन्होंने कई कदम उठाए जो भारत-विरोधी माने गए। सितंबर 2025 में, उन्होंने हिंदी फिल्मों की रिलीज पर अनौपचारिक बैन लगाया, जिसे &#8216;सांस्कृतिक घुसपैठ&#8217; के खिलाफ बताया। इसके अलावा, &#8216;ग्रेटर नेपाल&#8217; मैप को प्रमोट करने के आरोप लगे, जो नेपाल के पुराने दावों (कुमाऊ -गढ़वाल क्षेत्र) को जिंदा करता है। डब्ल्यूआईओएन की रिपोर्ट में इन्हें &#8216;एंटी-इंडिया&#8217; स्टांस कहा गया, जो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ।</p>
<p>बालेन  शाह ने कर्नाटक के बेलगाम में इंजीनियरिंग की पढ़ाई की, लेकिन उनकी नीति &#8216;नेपाल फर्स्ट&#8217; है—भारतीय निवेश को सीमित करने और चीन से बैलेंस करने पर जोर। 2025 के प्रदर्शनों में, उन्होंने ओली सरकार को &#8216;भारतीय प्रभाव&#8217; का दोषी ठहराया, जो सीमा विवाद (लिपुलेख-पास) से जुड़ा था।</p>
<p>हालांकि, यह नीति पूरी तरह एंटी-इंडिया नहीं है; बल्कि प्रैग्मेटिक राष्ट्रवाद है। बालेन  शाह ने कभी खुले तौर पर भारत का विरोध नहीं किया और उनके बैन को स्थानीय कलाकारों के समर्थन में बताया गया। मनीकंट्रोल की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, आरएसपी की जीत भारत के लिए मिश्रित स्थिति है: एक ओर, बालेन  शाह की युवा अपील द्विपक्षीय युवा समबन्ध बढ़ा सकती है; दूसरी ओर, राष्ट्रवादी एजेंडा बॉर्डर ट्रेड (90% व्यापार भारत से) को प्रभावित कर सकता। यदि वह पीएम बने, तो लिपुलेख जैसे मुद्दों पर कड़ा रुख अपनाना पड़ सकता है, जो 2019 के नक्शा विवाद को जिंदा कर देगा। लेकिन आर्थिक निर्भरता (भारतीय सहायता 1 बिलियन डॉलर सालाना) उन्हें संयम बरतने पर मजबूर करेगी।</p>
<p>इन प्रभावों का विश्लेषण करें तो भारत-नेपाल संबंधों पर गहरा असर पड़ेगा। सकारात्मक पक्ष यह है कि बालेन  शाह की सरकार पर्यटन और हाइड्रोपावर में भारतीय निवेश को आमंत्रित कर सकती है—आरएसपी का मेनिफेस्टो &#8216;मेगा इंफ्रा&#8217; पर फोकस करता है, जहां भारत पार्टनर हो सकता है। 2025 के प्रदर्शनों के बाद, अंतरिम पीएम सुशीला कार्की ने भारत से सहयोग मांगा था; बालेन  शाह इसे जारी रख सकते हैं।</p>
<p>नकारात्मक पक्ष यह है कि &#8216;ग्रेटर नेपाल&#8217; नरेटिव यदि मजबूत हुआ, तो सीमा तनाव बढ़ेगा। भारत को अब &#8216;नेबरहुड फर्स्ट&#8217; पॉलिसी को रिफ्रेश करना होगा—युवा डिप्लोमेसी, कल्चरल एक्सचेंज और आर्थिक एड से। यदि बालेन  शाह प्रो-इंडिया टर्न लेते हैं, तो संबंध मजबूत होंगे; अन्यथा, नेपाल &#8216;बफर स्टेट&#8217; की बजाय &#8216;कंपीटिटिव बैलेंस&#8217; का मैदान बनेगा।</p>
<p>कुल मिलाकर, नेपाल का भावी परिदृश्य एक दोधारी तलवार है। आरएसपी की जीत लोकतंत्र की जीत है—युवा शक्ति ने सत्ता को हिला दिया, और यदि बालेन  शाह स्थिर सरकार बनाते हैं, तो नेपाल आर्थिक उछाल देख सकता है। लेकिन भारत के संदर्भ में, उनकी नीति चुनौतीपूर्ण रहेगी।</p>
<p>दक्षिण एशिया में शांति तभी संभव है जब पड़ोसी एक-दूसरे की आकांक्षाओं को समझें। बालेन  शाह का दौर नेपाल को नए बदलाव की और ले जा सकता है, लेकिन भारत को स्मार्ट डिप्लोमेसी से इसका लाभ उठाना होगा।</p>
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		<title>क्या ईरान युद्ध के बाद Benjamin Netanyahu जाएंगे जेल?</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/will-benjamin-netanyahu-go-to-jail-after-the-iran-war/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Syed Mohammad Abbas]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 06 Mar 2026 12:33:09 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Main Slider]]></category>
		<category><![CDATA[जुबिली वर्ल्ड]]></category>
		<category><![CDATA[ब्रेकिंग न्यूज़]]></category>
		<category><![CDATA[#DonaldTrump #BenjaminNetanyahu #IsaacHerzog #IsraelPolitics #IranIsraelWar #TrumpStatement #NetanyahuCase #MiddleEastCrisis #IsraelNews #GlobalPolitics]]></category>
		<category><![CDATA[Benjamin Netanyahu]]></category>
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					<description><![CDATA[जुबिली स्पेशल डेस्क अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने इजराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu को लेकर बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने कहा कि इजराइल के राष्ट्रपति Isaac Herzog को नेतन्याहू को तुरंत माफी दे देनी चाहिए, ताकि वह पूरी तरह ईरान के खिलाफ चल रही जंग पर ध्यान केंद्रित कर सकें। ट्रंप ने &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p data-start="0" data-end="107"><span style="color: #0000ff;"><strong>जुबिली स्पेशल डेस्क </strong></span></p>
