कर्नाटक में ‘ढाई-ढाई साल’ के फॉर्मूले पर सस्पेंस गहराया! सिद्धारमैया के इस्तीफे की अटकलों के बीच दिल्ली में ‘हाई-वोल्टेज’ ड्रामा

जुबिली स्पेशल डेस्क
दिल्ली/बेंगलुरु: कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के तीन साल पूरे होते ही बेंगलुरु से लेकर नई दिल्ली तक राजनीतिक पारा चरम पर पहुंच गया है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के इस्तीफे और उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार की संभावित ताजपोशी को लेकर कयासों का बाजार गर्म है। सूत्रों के हवाले से खबर है कि कांग्रेस हाईकमान ने सिद्धारमैया को पद छोड़ने का इशारा कर दिया है, जिसके बाद दिल्ली में बैठकों का दौर तेज हो गया है।
हालांकि, कांग्रेस आलाकमान सार्वजनिक तौर पर इन खबरों को सिर्फ ‘अटकलें’ बताकर खारिज कर रहा है, लेकिन राहुल गांधी की मुख्यमंत्री के साथ बंद कमरे में हुई अलग से मुलाकात ने इन चर्चाओं को हवा दे दी है।
राहुल गांधी की सीक्रेट मीटिंग और डीके कैंप का दावा
पार्टी के भीतर चल रही अंदरूनी जंग अब खुलकर सामने आने लगी है। डी.के. शिवकुमार के करीबी गुट का दावा है कि हाईकमान ने नेतृत्व परिवर्तन का मन बना लिया है और सिद्धारमैया से कुर्सी खाली करने को कहा गया है।
- सिद्धारमैया का रुख: सूत्रों के मुताबिक, सीएम सिद्धारमैया ने अपनी स्थिति मजबूत करने और सम्मानजनक विदाई के लिए कुछ समय मांगा है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि वे तय समय से पहले भी बड़ा फैसला ले सकते हैं।
- दिल्ली में मंथन: कांग्रेस मुख्यालय ‘इंदिरा भवन’ में हुई इस हाई-लेवल मीटिंग में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी, संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल और प्रदेश प्रभारी रणदीप सुरजेवाला मौजूद रहे।
क्या सिद्धारमैया जाएंगे राज्यसभा? दिल्ली में नया फॉर्मूला!
समाचार एजेंसी के सूत्रों के मुताबिक, कर्नाटक संकट को सुलझाने के लिए कांग्रेस हाईकमान एक नए ‘विन-विन फॉर्मूले’ पर विचार कर रहा है। इसके तहत मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को दिल्ली बुलाकर राज्यसभा भेजा जा सकता है और कर्नाटक की कमान ‘संकटमोचक’ डी.के. शिवकुमार को सौंपी जा सकती है।
फिलहाल कर्नाटक में राज्यसभा की चार सीटें खाली हो रही हैं, जिनमें से तीन पर कांग्रेस की जीत तय है। खुद मल्लिकार्जुन खरगे का कार्यकाल भी समाप्त हो रहा है और उनका दोबारा चुना जाना लगभग तय माना जा रहा है।
कांग्रेस की आधिकारिक सफाई: ‘यह सिर्फ कयासबाजी’ विवाद बढ़ता देख संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने मोर्चा संभाला। उन्होंने मीडिया से कहा, “नेतृत्व परिवर्तन को लेकर चल रही सभी खबरें पूरी तरह निराधार हैं। बैठक का एकमात्र एजेंडा आगामी राज्यसभा और विधान परिषद चुनाव के उम्मीदवारों पर चर्चा करना था।”
‘पावर टसल’ की असल वजह: 20 मई की वो डेडलाइन
कर्नाटक में इस राजनीतिक भूचाल की पटकथा दरअसल 20 मई को ही लिख दी गई थी, जब सिद्धारमैया सरकार ने अपने कार्यकाल के तीन साल पूरे किए। 2023 के विधानसभा चुनाव में बंपर जीत के बाद से ही डीके शिवकुमार कैंप ‘ढाई-ढाई साल’ (Power Sharing Formula) के कथित वादे को लागू करने का इंतजार कर रहा था।
- सिद्धारमैया का पलटवार: मुख्यमंत्री ने एक बार फिर दोहराया है कि वे अपना पूरे 5 साल का कार्यकाल पूरा करेंगे और उनके हटने का कोई सवाल ही नहीं उठता।
- डीके शिवकुमार का सधा हुआ दांव: डीके शिवकुमार बेहद फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं। उन्होंने कहा है कि, “मैं एक अनुशासित सिपाही हूं और पार्टी नेतृत्व जो भी फैसला करेगा, मुझे मंजूर होगा।”
आगे क्या? कर्नाटक कांग्रेस का यह अंतर्विरोध अब उस मोड़ पर पहुंच गया है जहां आलाकमान के लिए दोनों दिग्गजों को एक साथ साधे रखना बड़ी चुनौती बन गया है। आने वाले कुछ दिन कर्नाटक की सियासत के लिए बेहद निर्णायक होने वाले हैं।



