Friday - 25 September 2020 - 8:10 AM

राम मंदिर: जिंदगी के झरोखे से

चन्‍द्र प्रकाश राय

1990 – 25 सितम्बर को गुजरात के सोमनाथ से अडवाणी जी ने रथयात्रा शुरू कर दिया था ।अडवाणी जी देश के लोकतंत्र की एक राष्ट्रीय पार्टी के दो बड़े नेताओ मे से एक और उसके अध्यक्ष थे जिसकी जिम्मेदारी देश के भविष्य के लिए लड़ने और शैडो गवर्नमेंट बना कर वैकल्पिक विकास का एजेंडा शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि  इत्यादि होना चाहिये था वो इन मुद्दो के लिए नही बल्की मंदिर बनाने के लिए माहौल बनाने निकला था। उनको 30 अक्तूबर को अयोध्या पहुंंचना था पर 23अक्तूबर को उनको लालू यादव ने समस्तीपुर मे गिरफ्तार कर लिया और फिर उनका रथ वहींं थाने में ही सड़ गया किसी को उसकी याद नही आई ।

काश अडवाणी जी देश की समस्याओंं के लिए रथ लेकर निकले होते गरीबी और बेरोजगारी के खिलाफ निकले होते , गांव की बदहाली के खिलाफ निकले होते, अशिक्षा और अभाव मे मौत के खिलाफ निकले होते तो शायद हम जैसे लोग भी साथ हो लेते पर।

कहानी के विस्तार मे नही जाकर मुद्दे पर आता हूँ, जिसके लिए आज लिख रहा हूँ।

राम लला हम आयेंगे, मंदिर वही बनायेंगे
बच्चा बच्चा राम का जन्मभूमि के काम

इत्यादि नारे लगवाये जा रहे थे

आरएसएस और भाजपा तथा विश्व हिन्दू परिसद ने कार सेवा का एलान किया। 21अक्तूबर से ही देश भर से ये सब संगठन मिल कर लोगोंं को विभिन्न रस्तो से अयोध्या के 100 किलोमीटर के दायरे मे चारो तरफ लाने लगे। और अन्ततः 30 अक्तूबर और फिर 2 नवम्बर को इस तरह कूच किया जैसे किसी दूसरे देश मे विजय प्राप्त करने जा रहे हो ।

अयोध्या मे पूजा और दर्शन होता था उस समय भी पर विवाद अदालत में था। मैं उस वक्त पार्टी का प्रदेश महामंत्री और प्रवक्ता था हम लोगों ने दो प्रस्ताव किया यह कहते हुये की दर्शन और पूजा सबका अधिकार है पर संविधान और कानून से खिलवाड़ सरकार मे बैठा हुआ और उसकी शपथ लिया कोई भी व्यक्ति नही करने देगा और हम भी नही।

पर हमारे दो प्रस्ताव है —

1. हम मध्यस्थता करने को तैयार है दोनोंं पक्ष साथ बैठ जाये और सहमती से तय कर ले क्या होना चाहिये। सरकार उसी को मानेगी।

2. यदि सहमती नही बनती है तो फिर एक ही तरीका है की अदालत जो तय करे वो माना जाये ।

कोई तीसरे तरीके को संविधान और कानून से चलने वाले देश मे किसी भी हालत मे नही स्वीकार किया जा सकता है और न किसी हालत मे स्वीकार किया जायेगा। तब इन लोगों ने जवाब दिया था, जो आज पूरे देश को जानना चाहिये कि”यह अदालत और कानून नही बल्की हमारी आस्था का सवाल है और इसे हम खुद हल करेंगे। “

बड़े नेताओ ने ऑफ द रिकार्ड यह कहा था की सिर्फ साफ सफाई करेंगे और घोषणा हो चुकी है तो दर्शन कर लौट जायेंगे। लाखों की भीड़ खेतोंं मे होकर अयोध्या पहुंंची और रोकने पर पुलिस तथा प्रशसनिक अधिकारियो पर हमलावर हो गई। अधिकारियो ने बहुत समझाने का प्रयास किया की शांति से दर्शन करे और वापस चले जाये पर भीड उग्र हो गई जिसके लिए पीछे से सिखा पढा कर लाया गया था ।

भीड गुम्बद पर चढ़ गई और तोड़फोड़ करने लगी

मजबूरन पुलिस को बल प्रयोग करना पडा और उसमे 16 लोगोंं की जाने गई, जो बहुत अफसोसजनक है। क्योंंकी वो सब इसी देश के नागरिक थे और अपने परिवारोंं के प्रिय थे। किसी भी हालत मे कभी भी अपने ही नागरिको पर पुलिस की लाठी और गोली चले यह लोकतंत्र के बिल्कुल खिलाफ है और जिम्मेदार राज्य की अवधारणा के भी खिलाफ है । मरने वाले अधिकतर पिछड़े वर्गो के जवान थे। ये भी सच है की उन मृतकोंं के परिवारो का इन संगठनो और इनकी सरकारोंं ने फिर कभी हालचाल भी नही पूछा।

