मुजफ्फरपुर प्रसाद अस्पताल में भीषण आग, 3 मरीजों की मौत, स्टाफ फरार

जुबिली स्पेशल डेस्क
बिहार के मुजफ्फरपुर से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने निजी अस्पतालों में मरीजों की सुरक्षा और आपदा प्रबंधन के दावों की पोल खोलकर रख दी है।
ब्रह्मपुरा थाना क्षेत्र स्थित ‘प्रसाद हॉस्पिटल’ की पांचवीं मंजिल पर बने आईसीयू (ICU) वार्ड में तड़के सुबह करीब 3 बजे शॉर्ट सर्किट से भीषण आग लग गई। इस हादसे में दम घुटने और झुलसने से अब तक 3 मरीजों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से झुलस गए हैं।
यह महज एक हादसा नहीं, बल्कि नियमों को ताक पर रखकर मासूम जिंदगियों से खिलवाड़ का एक कथित मामला नजर आ रहा है। आइए जानते हैं इस घटना से जुड़े 5 बड़े और गंभीर पहलू:
1. क्षमता से अधिक मरीज और बंद था मुख्य गेट
जिलाधिकारी (DM) सुब्रत कुमार सेन की शुरुआती प्रशासनिक जांच में अस्पताल की भारी लापरवाही उजागर हुई है।
- नियमों का उल्लंघन: जिस आईसीयू वार्ड की क्षमता केवल 13 बेड की थी, वहां नियमों को ताक पर रखकर 15 मरीजों को भर्ती किया गया था।
- बंधक बनीं जिंदगियां: पीड़ित परिजनों ने डीएम को बताया कि जब आग लगी, तो आईसीयू का मुख्य गेट बाहर से बंद था। दम घुटने के बावजूद मरीज और उनके तीमारदार समय पर बाहर नहीं निकल सके।
2. मरीजों को मरता छोड़ फरार हुआ स्टाफ
हादसे के बाद जो सबसे शर्मनाक तस्वीर सामने आई, वह अस्पताल प्रशासन की संवेदनहीनता थी।
फायर ऑफिसर आरएन पांडे के मुताबिक: “जब हमारी टीम मौके पर पहुंची, तो स्थिति बेहद भयावह थी। अस्पताल का कोई भी जिम्मेदार कर्मचारी या स्टाफ वहां मौजूद नहीं था। पूरा स्टाफ मरीजों को उनके हाल पर छोड़कर मौके से फरार हो चुका था।”
यहाँ तक कि आग की तीव्रता इतनी अधिक थी कि आईसीयू वार्ड के इंचार्ज भी गंभीर रूप से झुलस गए, जिन्हें नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
3. शोपीस बना रहा फायर सेफ्टी सिस्टम
स्थानीय लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि अस्पताल में करोड़ों के मेडिकल उपकरण तो थे, लेकिन जीवन रक्षक फायर कंट्रोल सिस्टम पूरी तरह से शोपीस बना हुआ था। आपातकाल के समय न तो अलार्म बजा और न ही आग बुझाने वाले उपकरणों का इस्तेमाल किया जा सका।
4. शव छुपाने का आरोप, अपनों की तलाश में भटकते परिजन
हादसे के बाद अस्पताल परिसर में चीख-पुकार मची हुई है। एक पीड़ित परिवार ने रोते हुए बेहद गंभीर आरोप लगाया कि हादसे में उनके पिता की मौत हो चुकी है, लेकिन अस्पताल प्रबंधन अपनी कमियां छुपाने के लिए उन्हें शव तक नहीं सौंप रहा है। घटना के बाद से ही प्रबंधन के कई बड़े अधिकारी और स्टाफ गायब हैं, जिससे परिजनों का गुस्सा सातवें आसमान पर है।
5. रेस्क्यू ऑपरेशन और आगे की कार्रवाई
घटना की सूचना मिलते ही दमकल की आधा दर्जन गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। रेस्क्यू टीम ने सूझबूझ दिखाते हुए करीब 25 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला, जिन्हें तुरंत इलाज के लिए पास के दूसरे अस्पतालों में रेफर किया गया है।
प्रशासन का रुख
मामले की गंभीरता को देखते हुए डीएम सुब्रत कुमार सेन ने उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं। प्रशासन ने दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई करने और अस्पताल का लाइसेंस रद्द करने जैसे कड़े कदम उठाने का भरोसा दिया है।


