E20 Petrol Reality Check: क्या वाकई E20 पेट्रोल से 30% घट जाता है गाड़ी का माइलेज? नितिन गडकरी के बयान और एक्सपर्ट्स के ‘टैंक-टू-टैंक’ फॉर्मूले से जानें सच

नई दिल्ली। भारत में तेजी से बढ़ते पर्यावरण-अनुकूल कदम के तहत देश भर में E20 पेट्रोल (20% इथेनॉल मिश्रित ईंधन) की सप्लाई बढ़ाई जा रही है। लेकिन इस बदलाव के साथ ही सोशल मीडिया पर दावों और आशंकाओं का एक नया बाजार गर्म है। कोई कह रहा है कि E20 पेट्रोल से उनकी गाड़ी का माइलेज 20 से 30 प्रतिशत तक गिर गया है, तो कोई पुराने इंजन के तबाह होने की बात कर रहा है।

इस बीच केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के एक बयान और ऑटो एक्सपर्ट्स के विश्लेषण ने इस पूरे विवाद को एक नया मोड़ दे दिया है। आइए समझते हैं कि इस इथेनॉल विवाद (Ethanol Controversy) का असली सच क्या है।

सोशल मीडिया पर माइलेज में 30% तक की भारी गिरावट के जो दावे किए जा रहे हैं, उन्हें पेट्रोलियम मंत्रालय और ऑटो एक्सपर्ट्स ने सिरे से खारिज कर दिया है…

  • मंत्रालय का तर्क: मंत्रालय के अनुसार, इथेनॉल का ऊर्जा घनत्व (Calorific Value) सामान्य पेट्रोल से थोड़ा कम होता है, जिससे समान मात्रा में ईंधन जलने पर थोड़ी कम ऊर्जा पैदा होती है। इसके चलते माइलेज में सिर्फ 3 से 5 प्रतिशत तक की ही मामूली कमी आ सकती है।
  • रियल वर्ल्ड टेस्ट का नतीजा: ऑटोकार इंडिया द्वारा किए गए एक कंट्रोल्ड रियल वर्ल्ड टेस्ट में कुछ गाड़ियों में माइलेज का नुकसान 3.8% से लेकर 12.6% तक दर्ज किया गया। यानी नुकसान सोशल मीडिया के दावों जितना बड़ा (30%) नहीं है, लेकिन यह पूरी तरह गाड़ी की कंडीशन और ड्राइविंग पर निर्भर करता है।

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का मानना है कि आम लोग गाड़ी का माइलेज सही तरीके से नहीं माप पाते, इसीलिए इस तरह के भ्रम फैल रहे हैं। ज्यादातर लोग डैशबोर्ड पर दिखने वाले एमआईडी (मल्टी इंफॉर्मेशन डिस्प्ले) के डिजिटल एवरेज को ही अंतिम सच मान लेते हैं, जो कि पूरी तरह सटीक नहीं होता।

유ख्यात ऑटोमोटिव एक्सपर्ट टूटू धवन के मुताबिक, माइलेज नापने का सबसे भरोसेमंद और वैज्ञानिक तरीका ‘टैंक-टू-टैंक मेथड’ (Tank-to-Tank Method) है। इसके स्टेप्स इस प्रकार हैं:

  • स्टेप 1: पेट्रोल पंप पर जाकर अपनी कार या बाइक का फ्यूल टैंक पूरी तरह फुल (कंठ तक) कराएं और ट्रिप मीटर को ‘जीरो’ (0) कर दें।
  • स्टेप 2: गाड़ी को सामान्य तरीके से कम से कम 150 से 200 किलोमीटर तक चलाएं। (बेहतर टेस्ट के लिए स्पीड 80 किमी/घंटा से कम रखें, शीशे बंद रखें और एसी का इस्तेमाल न करें)।
  • स्टेप 3: अब दोबारा उसी पेट्रोल पंप पर जाएं और टैंक को फिर से पूरी तरह फुल कराएं। अब नोट करें कि दूसरी बार में कितना लीटर पेट्रोल भरा।
  • स्टेप 4: अब ट्रिप मीटर पर दर्ज कुल किलोमीटर की दूरी को दूसरी बार भरे गए पेट्रोल के लीटर से भाग (Divide) दे दें। जो संख्या आएगी, वही आपकी गाड़ी का वास्तविक और सटीक माइलेज ($Value$) होगा।

आम उपभोक्ताओं का एक बड़ा सवाल यह है कि गन्ने और मक्के से बनने वाला इथेनॉल जब सस्ता है, तो पेट्रोल की कीमत कम क्यों नहीं की जा रही?

  • लागत का गणित: सरकार के अनुसार, वर्तमान में इथेनॉल की खरीद कीमत ही करीब 71.86 रुपये प्रति लीटर है (जिसमें टैक्स और लॉजिस्टिक्स शामिल नहीं हैं)।
  • कच्चे तेल का खेल: मौजूदा समय में जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास चल रही है, तब रिफाइंड शुद्ध पेट्रोल तैयार करने की लागत कई बार इथेनॉल से भी कम बैठती है। सरकार का स्पष्ट कहना है कि आम जनता को इसका आर्थिक फायदा तब ज्यादा दिखाई देगा, जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जाएगा।

इथेनॉल की प्रकृति हवा से नमी सोखने की होती है, जिससे पुरानी गाड़ियों की फ्यूल पाइप, कार्ब्युरेटर और इंजन में जंग लगने का खतरा बताया जा रहा है। हालांकि, जमीनी आंकड़े कुछ और कहते हैं..

  • कंपनियों का डेटा: मारुति सुजुकी ने वित्त वर्ष 2025-26 में लगभग 2.84 करोड़ वाहनों की सर्विसिंग की, जिनमें से 1.5 करोड़ गाड़ियां E20 अनुकूल नहीं थीं। इसके बावजूद इथेनॉल के कारण पाइप गलने या जंग लगने की कोई व्यापक शिकायत दर्ज नहीं की गई।
  • एक्सपर्ट की सलाह: एक्सपर्ट्स का कहना है कि जो गाड़ियां नियमित रूप से चलती हैं, उनमें कोई समस्या नहीं आएगी। लेकिन जो गाड़ियां 6 महीने या साल भर बिना चले खड़ी रहती हैं, उनमें नमी के कारण फ्यूल सिस्टम खराब होने का जोखिम बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति से बचने के लिए बाजार में मिलने वाले फ्यूल सिस्टम एडिटिव्स (Fuel System Additives) का इस्तेमाल किया जा सकता है।

E20 पेट्रोल से घबराने की जरूरत नहीं है, बल्कि अपनी गाड़ी की नियमित सर्विसिंग कराना और सही तरीके से माइलेज मापना ही इस भ्रम का एकमात्र समाधान है।

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