अब महुआ मोइत्रा पर हुआ ‘एग अटैक’, कलकत्ता हाईकोर्ट की सख्ती के बीच अधीर रंजन की तीखी नसीहत

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नेताओं को निशाना बनाकर किए जा रहे ‘अंडों के हमलों’ (Egg Attacks) का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस अनोखे और हिंसक विरोध की ताजा शिकार टीएमसी की फायरब्रांड सांसद महुआ मोइत्रा बनी हैं। बुधवार को कोलकाता के एक रेस्टोरेंट में कार्यकर्ताओं के साथ बैठक के दौरान उन पर अचानक अंडे फेंके गए। इस घटना के बाद बंगाल की राजनीति में एक बार फिर उबाल आ गया है और यह मामला सीधे लोकतंत्र की मर्यादा बनाम राजनीतिक दुश्मनी की बहस में तब्दील हो चुका है।

सांसद महुआ मोइत्रा कोलकाता के एक रेस्टोरेंट के भीतर टीएमसी कार्यकर्ताओं के साथ रणनीतिक बैठक कर रही थीं, तभी अराजक तत्वों ने उन्हें निशाना बनाकर अंडे फेंके।

घटना की जानकारी खुद महुआ मोइत्रा ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट ‘X’ पर साझा की। उन्होंने सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) को कटघरे में खड़ा करते हुए आरोप लगाया कि यह शर्मनाक हरकत बीजेपी के गुंडों ने की है। मोइत्रा ने पश्चिम बंगाल पुलिस से इस मामले में तुरंत सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।

पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद से ही टीएमसी नेताओं पर अंडों और टमाटरों से हमले की घटनाएं एक सोची-समझी रणनीति की तरह सामने आ रही हैं। महुआ मोइत्रा से पहले टीएमसी के कई बड़े चेहरे इसका शिकार हो चुके हैं:

  • अभिषेक बनर्जी (महासचिव व सांसद) पर भी सार्वजनिक कार्यक्रमों के दौरान अंडे फेंके जा चुके हैं।
  • कल्याण बनर्जी (सांसद) को भी इसी तरह के तीखे और अपमानजनक विरोध का सामना करना पड़ा है।
  • इनके अलावा राज्य भर में टीएमसी के कई क्षेत्रीय और स्थानीय नेता लगातार इस ‘एग अटैक’ की जद में आ रहे हैं।

राज्य में लगातार बढ़ रहे इस तरह के हमलों पर कलकत्ता हाईकोर्ट ने कड़ा संज्ञान लिया है। हाईकोर्ट ने पुलिस प्रशासन को साफ आदेश दिया है कि टीएमसी नेताओं पर अंडे फेंकने की हर घटना को गंभीरता से लिया जाए और इनके खिलाफ तुरंत आपराधिक मुकदमे दर्ज किए जाएं।

हाईकोर्ट के इस कदम का कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी ने भी खुलकर समर्थन किया है। उन्होंने इस गिरते राजनीतिक स्तर पर चिंता जताते हुए कहा:

महुआ मोइत्रा पर हुआ यह हमला साफ करता है कि बंगाल की धरती पर राजनीतिक रंजिश अब विचारधारा की लड़ाई से आगे बढ़कर व्यक्तिगत हमलों के उस दौर में पहुंच चुकी है, जहां जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा और लोकतंत्र की गरिमा दोनों दांव पर हैं।

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