Trump का बड़ा दावा: ‘चीन ने अमेरिकी चुनावी डेटा में लगाई सेंध’

वॉशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि चीन ने अमेरिकी चुनावी डेटा में बड़ी सेंध लगाई और करोड़ों मतदाताओं की जानकारी गैर-कानूनी तरीके से हासिल की। ट्रंप ने कहा कि वर्षों तक अमेरिकी जनता से चुनावी इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा को लेकर सच्चाई छिपाई गई।
ट्रंप बोले- चुनावी सिस्टम हमलों के लिए बेहद कमजोर
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी नागरिकों से लंबे समय तक यह कहा जाता रहा कि देश का चुनावी ढांचा पूरी तरह सुरक्षित है, जबकि वास्तविकता इससे अलग थी।
उन्होंने कहा, “सालों तक अमेरिकियों से चुनावी इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा के बारे में खुलेआम झूठ बोला गया। इसमें इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनें और वोटों की गिनती करने वाले सिस्टम भी शामिल हैं।”
गोपनीय रिपोर्ट जारी करने का दावा
ट्रंप ने कहा कि उनकी सरकार पहले गोपनीय रखी गई अमेरिकी खुफिया समुदाय (US Intelligence Community) की आकलन रिपोर्ट और अन्य दस्तावेज़ सार्वजनिक कर रही है।
उनके अनुसार, इन रिपोर्टों से पता चलता है कि चुनावी मशीनें और संबंधित सिस्टम लंबे समय से साइबर हमलों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील रहे हैं।
रूस, चीन, ईरान और उत्तर कोरिया का भी जिक्र
रिपोर्ट का हवाला देते हुए ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का आकलन है कि रूस, चीन, ईरान और उत्तर कोरिया समेत कई विदेशी देश और गैर-सरकारी समूह अमेरिका के चुनावी इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचाने की क्षमता रखते हैं।
व्हाइट हाउस का दावा- 22 करोड़ वोटरों का डेटा हासिल किया गया
व्हाइट हाउस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए दावा किया कि जारी किए गए दस्तावेज़ों से पता चलता है कि 2020 के चुनाव से शुरू होकर कई वर्षों के दौरान चीन ने चुनावी डेटा में अब तक की सबसे बड़ी सेंध लगाई।
पोस्ट के मुताबिक, इस कथित साइबर घुसपैठ के जरिए करीब 22 करोड़ (220 मिलियन) अमेरिकी मतदाताओं की जानकारी गैर-कानूनी तरीके से हासिल की गई।
हालांकि, इन दावों पर चीन की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है और स्वतंत्र रूप से इन आरोपों की पुष्टि भी नहीं हुई है।