<p data-start="109" data-end="627">अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Donald Trump</span></span> ने इजराइल के प्रधानमंत्री <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Benjamin Netanyahu</span></span> को लेकर बड़ा बयान दिया है।</p>
<p data-start="109" data-end="627">ट्रंप ने कहा कि इजराइल के राष्ट्रपति <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Isaac Herzog</span></span> को नेतन्याहू को तुरंत माफी दे देनी चाहिए, ताकि वह पूरी तरह ईरान के खिलाफ चल रही जंग पर ध्यान केंद्रित कर सकें।</p>
<p data-start="109" data-end="627">ट्रंप ने यह बात अमेरिकी मीडिया Axios को दिए एक फोन इंटरव्यू में कही। उन्होंने बताया कि वह लगभग हर दिन नेतन्याहू से बातचीत करते हैं और युद्ध की स्थिति पर चर्चा करते रहते हैं।</p>
<p data-start="629" data-end="773">ट्रंप का कहना है कि नेतन्याहू के दिमाग में सिर्फ ईरान के खिलाफ चल रही लड़ाई होनी चाहिए और अदालत में चल रहे मामलों का कोई दबाव नहीं होना चाहिए।</p>
<p data-start="775" data-end="1200">दरअसल, नेतन्याहू पर साल 2020 से भ्रष्टाचार के कई मामलों में मुकदमा चल रहा है। उन पर आरोप है कि उन्होंने कुछ अरबपतियों से महंगे तोहफे लिए थे।</p>
<p data-start="775" data-end="1200">इन तोहफों में सिगार, शैंपेन, ज्वेलरी और दूसरी कीमती चीजें शामिल थीं। आरोप है कि बदले में उन्होंने उन लोगों को राजनीतिक फायदा पहुंचाया।</p>
<p data-start="775" data-end="1200">ट्रंप ने इन आरोपों को राजनीतिक साजिश करार दिया है। उनका कहना है कि किसी प्रधानमंत्री पर वाइन और सिगार जैसे मामलों को लेकर मुकदमा चलाना सही नहीं है।</p>
<p data-start="1202" data-end="1684"><span style="color: #800000;"><strong data-start="1202" data-end="1249">ट्रंप ने पांच बार माफी की अपील का दावा किया</strong></span></p>
<p data-start="1202" data-end="1684">ट्रंप ने यह भी दावा किया कि पिछले एक साल में राष्ट्रपति हर्जोग ने उनसे पांच बार कहा था कि वे नेतन्याहू को माफी दे देंगे, लेकिन अब तक ऐसा नहीं हुआ।</p>
<blockquote>
<p data-start="1202" data-end="1684"><strong> ट्रंप के मुताबिक हर्जोग इस मुद्दे का इस्तेमाल नेतन्याहू पर दबाव बनाने के लिए कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जल्द माफी नहीं दी गई तो वह इस मामले को सार्वजनिक रूप से उठाते रहेंगे। ट्रंप ने यह भी कहा कि जब तक नेतन्याहू को माफी नहीं मिलती, तब तक वह हर्जोग से मुलाकात नहीं करेंगे।</strong></p>
</blockquote>
<p data-start="1686" data-end="1926">हालांकि, इजराइल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने ट्रंप के इस दावे को खारिज कर दिया है। अधिकारी का कहना है कि राष्ट्रपति हर्जोग ने कभी माफी देने का वादा नहीं किया था। उन्होंने सिर्फ इतना कहा था कि वह कानूनी प्रक्रिया के तहत इस अपील पर विचार करेंगे।</p>
<p data-start="1928" data-end="2235"><span style="color: #800000;"><strong data-start="1928" data-end="1959">राष्ट्रपति कार्यालय का बयान</strong></span></p>
<p data-start="1928" data-end="2235">राष्ट्रपति हर्जोग के कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि इजराइल एक संप्रभु देश है और यहां सभी फैसले कानून के मुताबिक ही लिए जाते हैं। लीगल एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर इस समय माफी दी जाती है तो इसे विदेशी राजनीतिक दबाव मानकर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है।</p>
<p data-start="2237" data-end="2633" data-is-last-node="" data-is-only-node="">फिलहाल युद्ध की स्थिति के कारण अदालतों का काम सीमित कर दिया गया है और नेतन्याहू का ट्रायल अस्थायी रूप से रुका हुआ है। इजराइली कानून के मुताबिक माफी पाने के लिए आरोपी को अपनी गलती स्वीकार करनी होती है और पछतावा भी जताना पड़ता है, लेकिन नेतन्याहू अब तक किसी भी गलती को मानने से इनकार करते रहे हैं। उनके वकील भी कई बार सुनवाई टालने की कोशिश कर चुके हैं, इसलिए यह मामला अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।</p>
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