आरएसएस के झूठ तंत्र ने फैला दिया की हजारोंं जाने चली गई और सरयू का पानी लाल हो गया और एक खून खौला देने वाला वीडियो भी बना दिया इन लोगोंं ने 24 घंंटे में और देश भर मे बांट भी दिया जैसे अन्ना के आन्दोलन मे मिंनटो मे झंडे और मशाले बंंट जाती थी, बस आप दोनोंं को एक साथ रख कर देखते जाइए।

मैने दिल्ली मे किसी संघी के घर वो वीडियो देखा ,पूरी पिक्चर थी सारे इफेक्ट डाल कर बनायी गई, जिसमे लाशें ही लाशें दिखाई गई, नाली मे खून बहता दिखाया गया, पहले सोमनाथ से लेकर बाबर तक पता नहींं क्या-क्या बताया गया और उसमे एक हेलिकोप्टर उड़ता दिखाया गया था, जिसमे बैठे मुलायम सिह यादव को मशीन गन से लोगोंं पर गोली चलते दिखाया गया था।

हमने चुनौती दिया की आप मृतकोंं के नाम बताओ। ये लोग जो भी नाम बताते हम पूरा सिस्टम लगा कर उनको ढू़ढ़ लाते और मीडिया के सामने पेश कर देते। इनकी सारी लिस्ट और बात फर्जी निकलती गई और अन्त मे वो 16 लोग बचे जो सचमुच मरे थे और उनकी मौत पर हम सबको अफसोस तब भी था और आज भी है।

पर यह भी उल्लेखनीय है की कल्याण सिंह की भाजपायी सरकार में जब सरकारी तौर पर फिर लाखोंं की भीड आई और विवादित ढांचा तोड गया तो उस पर चढे तमाम लोग उसी के नीचे दब गये थे पर सत्ता का नशा और इस विश्व विजय के जोश मे वो बेचारे समचार की सुर्खियांं नही बने।

उसके बाद अयोध्या से ही मार काट लूट शुरू हो गई और यहांं तक की खुद भाजपा का अल्पसंख्यक सेल का अध्यक्ष चीखता ही रह गया की मैं तो आप की पार्टी के इस पद पर हूँ, पर ? (इसका ब्योरा उस दिन के हिन्दू के मौके पर मौजूद रिपोर्टर की रिपोर्ट मे मिल जायेगा।)

कैसे लोग आये थे ये धार्मिक काम करने इसी से समझ लीजिये की रुचिरा गुप्ता इनकी भीड में ही थी तो उसके शरीर से कपडे गायब हो गए और ये देख कर बीबीसी के रिपोर्टर मार्क टूली ने उसे अपना कोट पहनाया और पिटता रहा पर किसी तरह रुचिरा को भीड से निकालने मे कामयाब रहा।

दंगो मे 2000 से ज्यादा जाने गई ,हजारोंं करोड़ की सम्पत्ती नष्ट हुई और उठान लिए हुये विकास का पहिया बैठ गया और सालोंं पीछे चला गया। दंगो मे इन लोगोंं ने क्या किया था। आतंक फैलाने को सर्फ इस बात से जान लीजिये की एक टेप बनाया था जी किसी छत पर अचानक काफी तेज आवाज मे चीखता-बचाओओ ओ ,भागो ओ ओ ,आ गए हजारोंं मुसलमान,अरे मार दिया अरे एक और मार दिया भागो ओ।

और हम लोग जो आगरा के कालेज कैम्प्स मे रहते थे। उसके लोग भी अपने हथियार लेकर निकल आये और छपने की जगह ढूढ़ने लगे,मैने कहा की यहा कहा कोई मुस्लमान है आसपास पर कोई सुनने को तैयार नही था,आगरा का लाजपत कुन्ज और ऐसी तमाम कालोनी जो मुस्लिम इलाको से 8 से 10 किलोमीटर दूर है लोग रात रात भर पहरा देने लगे ,रास्तोंं पर बड़े बड़े पत्थर और पुराने टायर रख दिये इत्यादि। और मुसलमान अपने मुह्ल्लो मे दुबका था की निकले नही की पीएसी आयेगी और फिर सिर्फ गोलियोंं की आवाज होगी ।

दंगो मे क्या क्या हुआ और कौन लोग मरे, किनके साथ क्या-क्या हुआ और क्या-क्या कर्म करते हुये महान लोग जय श्रीराम के नारे लगते थे और राम का नाम कर बडा कर रहे थे और कौन सी संपत्तियाँ नष्ट हुई इत्यादि तमाम आयोग और जांच कमेटी की रिपोर्ट अब सार्वजनिक है और हो सचमुच देश के वफादार और जिम्मेदार लोग है उनको सब पढ़ना चाहिये और सब जानना चाहिये ।

