ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच UAE का बड़ा कदम: OPEC से तोड़ा नाता

पश्चिम एशिया की राजनीति और वैश्विक तेल बाजार में उस वक्त हड़कंप मच गया जब संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने तेल निर्यातक देशों के शक्तिशाली समूह OPEC और OPEC+ से बाहर निकलने का औपचारिक ऐलान कर दिया। खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) में जारी अंदरूनी कलह और ईरान के साथ बढ़ते क्षेत्रीय तनाव के बीच यूएई का यह फैसला सऊदी अरब के नेतृत्व वाले इस ब्लॉक के लिए एक बड़ा रणनीतिक झटका माना जा रहा है।

यूएई का पक्ष: “राष्ट्रीय हित सर्वोपरि”

यूएई के ऊर्जा मंत्री ने स्पष्ट किया है कि यह निर्णय पूरी तरह स्वतंत्र है। उन्होंने कहा:

  • यह फैसला सऊदी अरब या किसी अन्य देश से परामर्श किए बिना लिया गया है।
  • यूएई अपनी उत्पादन नीति और भविष्य की क्षमताओं की समीक्षा के बाद खुद निर्णय लेने में सक्षम है।
  • इस कदम का मुख्य उद्देश्य यूएई के राष्ट्रीय हितों को सुरक्षित करना और बाजार की तात्कालिक मांग को पूरा करना है।

सऊदी अरब और ओपेक पर प्रभाव

OPEC के सबसे पुराने और सक्रिय सदस्यों में से एक होने के नाते, यूएई के जाने से इस समूह की ‘एकजुटता’ की छवि धूमिल हुई है।

  1. समूह की कमजोरी: ओपेक और ओपेक+ (जिसमें रूस भी शामिल है) अब उत्पादन कोटा तय करने में पहले जैसा दबदबा खो सकते हैं।
  2. सऊदी अरब को झटका: ओपेक के वास्तविक नेता सऊदी अरब के लिए यह एक बड़ी कूटनीतिक हार है, क्योंकि यूएई जैसे प्रमुख उत्पादक के बिना तेल की कीमतों पर नियंत्रण करना मुश्किल होगा।
  3. होर्मुज जलडमरूमध्य का संकट: ईरान की धमकियों और तेल जहाजों पर हमलों के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होने वाला निर्यात पहले ही संकट में है। ऐसे में ओपेक के भीतर की यह फूट संगठन को और अधिक अस्थिर कर सकती है।

डोनाल्ड ट्रंप के लिए “बड़ी जीत”

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए यूएई का यह फैसला किसी वरदान से कम नहीं है।

  • ट्रंप लंबे समय से ओपेक पर तेल की कीमतें बढ़ाकर वैश्विक अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुँचाने का आरोप लगाते रहे हैं।
  • वे इस समूह के प्रभुत्व (विशेषकर रूस और सऊदी अरब की जुगलबंदी) को कम करना चाहते थे। यूएई का अलग होना ट्रंप की ऊर्जा नीति और उनके भू-राजनीतिक प्रभाव को मजबूती प्रदान करता है।

क्या है ओपेक और ओपेक प्लस?

संगठनस्थापना/सदस्यप्रमुख देश
OPEC1960 में स्थापितसऊदी अरब, इराक, ईरान, कुवैत, वेनेजुएला, लीबिया, नाइजीरिया, इंडोनेशिया।
OPEC+ओपेक + 10 सहयोगीरूस, कजाकिस्तान, मेक्सिको, ओमान, मलेशिया, अजरबैजान, बहरीन आदि।

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