AI के दौर में न्याय व्यवस्था पर बड़ा मंथन: Surya Kant की अहम टिप्पणी, Siddaramaiah की बड़ी मांग

कर्नाटक में आयोजित न्यायिक अधिकारियों के 22वें द्विवार्षिक राज्य स्तरीय सम्मेलन में “AI के युग में न्यायपालिका की पुनर्कल्पना” विषय पर व्यापक चर्चा हुई. इस दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश Surya Kant ने न्यायिक व्यवस्था में आत्ममूल्यांकन और समयानुकूल बदलाव की आवश्यकता पर जोर दिया.
उन्होंने कहा कि किसी भी संस्था के विकास में ऐसे मौके आते हैं जब उसे रुककर खुद का आकलन करना होता है. यह कमजोरी नहीं बल्कि जिम्मेदारी का संकेत है. उन्होंने कहा कि न्यायपालिका इस समय एक बड़े परिवर्तनकाल से गुजर रही है, जहां तकनीक, खासकर Artificial Intelligence, न्याय प्रणाली को तेजी से प्रभावित कर रही है.
“AI से घबराने की नहीं, समझदारी से अपनाने की जरूरत”
CJI ने कहा कि जटिल मामलों में न्यायाधीश पहले ही गहराई से सोचकर निर्णय लेते हैं और AI को भी इसी प्रक्रिया को मजबूत करने के एक साधन के रूप में देखा जाना चाहिए. उन्होंने स्पष्ट किया कि AI न्यायिक प्रक्रियाओं को तेज और प्रभावी बना सकता है, लेकिन इसके साथ नैतिकता, गोपनीयता और निष्पक्षता जैसे पहलुओं पर सावधानी जरूरी है.
दक्षिण भारत में सुप्रीम कोर्ट बेंच की मांग
वहीं, कर्नाटक के मुख्यमंत्री Siddaramaiah ने न्याय तक पहुंच को आसान बनाने की जरूरत पर जोर देते हुए दक्षिण भारत में सुप्रीम कोर्ट की एक पीठ स्थापित करने की मांग उठाई. उनका कहना था कि इससे आम लोगों को राहत मिलेगी और न्याय वितरण प्रणाली अधिक सुलभ बन सकेगी.
राष्ट्रीय स्तर पर अहम हैं ऐसे विमर्श
सम्मेलन में यह भी सामने आया कि देशभर में न्यायिक ढांचे की चुनौतियां लगभग समान हैं, इसलिए इस तरह के विमर्श केवल एक राज्य तक सीमित नहीं रहते, बल्कि पूरे देश के लिए दिशा तय करते हैं. CJI ने कर्नाटक को नवाचार और संस्थागत सुधारों में अग्रणी बताते हुए कहा कि यहां के प्रयोग अन्य राज्यों के लिए प्रेरणा बन सकते हैं.
उन्होंने उम्मीद जताई कि इस सम्मेलन से निकले सुझाव भारत की न्यायिक प्रणाली को और मजबूत, पारदर्शी और आधुनिक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे.