हर दंगे के बाद भाजपा की सीटे बढ़ती गई और इसी बीच विश्वनाथ प्रताप सिंह ने अडवाणी जी के अभियान के मुकाबले मंडल आयोग की रिपोर्ट लागू कर दिया। उनकी सरकार से भाजपा ने समर्थन वापस ले लिया और चंद्रशेखर जी प्रधान मंत्री बन गए।

बीच में ये भी जान लीजिये की विश्वनाथ प्रताप सिंह की सरकार को भाजपा का समर्थन था और भाजपा के प्रिय जगमोहन कश्मीर के राज्यपाल थे जब कश्मीरी पंडीत कश्मीर छोड कर गए ,पर उस वक्त भाजपा ने न उसे मुद्दा बनाया और न कश्मीरी पण्डितोंं के सवाल पर उस सरकार से समर्थन ही वापस लिया।

हांं तो चंद्रशेखर जी के अटल बिहारी वाजपेयी, श्रीमति सिंधिया, भैरोंसिंह शेखावत सहित काफी भाजपा नेताओ से अच्छे सम्बंध थे और उनकी सरकार मे हम लोगोंं के युवा राजनीति के मित्र सुबोधकांत सहाय गृह मंत्री थे।

अन्त मे चंद्रशेखर जी विवाद का एक सर्वसम्मत हाल निकाल ही लिया अपनी दृढ़ता और दूरदर्शिता से जिसपर अंदर सब सहमत थे और वो फौसला करीब ऐसा ही था जो उसके बाद इतनी बर्बादी और दंगो तथा नफरत की खेती के बाद अन्ततः अदालत ने ही दिया।

फिर याद रखिये की हमने कहा था की या तो बातचीत से हल कर लो या अदालत को करने दो और तब आस्था के नाम पर अदालत को मानने से इंकार कर दिया था इस जमात ने और अपनी सरकार बन जाने पर उसी अदालत को माना भी और दिन रात देश से भी कहते रहे की अदालत को सभी माने मिलजुल कर और पूरे देश ने माना मुसलमान ने भी। पूरा देश शान्त रहा पर यदि अदालत का फौसला इसका उल्टा होता तो क्या होता,कल्पना से रूह काँप जाती है ।

प्रधान-मंत्री चंद्रशेखर के निवास से विश्व हिन्दू परिसद वाले यह कह कर निकले की थोडी देर मे आपस मे राय कर के आते है और फिर आये ही नही ।

अब पाठक ध्यान से पढे़ और समझे इस जमात के इरादे की, आदत को, रणनीति को, इच्छा को, इनके हथकण्डे को, देश के प्रति जिम्मेदारी को, देश के भविष्य को लेकर चिंतन को, चिंता को और इनके देश के लिए सपने, सिद्धांत और सक्ल्प को।

(लखनऊ से दिल्ली तक की सत्ता के करीब रह कर, निस्पक्ष रूप से जागृत रह कर जो देखा, जो जाना, जो समझा सब लिख दिया क्योंंकि जो अब 45 साल के है तब स्कूल मे पढ़ रहे होंगे और 1990 मे पैदा लोग अब 30 साल के हुये होंंगे।देश की 65%आबादी 35 साल के नीचे की है इसका मतलब ये है की उनको जो बताया गया होगा शाखा में ता संंघ के प्रचार ने वो उसी को सच मानते है। इसलिए सभी जागरूक और सच्चे देशभक्तो की जिम्मेदारी है की पूरे देश को सच की तस्वीर दिखाए बड़े पैमाने पर और देश को फसीवद की तरफ जाने से बचाए।)

आज इसीलिए मैने एक पोस्ट में लिखा था की देश दो पाटोंं के बीच फंस गया है -एक जो सच है और दूसरा आरएसएस का सच। देखे ईश्वर कैसे बचाता है मेरे देश को।

जो सच्चे हिन्दू है और सचमुच मे राम कृष्ण और शिव को मानते है और चाहते है की समाज इन तीनोंं के नाम पर घृणा और दंगे मे न फंसे बल्की इनके जो गुण और ज्ञान आज को और भविष्य को अच्छा बनाते हो और भारत को तथा भारत वासियोंं को अच्छा बनाते हो उनका प्रसार हो उनकी भी जिम्मेदारी है की देश और समाज को सही धर्म का ज्ञान कराये, स्वामी विवेकानन्द से लेकर गांधी जी और डॉ लोहिया तक के धर्म और इन लोगो के बारे मे लिखे का ज्ञान कराने का अभियान चलाये।

अदालत का फौसला आया, मन्दिर बनेगा, देश में सब उसके पक्ष मे है पर उसे धार्मिक आयोजन ही रखा जाता और उसमे राजनीती नही की जाती तो भारत बनता। लेकिन इन लोगोंं को भारत बनाना ही कब था या है इन्हे तो बस वोट और सरकार बनाना है सब बेच देने के लिए।

(लेख चन्‍द्र प्रकाश राय की फेसबुक वॉल से ली गई है, लेख उनके निजी विचार हैं )

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