2200 से ज्यादा ड्रोन-मिसाइल हमलों का खौफ! क्या UAE ने जंग से बचने के लिए ईरान को गुप्त तरीके से भेजे 3 अरब डॉलर?

जुबिली स्पेशल डेस्क
पश्चिम एशिया (Middle East) में जारी सैन्य संघर्ष के बीच एक बड़ा कूटनीतिक मोड़ सामने आया है। इजराइली मीडिया ने दावा किया है कि संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने अपने वाणिज्यिक और रणनीतिक शहरों की सुरक्षा के लिए ईरान के साथ एक गुप्त समझौता किया है। हालांकि, ईरान के विदेश मंत्रालय ने इस तरह की किसी भी वित्तीय डील से साफ इनकार किया है।
5 पॉइंट्स में समझिए: क्या है यूएई-ईरान सीक्रेट डील का सच?
- 1. इजराइली मीडिया का बड़ा दावा: इजराइली न्यूज चैनल ‘कान’ की रिपोर्ट के अनुसार, यूएई ने हाल ही में हवाई मार्ग से तेहरान को 3 अरब डॉलर मूल्य की संपत्ति ट्रांसफर की है। इसके बदले में ईरान ने यूएई पर आगे हमले न करने का आश्वासन दिया है।
- 2. ईरान का आधिकारिक इनकार: ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। तेहरान का कहना है कि उन्हें इस कथित डील के तहत कोई पैसा नहीं मिला है और यह केवल मीडिया की अटकलें हैं।
- 3. जंग की ‘दूसरी लहर’ में यूएई सुरक्षित: दिलचस्प बात यह है कि इस कथित डील की खबरों के बीच, जंग की दूसरी लहर में ईरान ने यूएई पर एक भी हमला नहीं किया है। ईरानी सेना वर्तमान में केवल कुवैत, बहरीन और जॉर्डन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बना रही है।
- 4. पहले कतर भी कर चुका है ऐसी डील: यूएई से पहले ईरान ने कतर के साथ भी इसी तरह का समझौता किया था। कतर ने अपने ठिकानों को सुरक्षित रखने के बदले ईरान की फ्रीज की गई 6 अरब डॉलर की संपत्ति को अनफ्रीज (Unfreeze) करने का वादा किया था।
- 5. मध्यस्थ की भूमिका में कतर: कतर इस समय अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम कराने के लिए मुख्य मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। कतर की कोशिश है कि इस समझौते के तुरंत बाद ईरान को राहत कार्यों के लिए 12 अरब डॉलर की अतिरिक्त राशि मिल जाए।
खाड़ी देशों पर ईरान के हमलों का लेखा-जोखा (जंग की पहली लहर)
| प्रभावित देश/शहर | ड्रोन हमले (Drone) | बैलिस्टिक मिसाइलें | क्रूज मिसाइलें | हताहत (Casualties) |
| UAE (अबू धाबी / दुबई) | 2,265 | 551 | 29 | 13 मौतें, 230 घायल |
| कतर (Qatar Bases) | 0 (डील के कारण सुरक्षित) | 0 | 0 |
वैश्विक कूटनीति पर असर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इजराइली मीडिया का यह दावा सच है, तो यह दिखाता है कि खाड़ी देश अब अपनी सुरक्षा के लिए केवल अमेरिका पर निर्भर नहीं रहना चाहते। वे ईरान को आर्थिक रियायतें देकर अपने तेल और पर्यटन केंद्रों (जैसे दुबई) को युद्ध की विभीषिका से सुरक्षित रखने की रणनीति अपना रहे हैं।



