करूर हादसे पर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी, मुख्यमंत्री विजय…

ई दिल्ली। तमिलनाडु के करूर रैली हादसे में 41 लोगों की मौत से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने DMK की याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने कहा कि वह किसी भी मुख्यमंत्री की गतिविधियों को नियंत्रित या तय नहीं करेगी। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि राजनीतिक विवादों के समाधान के लिए न्यायालय का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।

सुनवाई के दौरान न्यायाधीशों ने DMK की ओर से पेश वकील से कहा कि यदि सत्तारूढ़ तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) के नेता इस मामले पर बयान दे रहे हैं, तो विपक्ष भी राजनीतिक रूप से उसका जवाब दे सकता है। ऐसी लड़ाई अदालत के बाहर लड़ी जानी चाहिए।

DMK ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि पिछले वर्ष TVK की रैली में हुए हादसे की जांच को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। पार्टी ने मुख्यमंत्री विजय के करूर दौरे पर भी आपत्ति जताई थी।

मुख्यमंत्री विजय करूर जाकर हादसे में जान गंवाने वाले 41 लोगों के परिजनों से मिलने वाले हैं। इस दौरान वे प्रत्येक पीड़ित परिवार को 10-10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता और सरकारी नौकरी देने की घोषणा करेंगे।

सितंबर 2025 में करूर में आयोजित TVK की एक रैली के दौरान भगदड़ मच गई थी, जिसमें 41 लोगों की मौत हो गई थी और कई अन्य घायल हुए थे।

शुरुआत में मामले की जांच विशेष जांच दल (SIT) को सौंपी गई थी, लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट ने जांच राज्य पुलिस से लेकर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंप दी। मामले की जांच की निगरानी के लिए अदालत की ओर से एक समिति भी गठित की गई है।

करूर हादसे की जांच फिलहाल CBI कर रही है और पूरी प्रक्रिया न्यायालय की निगरानी में चल रही है। सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद मुख्यमंत्री विजय के पीड़ित परिवारों से मिलने और राहत की घोषणा करने पर कोई न्यायिक रोक नहीं रहेगी।

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