Israel-Iran: Sky Thriller! आसमान में ईरानी विमान के पीछे पड़े इजरायली फाइटर जेट्स, NYT का बड़ा दावा

अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच परदे के पीछे चल रही जंग को लेकर एक ऐसा होश उड़ाने वाला दावा सामने आया है, जिसने पूरी दुनिया की खुफिया एजेंसियों में खलबली मचा दी है।

अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स (The New York Times) की एक ताजा खोजी रिपोर्ट में दावा किया गया है कि जब अमेरिका और ईरान बैकचैनल के जरिए युद्धविराम और शांति समझौते पर बात कर रहे थे, ठीक उसी वक्त इजरायल ने ईरान के सबसे बड़े शांति वार्ताकारों (Top Negotiators) को रास्ते से हटाने का एक बेहद खतरनाक गुप्त प्लान तैयार किया था।

अगर इजरायल का यह ‘टारगेट किलिंग’ प्लान कामयाब हो जाता, तो पूरी दुनिया तीसरे विश्वयुद्ध की आग में झुलस सकती थी।

न्यूयॉर्क टाइम्स ने अमेरिका के वर्तमान और पूर्व अधिकारियों के हवाले से एक ऐसी घटना का जिक्र किया है जो किसी हॉलीवुड थ्रिलर फिल्म जैसी लगती है:

  • इस्लामाबाद का खुफिया मिशन: इसी साल अप्रैल में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद अध्यक्ष (स्पीकर) मोहम्मद बाकर गालिबाफ अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से कूटनीतिक बातचीत के लिए पाकिस्तान (इस्लामाबाद) गए हुए थे।
  • पाकिस्तानी जेट्स का सुरक्षा कवच: ईरानी वीआईपी डेलिगेशन की जान पर खतरे को देखते हुए पाकिस्तान की वायुसेना ने उनके विमान को लड़ाकू विमानों (फाइटर जेट्स) का सुरक्षा कवच दिया था।
  • ईरान के एयरस्पेस में घुसे इजरायली जेट्स: तेहरान लौटते समय ईरानी खुफिया एजेंसियों को अलर्ट मिला कि इजरायल के दो फाइटर जेट्स उनके विमान को मार गिराने के लिए ईरानी हवाई क्षेत्र में दाखिल हो चुके हैं।
  • इमरजेंसी लैंडिंग और 8 घंटे का सफर: अपनी जान बचाने के लिए ईरानी विमान ने राजधानी तेहरान जाने के बजाय तुरंत पाकिस्तान सीमा के करीब मशहद हवाई अड्डे पर आपातकालीन लैंडिंग की। इसके बाद दोनों शीर्ष नेता सड़क मार्ग से 8 घंटे का सफर तय कर छिपते-छिपाते तेहरान पहुंचे।

रिपोर्ट के मुताबिक, जहां अमेरिकी सेना का फोकस सिर्फ ईरान की नौसेना और मिसाइल ठिकानों को तबाह करने पर था, वहीं इजरायल की रणनीति शुरू से ही ईरान के शीर्ष नेतृत्व को खत्म करने की थी।

इजरायल की ‘टारगेट लिस्ट’ के बड़े नामईरान की राजनीति में उनका पद
अब्बास अराघचीविदेश मंत्री और मुख्य शांति वार्ताकार
मोहम्मद बाकर गालिबाफसंसद के स्पीकर (संसदीय अध्यक्ष)
अली लारीजानीवरिष्ठ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिकारी
कमाल खराजीपूर्व विदेश मंत्री

28 फरवरी का वो खूनी दिन: रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि युद्ध के शुरुआती दौर में 28 फरवरी को हुए एक साझा अमेरिकी-इजरायली हमले में ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई थी, जिसके बाद से इजरायल लगातार बाकी बचे शीर्ष नेतृत्व को भी साफ करने की कोशिश में है।

अमरीकी अधिकारियों के मुताबिक, जब डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन को पता चला कि इजरायल शांति वार्ता के मुख्य सूत्रधार मोहम्मद बाकर गालिबाफ को ‘एलिमिनेट’ (खत्म) करने जा रहा है, तो वाशिंगटन के हाथ-पांव फूल गए। अमेरिका को डर था कि अगर बातचीत की मेज पर बैठे नेताओं की हत्या हुई, तो शांति की हर कोशिश हमेशा के लिए दफन हो जाएगी।

इसके बाद अमेरिका ने खुद इजरायल को कड़ा संदेश भेजकर ऐसा आत्मघाती कदम न उठाने को कहा। इतना ही नहीं, अमेरिका ने क्षेत्र के कुछ मध्यस्थ देशों के जरिए गुपचुप तरीके से ईरान को भी आगाह किया कि उनके नेताओं पर बड़ा हमला हो सकता है।

हालांकि, इस बेहद सनसनीखेज रिपोर्ट पर अब तक इजरायल, अमेरिका या ईरान की सरकारों की तरफ से कोई आधिकारिक पुष्टि या बयान सामने नहीं आया है।

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