Thursday - 29 September 2022 - 9:20 AM

अल्पसंख्यकों को असम सरकार क्यों देने जा रही है प्रमाणपत्र

जुबिली न्यूज डेस्क

असम सरकार अल्पसंख्यकों को प्रमाणपत्र देने की तैयारी में है। रविवार को असम सरकार ने अपनी कैबिनेट बैठक में प्रदेश के छह धार्मिक अल्पसंख्यकों को प्रमाणपत्र जारी करने का फैसला किया।

इस तरह का प्रमाणपत्र देने वाला असम देश का पहला राज्य होगा। ये जानकारी देते हुए स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री केशब महंत ने कहा, मंत्रिमंडल ने मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन और पारसी समुदाय के लोगों को अल्पसंख्यक प्रमाण-पत्र जारी करने का फैसला किया है।

सांकेतिक तस्वीर .

उन्होंने कहा कि इसकी प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जा रहा है। उनका कहना था कि यह इस तरह के प्रमाणपत्र जारी करने का पहला मौका है। इससे पहचान में मदद मिलेगी।

अल्पसंख्यकों को सरकारी लाभ

स्वास्थ्य मंत्री महंत ने आगे कहा, “अल्पसंख्यकों के लिए हमारे पास कई योजनाएं हैं। उनके लिए एक अलग विभाग भी है, लेकिन अल्पसंख्यकों की पहचान का कोई ठोस तरीका नहीं है। ऐसे तबके के लोगों तक सरकारी योजनाओं के लाभ पहुंचाने के लिए उनकी पहचान जरूरी है। असम अल्पसंख्यक विकास बोर्ड ने ही ऐसे प्रमाणपत्र जारी करने का अनुरोध किया था।”

हेमंत सरकार के इस फैसले का अल्पसंख्यक विकास बोर्ड के अध्यक्ष हबीब मोहम्मद चौधरी ने सराहना की है। उन्होंने कहा कि इससे असम के अल्पसंख्यकों को सरकारी योजनाओं का लाभ हासिल करने में काफी सहूलियत मिलेगी। हम लंब समय से ऐसे प्रमाणपत्र की मांग कर रहे थे।

चौधरी ने यह भी कहा कि प्रमाणपत्र न होने की वजह से परीक्षा या स्कॉलरशिप के मामले में काफी दिक्कत होती है। पहचान साबित न कर पाने के कारण छात्रों को विभिन्न कल्याण योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता।

उन्होंने कहा कि कई बार बोर्ड ऐसे प्रमाणपत्र जारी करता रहा है, लेकिन अक्सर उनको स्वीकार नहीं किया जाता।

 

कितने अल्पसंख्यक हैं असम में

2011 की जनगणना के मुताबिक, असम में हिंदुओं की तादाद कुल आबादी (3.09 करोड़) का 61.47 फीसदी है। उसके बाद 34.22 % की आबादी के साथ मुस्लिम दूसरे नंबर पर है। तीसरे पायदान पर रहे ईसाइयों की तादाद 3.74 %  है, जबकि बौद्ध, सिख और जैन समुदाय की आबादी 1 % से भी कम हैं।

वहीं हेमंत सरकार के इस फैसेले पर विपक्षी राजनीतिक दलों और अल्पसंख्यक संगठनों ने नाराजगी जताई है। सभी को सरकार की मंशा पर संदेह है। उनका कहना है कि संविधान में यह बात शीशे की तरह साफ है कि देश में किन तबकों को अल्पसंख्यक का दर्जा मिलेगा। असम में सत्तारूढ़ भाजपा के इस फैसले के पीछे उसका कोई राजनीतिक एजेंडा हो सकता है।

इस मामले को लेकर असम के प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेन बोरा ने कहा, ” भाजपा पहले से ही देश को बांटने के एजेंडे पर चल रही है। ताजा फैसले से उसके एजेंडे को और मजबूती मिलेगी। इससे विभिन्न अल्पसंख्यक तबकों के बीच दरार बढ़ेगी और समाज में विभाजन के बीजेपी के मंसूबे को कामयाबी मिलेगी।”

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