महिला आरक्षण और परिसीमन बिल पर संसद में जोरदार बहस, विपक्ष-सरकार आमने-सामने

जुबिली न्यूज डेस्क

लोकसभा में नारी शक्ति वंदन अधिनियम और परिसीमन समेत तीन विधेयकों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। इस दौरान कई विपक्षी दलों ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाए, जबकि सरकार ने इसे महिला सशक्तिकरण की ऐतिहासिक पहल बताया।

कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह ने 2010 में भाजपा के रुख का जिक्र करते हुए कहा कि तब पार्टी ने इस बिल का विरोध किया था, जबकि अब वह इसका समर्थन कर रही है। उन्होंने सरकार के रुख को “अस्थिर” बताया।

TMC सांसद सौगत रॉय ने परिसीमन बिल का विरोध करते हुए कहा कि सभी विपक्षी दल इसके खिलाफ हैं और यह नीति दक्षिण भारतीय राज्यों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है।

शिवसेना (UBT) की प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि महिला आरक्षण जरूरी है, लेकिन इसे जनगणना और परिसीमन से जोड़ना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि मौजूदा प्रक्रिया में महिलाओं का प्रतिनिधित्व अभी भी बहुत कम है।

कांग्रेस सांसद रंजीता रंजन ने भी कहा कि विपक्ष पहले से ही महिला आरक्षण के समर्थन में है, लेकिन सरकार इसे 2011 की जनगणना और परिसीमन से जोड़कर टालने की कोशिश कर रही है।

केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि 2023 में पास हुए महिला आरक्षण कानून के अनुसार जनगणना और परिसीमन के बाद ही इसे लागू किया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि लोकसभा की सीटें बढ़कर 815 हो सकती हैं, जिनमें से 272 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।

उन्होंने यह भी कहा कि किसी राज्य को नुकसान नहीं होगा और सभी राज्यों का प्रतिनिधित्व सुरक्षित रहेगा।

संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 को पेश करने के पक्ष में 207 सांसदों ने वोट दिया, जबकि 126 सांसदों ने इसका विरोध किया। विपक्ष ने इस विधेयक के प्रस्तुतिकरण पर मतविभाजन की मांग की थी।

महिला आरक्षण और परिसीमन को लेकर संसद में तीखी बहस जारी है। जहां सरकार इसे ऐतिहासिक सुधार बता रही है, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक रणनीति और समयबद्धता पर सवाल के रूप में देख रहा है।

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