नाबालिग से रेप के बाद हत्या पर बंगाल में सियासी घमासान, ममता को ‘हाउस अरेस्ट’ करने का आरोप

कोलकाता: पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के बारुईपुर में एक नाबालिग लड़की के साथ कथित दुष्कर्म के बाद हत्या का मामला सामने आने से राज्य में राजनीतिक और सामाजिक हलचल तेज हो गई है। शुरुआती पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में यौन उत्पीड़न के संकेत मिलने के बाद पुलिस ने मामले में POCSO और दुष्कर्म की धाराएं जोड़ दी हैं। घटना के बाद गुस्साई भीड़ ने हत्या के संदेह में एक युवक की पीट-पीटकर हत्या कर दी, जबकि इलाके में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।

परिजनों के मुताबिक, नाबालिग लड़की शनिवार शाम एक दोस्त के जन्मदिन समारोह में गई थी, लेकिन रात तक घर नहीं लौटी। परिवार ने उसी रात पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, लेकिन आरोप है कि पुलिस ने शुरुआत में मामले को गंभीरता से नहीं लिया।

रविवार को लड़की का शव एक तालाब से बरामद हुआ, जिसके बाद इलाके में तनाव फैल गया।

शुरुआत में पुलिस ने दुष्कर्म का मामला दर्ज नहीं किया था, लेकिन प्रारंभिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद जांच में नया मोड़ आया और पुलिस ने POCSO एक्ट के तहत दुष्कर्म की धाराएं भी जोड़ दीं।

पुलिस ने अब तक दो लोगों को गिरफ्तार किया है, जबकि तीन अन्य को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।

घटना से नाराज स्थानीय लोगों ने हत्या के संदेह में एक युवक को पकड़ लिया और उसकी जमकर पिटाई कर दी। गंभीर रूप से घायल युवक की मौत हो गई।

पुलिस ने इस घटना के संबंध में अलग से मामला दर्ज किया है और भीड़ हिंसा की भी जांच शुरू कर दी है।

बारुईपुर पुलिस ने इस पूरे मामले में चार अलग-अलग एफआईआर दर्ज की हैं। इनमें—

  • नाबालिग से दुष्कर्म (POCSO)
  • हत्या
  • पुलिस पर हमले का मामला
  • आरोपी की भीड़ द्वारा हत्या

की धाराएं शामिल हैं।

मामले की निष्पक्ष जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि यदि पुलिस समय रहते कार्रवाई करती तो शायद लड़की की जान बचाई जा सकती थी।

कुछ लोगों का दावा है कि सीसीटीवी फुटेज के आधार पर उन्होंने खुद संदिग्ध की पहचान कर उसे पकड़कर पुलिस के हवाले किया था।

वहीं, भाजपा नेता शांतनु मंडल पर भी आरोपी को बचाने की कोशिश करने के आरोप लगे हैं। हालांकि उन्होंने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने खुद आरोपी की पहचान कराने में पुलिस की मदद की।

घटना के बाद राजनीति भी गरमा गई है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने दावा किया कि पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पीड़ित परिवार से मिलने बारुईपुर जाना चाहती थीं, लेकिन पुलिस ने उनके आवास के बाहर सुरक्षा बल तैनात कर उन्हें बाहर निकलने से रोक दिया।

टीएमसी नेताओं ने इसे “हाउस अरेस्ट” करार दिया।

वहीं भाजपा ने इस आरोप को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि ममता बनर्जी की सुरक्षा के मद्देनजर यह व्यवस्था की गई थी।

प्रेसीडेंसी रेंज के आईजी कंकर प्रसाद बरुई ने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देश हैं कि इस जघन्य अपराध में शामिल किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा और सभी दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।

बारुईपुर की घटना के बाद एक बार फिर 2024 के चर्चित आरजी कर मेडिकल कॉलेज रेप और मर्डर केस की याद ताजा हो गई है। विपक्ष ने राज्य में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सरकार को घेरा है, जबकि सत्तारूढ़ दल ने दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई का भरोसा दिलाया है।

अब पूरे मामले की जांच SIT के हाथ में है और सभी की नजर इस बात पर है कि जांच कितनी तेजी और निष्पक्षता से आगे बढ़ती है।

Related Articles

Back to top button