PAK क्रिकेटर्स लाते थे ड्रग्स? पूर्व MHA अधिकारी का शोएब अख्तर और मोहम्मद आसिफ पर सनसनीखेज दावा

नई दिल्ली: क्रिकेट के मैदान पर भारत और पाकिस्तान की भिड़ंत ने हमेशा सुर्खियां बटोरी हैं, लेकिन अब खेल के गलियारे से एक ऐसा खौफनाक और सनसनीखेज खुलासा हुआ है जिसने दोनों देशों के सुरक्षा तंत्र में हड़कंप मचा दिया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) के पूर्व अंडर सेक्रेटरी आरवीएस मणि ने दावा किया है कि साल 2006-07 के दौरान भारत दौरे पर आने वाले पाकिस्तानी क्रिकेटर और डेलिगेशन भारत में ड्रग्स की तस्करी करते थे, जिसका सीधा कनेक्शन आतंकी फंडिंग (Terror Funding) और पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI से था।

पूर्व अधिकारी ने इस ‘नार्को-टेरर’ नेटवर्क में पाकिस्तान के पूर्व स्टार तेज गेंदबाजों—शोएब अख्तर और मोहम्मद आसिफ का नाम सीधे तौर पर उजागर किया है।

आरवीएस मणि (जो 2006 से 2010 के बीच गृह मंत्रालय के आंतरिक सुरक्षा डिवीजन में कार्यरत थे) ने एक पॉडकास्ट में अपने कार्यकाल की एक बेहद संवेदनशील आधिकारिक रिपोर्ट का हवाला दिया। उन्होंने कहा:

  • पाकिस्तानी हाई कमिश्नर के सामने कबूला सच: “इस मामले की बकायदा आधिकारिक रिपोर्ट मौजूद है। क्रिकेटर शोएब अख्तर और मोहम्मद आसिफ ने खुद दिल्ली में पाकिस्तानी हाई कमिश्नर के सामने यह बात स्वीकार की थी कि वे भारत में ड्रग्स लेकर आए हैं। इस खुलासे के बाद उन्हें चुपचाप वापस भेज दिया गया था।”
  • निजी इस्तेमाल नहीं, आतंकी फंडिंग था मकसद: मणि के मुताबिक, यह ड्रग्स उन क्रिकेटरों के व्यक्तिगत इस्तेमाल के लिए नहीं थे। वे ड्रग्स की बड़ी खेप (Consignment) लेकर भारत आते थे, जिसे बेचकर मिलने वाले पैसे का इस्तेमाल भारत के खिलाफ आतंकी गतिविधियों को फाइनेंस करने में किया जाता था।

आंतरिक सुरक्षा डिवीजन के पूर्व अंडर सेक्रेटरी ने गृह मंत्रालय के भीतर होने वाले आकलनों और रक्षा खुफिया एजेंसी (DIA) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए नार्को-टेररिज्म के खतरनाक त्रिकोण को समझाया:

  • 30% हमलों की फंडिंग ड्रग्स से: उस समय की खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, भारत में होने वाले लगभग 30 फीसदी आतंकी हमलों की फंडिंग सीधे तौर पर ड्रग्स तस्करी के काले पैसे से की जा रही थी।
  • जलालाबाद का कनेक्शन: आरवीएस मणि ने बताया, “हम गृह मंत्रालय में अक्सर यह आकलन करते थे कि अगर अफगानिस्तान के जलालाबाद में अफीम की फसल अच्छी हुई है, तो भारत में आतंकी हमलों का खतरा दोगुना बढ़ जाता था, क्योंकि वहां से भारी मात्रा में ड्रग्स वाया पाकिस्तान भारत भेजा जाता था।”

इस सनसनीखेज खुलासे की कड़ियाँ साल 2007 में पाकिस्तान क्रिकेट टीम के तत्कालीन इंग्लिश कोच बॉब वूल्मर की रहस्यमयी मौत से भी जुड़ती नजर आ रही हैं।

  • आरवीएस मणि ने दावा किया कि 16 अक्टूबर 2006 को पहली बार पाकिस्तानी क्रिकेटरों द्वारा की जा रही ड्रग्स तस्करी का यह मामला आधिकारिक रूप से सामने आया था।
  • इसके ठीक छह महीने बाद, मार्च 2007 में वेस्टइंडीज में चल रहे विश्व कप के दौरान बॉब वूल्मर जमैका के एक होटल में मृत पाए गए थे।
  • पूर्व अधिकारी के अनुसार, वूल्मर पाकिस्तानी टीम के खिलाड़ियों द्वारा की जा रही इस देश-विरोधी ड्रग्स तस्करी का कड़ा विरोध कर रहे थे और उनके रास्ते का रोड़ा बन रहे थे, जिसके कारण उनकी हत्या कर दी गई।

यह पूछे जाने पर कि क्या सुरक्षा एजेंसियां इस संदिग्ध मूवमेंट से बेखबर थीं, आरवीएस मणि ने सुरक्षा तंत्र की एक बड़ी कमजोरी की तरफ इशारा किया….

  • उन्होंने स्पष्ट किया कि इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) का काम केवल इनपुट और अलर्ट देना होता है, कार्रवाई करना अन्य संबंधित विभागों का काम है।
  • उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तानी खिलाड़ियों और प्रतिनिधिमंडलों के संदिग्ध मूवमेंट की ऐसी दर्जनों खुफिया रिपोर्ट आज भी गृह मंत्रालय की फाइलों में धूल फाँक रही हैं।
  • मणि ने भारत-पाकिस्तान के बीच तथाकथित ‘पीपुल टू पीपुल कॉन्टैक्ट’ (लोगों के आपसी संपर्क) को एक सोची-समझी साजिश और ‘बड़ा धोखा’ करार दिया, जिसकी आड़ में भारत-विरोधी गतिविधियों को आसानी से अंजाम दिया जाता था।

गौरतलब है कि आरवीएस मणि केंद्रीय सचिवालय सेवा के बेहद अनुभवी अधिकारी रहे हैं, जिन्होंने अगस्त 2013 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) ले ली थी। अपने सेवाकाल के दौरान वे गृह मंत्रालय के सबसे संवेदनशील विंग (आंतरिक सुरक्षा) में थे, जहाँ वे जम्मू-कश्मीर, पूर्वोत्तर के राज्यों और सीमा पार से होने वाले आतंकवाद जैसे गंभीर मुद्दों को सीधे हैंडल करते थे। उनके इस खुलासे ने अब खेल भावना के पीछे छिपे पाकिस्तान के एक और काले चेहरे को बेनकाब कर दिया है।

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