‘जो आलाकमान ने कहा, मैंने वो किया…’ इस्तीफा देकर भावुक हुए सिद्धारमैया

कर्नाटक की राजनीति में पिछले 3 साल से जारी ‘कुर्सी का सस्पेंस’ आखिरकार खत्म हो गया है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है और डीके शिवकुमार का नया सीएम बनना तय है।

दिल्ली में कांग्रेस हाईकमान की सीक्रेट डील के बाद यह बड़ा फैसला हुआ है, लेकिन इस फैसले के तुरंत बाद बेंगलुरु की सड़कों पर भारी बवाल और समर्थकों का गुस्सा फूट पड़ा है।

गुरुवार दोपहर करीब 2:30 बजे कर्नाटक की राजनीति में उस वक्त एक हैरान करने वाला मोड़ आया, जब सीएम सिद्धारमैया इस्तीफा देने बेंगलुरु के लोकभवन (राजभवन) पहुंचे, लेकिन वहां राज्यपाल थावरचंद गहलोत मौजूद ही नहीं थे।

क्या है पेच? राज्यपाल फिलहाल मध्य प्रदेश के दौरे पर हैं और उनके आज देर शाम तक बेंगलुरु लौटने की उम्मीद है। ऐसे में सिद्धारमैया ने राज्यपाल के विशेष सचिव प्रभु शंकर को अपना त्यागपत्र सौंपा। सचिव ने साफ किया है कि इस इस्तीफे पर आधिकारिक मुहर राज्यपाल के लौटने के बाद ही लगेगी।

जैसे ही सिद्धारमैया के इस्तीफे की खबर आम हुई, बेंगलुरु के कई इलाकों में तनाव फैल गया। सिद्धारमैया के नाराज समर्थकों ने पार्टी के फैसले के खिलाफ सड़कों पर उतरकर भारी नारेबाजी और प्रदर्शन शुरू कर दिया है। नए सीएम बनने जा रहे डीके शिवकुमार के सामने सरकार संभालने से पहले इस अंदरूनी बगावत को शांत करने की सबसे बड़ी चुनौती होगी।

राजनीतिक पंडितों का मानना है कि कांग्रेस हाईकमान ने यह बदलाव बहुत सोच-समझकर ऐसे समय पर किया है जब राज्य में:

  1. राज्यसभा चुनाव होने वाले हैं।
  2. विधानपरिषद (MLC) की खाली सीटों पर चुनाव होने जा रहे हैं।

पार्टी किसी भी कीमत पर राज्यसभा चुनाव से पहले अंदरूनी कलह को खत्म कर डीके शिवकुमार की ‘चुनावी मैनेजमेंट’ क्षमता का पूरा फायदा उठाना चाहती है।

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