झारखंड राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस को झटका, सहयोगी दलों पर फूटा गुस्सा

झारखंड राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा की हार के बाद कांग्रेस प्रभारी के. राजू ने RJD और माले पर वोट नहीं देने का आरोप लगाया। जानिए चुनाव परिणाम और महागठबंधन में बढ़ी खींचतान की पूरी कहानी।

झारखंड में दो राज्यसभा सीटों के लिए हुए चुनाव में कांग्रेस को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। महागठबंधन की ओर से मैदान में उतारे गए कांग्रेस उम्मीदवार Pranav Jha को हार का सामना करना पड़ा। चुनाव परिणाम आने के बाद झारखंड कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी K. Raju ने गठबंधन सहयोगियों पर खुलकर नाराजगी जताई।

उन्होंने आरोप लगाया कि महागठबंधन में शामिल Rashtriya Janata Dal और Communist Party of India (Marxist-Leninist) Liberation ने कांग्रेस उम्मीदवार का समर्थन नहीं किया, जिसके कारण पार्टी को हार का सामना करना पड़ा।

मीडिया से बातचीत में के. राजू ने कहा कि कांग्रेस को अपने ही सहयोगी दलों से विश्वासघात का सामना करना पड़ा। उनका कहना था कि यदि गठबंधन के सभी विधायक एकजुट होकर मतदान करते तो कांग्रेस उम्मीदवार की जीत संभव थी।

उन्होंने कहा कि आरजेडी और माले के विधायकों ने कांग्रेस प्रत्याशी के पक्ष में वोट नहीं किया, जिससे चुनावी गणित बिगड़ गया।

हालांकि कांग्रेस प्रभारी ने Jharkhand Mukti Morcha और मुख्यमंत्री Hemant Soren की सराहना की। के. राजू ने दावा किया कि झामुमो के 34 विधायकों में से 30 ने पार्टी उम्मीदवार Baidyanath Ram को वोट दिया, जबकि चार वोट कांग्रेस उम्मीदवार के पक्ष में पड़े। उन्होंने कहा कि झामुमो ने गठबंधन धर्म निभाया, लेकिन अन्य सहयोगी दलों का रवैया निराशाजनक रहा।

18 जून को झारखंड विधानसभा में सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान हुआ। मतगणना के बाद दो सीटों पर परिणाम घोषित किए गए।

  • Baidyanath Ram (झामुमो) – 30 वोट
  • Parimal Nathwani (एनडीए समर्थित) – 28 वोट
  • Pranav Jha (कांग्रेस) – 20 वोट
  • 3 मत अवैध घोषित किए गए

इन नतीजों के साथ बैद्यनाथ राम और परिमल नाथवानी राज्यसभा के लिए निर्वाचित घोषित किए गए।

चुनाव से पहले महागठबंधन के नेताओं द्वारा लगातार दोनों उम्मीदवारों की जीत का दावा किया जा रहा था। गठबंधन के 56 विधायकों की एकजुटता की बात कही जा रही थी, लेकिन परिणाम आने के बाद यह दावा धराशायी होता दिखाई दिया।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मतदान के दौरान महागठबंधन के भीतर मौजूद मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं।

कांग्रेस उम्मीदवार की हार के बाद झारखंड कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष Rajesh Thakur ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी।

उन्होंने कहा, “जहां विश्वास होता है, वहीं विश्वासघात होता है। यह लोकतंत्र के लिए अच्छा संकेत नहीं है। झारखंड के लिए यह काला दिन है।”

राजेश ठाकुर ने आरोप लगाया कि जिस तरह अन्य राज्यों में विधायकों और सांसदों की खरीद-फरोख्त के आरोप लगते रहे हैं, उसी तरह की स्थिति झारखंड में भी देखने को मिली है। हालांकि उन्होंने किसी दल या व्यक्ति का नाम नहीं लिया।

राज्यसभा चुनाव के नतीजों ने झारखंड की राजनीति में नए सवाल खड़े कर दिए हैं। कांग्रेस द्वारा खुले तौर पर सहयोगी दलों पर आरोप लगाए जाने से महागठबंधन के भीतर तनाव की स्थिति बन सकती है। हालांकि इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन या अन्य सहयोगी दलों की ओर से अभी कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा महागठबंधन की एकजुटता और भविष्य की रणनीति पर असर डाल सकता है।

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