Iran Internal Conflict: अमेरिका से टकराव के बीच ईरान में ‘दो फाड़’, IRGC vs राष्ट्रपति Pezeshkian आमने-सामने

तेहरान/वॉशिंगटन। अमेरिका-ईरान तनाव के बीच अब ईरान के अंदर ही सत्ता संघर्ष खुलकर सामने आने लगा है। दुनिया के सबसे अहम तेल मार्ग होर्मुज स्ट्रेट को लेकर ईरान की सैन्य ताकत IRGC (इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स) और राजनीतिक नेतृत्व के बीच गंभीर मतभेद उभर आए हैं।
IRGC का सख्त रुख: ‘होर्मुज हमारा हथियार’
ईरान की सबसे ताकतवर सैन्य संस्था IRGC का मानना है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नियंत्रण बनाए रखना ही अमेरिका के खिलाफ सबसे बड़ा रणनीतिक हथियार है।
विशेषज्ञों के अनुसार, IRGC के कमांडर और कट्टरपंथी धड़ा चाहता है कि:
- अमेरिका पर दबाव बनाए रखने के लिए समुद्री मार्ग का इस्तेमाल हो
- खाड़ी क्षेत्र में लंबे समय तक तनाव बनाए रखा जाए
- भू-रणनीतिक स्थिति का फायदा उठाकर अमेरिका को उलझाया जाए
रिपोर्ट्स के मुताबिक, IRGC प्रमुख अहमद वाहिदी भी इसी आक्रामक रणनीति के पक्ष में हैं।
राष्ट्रपति Pezeshkian का नरम रुख: बातचीत से हल
दूसरी तरफ, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान और उनकी सरकार टकराव नहीं, बल्कि डिप्लोमेसी (कूटनीति) के जरिए समाधान चाहती है।
सरकार का फोकस है:
- अमेरिका के साथ तनाव कम करना
- बातचीत के जरिए स्थिरता लाना
- क्षेत्रीय संघर्ष से बचना
एक देश, दो रणनीति: अंदर ही अंदर बढ़ रहा टकराव
सौफान सेंटर के विश्लेषकों के अनुसार, ईरान के सत्ता ढांचे में इस समय दो अलग-अलग विचारधाराएं काम कर रही हैं—
एक जो युद्ध और दबाव की रणनीति पर विश्वास करती है, और दूसरी जो बातचीत को रास्ता मानती है।
क्यों अहम है होर्मुज स्ट्रेट?
- दुनिया के सबसे व्यस्त तेल सप्लाई रूट्स में शामिल
- वैश्विक ऊर्जा बाजार पर सीधा असर
- यहां तनाव बढ़ने का मतलब तेल कीमतों में उछाल
ईरान के भीतर यह टकराव आने वाले दिनों में मिडिल ईस्ट की राजनीति और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर डाल सकता है।अगर IRGC का दबाव बढ़ता है, तो क्षेत्र में तनाव और गहरा सकता है, जबकि कूटनीतिक लाइन हावी रही तो हालात नियंत्रित हो सकते हैं।



