अब तवांग में बढ़ रहा भारत-चीन के बीच तनाव

जुबिली न्यूज डेस्क

भारत और चीन के बीच एलएएसी पर चल रहा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक साल से अधिक समय से दोनों देशों के बीच तनाव बना हुआ है।

दोनों देशों के बीच कोर कमांडर स्तर की 13 दौर की बैठक हो चुकी है, बावजूद अभी तक कोई हल नहीं निकल पाया है। अब खबर है कि लद्दाख के बाद पूर्वोत्तर के तवांग में भी भारत और चीन के बीच तनाव बढ़ रहा है।

तवांग में चीन अपनी सेना में बढ़ोतरी कर किसी नापाक हरकत को अंजाम देने की कोशिश में जुटा हुआ है।

समाचार पत्र टेलीग्राफ ने अपने सूत्रों के अनुसार लिखा है कि चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ने अरुणाचल प्रदेश के तवांग में LAC के पास बड़ी संख्या में अपने चौकियों को मजबूत किया है और कई अस्थायी सैन्य शिविर भी लगाए हैं।

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वहीं गृह मंत्रालय से जुड़े एक अधिकारी ने टेलीग्राफ से बातचीत में कहा कि चीनी सेना ने अरुणाचल में एलएसी के पास भारी मात्रा में अपने ढांचे का सुदृढीकरण किया है और कई अस्थायी शिविर लगाए हैं जो चिंता का विषय है।

साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि चीनी सेना ने सीमा के पास कई सारे सैन्य सामनों को लाकर अपने प्रशिक्षण को भी तेज कर दिया है।

अधिकारी ने कहा कि इस घटनाक्रम पर भारतीय सेना अपनी नजर बनाए हुए हैं। चीनी सैनिकों द्वारा गश्ती किए जाने और पूर्वी सेक्टर में अपनी चौकियों को मजबूत किए जाने को देखकर लगता है कि वे भारतीय सीमा में घुसपैठ की योजना बना रहे हैं। जैसा पिछले साल उन्होंने मई के महीने में लद्दाख में किया था।

गौरतलब है कि पिछले साल करीब 5 मई को पूर्वी लद्दाख के गलवान घाटी में सीमा विवाद को लेकर दोनों देशों की सेनाएं आमने सामने आ गई। दोनों देशों के बीच उपजा यह विवाद तब हिंसक हो गया जब गलवान में हुए संघर्ष में करीब 20 भारतीय सैनिकों की मौत हो गई।

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मालूम हो कि भारत चीन के साथ 3,488 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करता है। ये सीमा जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश से होकर गुजरती है।

करीब 1346 किलोमीटर लंबी सीमा अकेले पूर्वी क्षेत्र में पड़ती है जिसमें तवांग में कुल 270 किलोमीटर सीमा है। हालांकि दोनों देशों के बीच सीमा को लेकर पूरी तरह से समझौता नहीं हुआ है और ना ही कोई उचित सीमांकन किया गया है।

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यही कारण है कि चीन आए दिन भारतीय सीमा में घुसपैठ की कोशिश करता है। इतना ही नहीं चीन पूर्वी सेक्टर में अरुणाचल प्रदेश पर भी अपना दावा करता है और कहता है कि ये दक्षिणी तिब्बत का हिस्सा है। चीन तिब्बत और अरुणाचल प्रदेश के बीच की मैकमोहन रेखा को भी नहीं मानता है।

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