वुहान लैब और कोरोना कनेक्शन पर बड़ा दावा, अमेरिकी वैज्ञानिक की भूमिका पर उठे सवाल

दुनिया भर में करोड़ों लोगों को प्रभावित करने वाली कोविड-19 महामारी की उत्पत्ति को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। अमेरिका की पूर्व राष्ट्रीय खुफिया निदेशक Tulsi Gabbard ने कई दस्तावेज सार्वजनिक करते हुए दावा किया है कि महामारी की शुरुआत और उसकी जांच से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों को वर्षों तक छिपाया गया।

गबार्ड ने आरोप लगाया कि अमेरिका के पूर्व शीर्ष स्वास्थ्य अधिकारी Anthony Fauci ने चीन के Wuhan Institute of Virology से जुड़े शोध को फंडिंग दिलाने में भूमिका निभाई और बाद में कोविड-19 की उत्पत्ति को लेकर खुफिया एजेंसियों के आकलनों को प्रभावित किया।

Office of the Director of National Intelligence (ODNI) द्वारा जारी दस्तावेजों के अनुसार, अमेरिकी सरकार ने वर्षों तक दुनिया के विभिन्न देशों में 120 से अधिक जैविक प्रयोगशालाओं को फंड किया था। गबार्ड का कहना है कि इन दस्तावेजों से यह भी पता चलता है कि कोविड-19 की उत्पत्ति को लेकर चल रही बहस के दौरान कुछ महत्वपूर्ण सूचनाएं सार्वजनिक नहीं की गईं।

गबार्ड का आरोप है कि एंथनी फौसी ने कोविड-19 की शुरुआत से संबंधित चर्चाओं में प्रभावशाली भूमिका निभाई और खुफिया एजेंसियों को सलाह देने वाले विशेषज्ञों के चयन में भी योगदान दिया। उनका दावा है कि बाद में इन्हीं आकलनों को वैज्ञानिक सहमति के रूप में प्रस्तुत किया गया।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि फौसी ने कांग्रेस के समक्ष शपथ के तहत दी गई गवाही में ऐसी चर्चाओं में अपनी भूमिका से इनकार किया था।

कोविड-19 की उत्पत्ति को लेकर लंबे समय से दो प्रमुख सिद्धांत चर्चा में रहे हैं। पहला, वायरस जानवरों से प्राकृतिक रूप से इंसानों में फैला। दूसरा, वायरस किसी प्रयोगशाला से दुर्घटनावश बाहर निकला।

अमेरिकी खुफिया एजेंसियां भी इस मुद्दे पर एकमत नहीं रही हैं। कुछ एजेंसियां प्राकृतिक उत्पत्ति को अधिक संभावित मानती हैं, जबकि कुछ ने लैब-लीक सिद्धांत को संभावित बताया है।

दस्तावेजों में उद्धृत एक पुराने आकलन के अनुसार, चीन के वुहान स्थित प्रयोगशाला में ऐसे हालात मौजूद थे जिनमें किसी वायरस के अनजाने में बाहर निकलने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता था। हालांकि दस्तावेजों में यह भी कहा गया कि प्राकृतिक उत्पत्ति की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया गया था।

गबार्ड द्वारा दस्तावेज जारी किए जाने को Donald Trump प्रशासन के उस प्रयास का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें कोविड-19 की उत्पत्ति और महामारी के दौरान सरकारी एजेंसियों की भूमिका की दोबारा समीक्षा की जा रही है।

हालांकि गबार्ड के आरोपों ने नई बहस छेड़ दी है, लेकिन कोविड-19 की उत्पत्ति को लेकर अब तक कोई सार्वभौमिक और अंतिम वैज्ञानिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है। वैज्ञानिक समुदाय और खुफिया एजेंसियों के बीच इस मुद्दे पर मतभेद बने हुए हैं।

कोविड-19 महामारी ने पूरी दुनिया में करोड़ों लोगों की जिंदगी प्रभावित की और लाखों लोगों की जान ली। ऐसे में महामारी की वास्तविक उत्पत्ति, उससे जुड़े शोध और सरकारी निर्णयों की पारदर्शिता आज भी वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण विषय बने हुए हैं। गबार्ड के ताजा दावों के बाद इस बहस के और तेज होने की संभावना है।

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