Saturday - 26 September 2020 - 1:01 PM

कितनी सफल होगी राहुल गांधी को री-लॉन्च करने की कवायद !

सुरेंद्र दुबे

दिल्‍ली के रामलीला मैदान में भारत बचाओ रैली के जरिए कांग्रेस ने मोदी सरकार पर हल्‍ला बोल दिया है। भाजपा के चर्चित नारे या कहें जुमला को उसी अंदाज में जवाब दिया गया। हर बात में भाजपाई कहते हैं कि ‘मोदी है तो मुमकिन है’। कांग्रेस ने कहा, ‘मोदी है तो 100 रुपए किलो प्‍याज मुमकिन है’। ये भी कहा, ‘मोदी हैं तो रेलवे और एयरपोर्ट की बिक्री मुमकिन है’। यह भी कहा कि ‘मोदी हैं तो 4 करोड़ नौकरी नष्ट होना मुमकिन है’।

रैली में आई अपार भीड़ से उत्‍साहित कांग्रेसी नेताओं ने यहां तक कह दिया कि ‘मोदी हैं तो 15000 किसानों की आत्महत्या मुमकिन है’। नागरिकता संशोधन बिल पर पलटवार करते हुए कहा कि भाजपा है तो देश के खिलाफ हर कानून मुमकिन है। यानी कि कांग्रेस ने भाजपाईयों को चौतरफा घेरा और देश में चल रही हर अव्‍यवस्‍था के लिए भाजपा को दोषी ठहराने की कोशिश की।

लेकिन इन सब बातों के बीच रैली में एक खास बात देखने को मिली। जिस तरह से इस रैली की तैयारी की गई है और पोस्‍टरों में राहुल गांधी को प्रमुखता दी गई हैं उससे ऐसा लग रहा है कि इस रैली के जरिए राहुल गांधी की री-लॉन्चिंग की तैयारी की जा रही है।

रैली के लिए राहुल गांधी के करीब 20 हजार मास्क मंगवाए गए, जिन्हें पहनकर कार्यकर्ताओं ने राहुल गांधी के प्रति अपनी निष्‍ठा व्‍यक्‍त की। रैली के मैदान में राहुल गांधी का 30 फीट ऊंचा एक बड़ा कट आउट भी लगाया गया है।

भले ही इस समय कांग्रेस की अंतरिम अध्‍यक्ष सोनिया गांधी हैं और फ्रंट पर महासचिव प्रियंका गांधी हैं पर रैली में दिखे दृश्‍य और परिदृश्‍य से स्‍पष्‍ट परिलक्षित हो रहा था कि पार्टी में राहुल गांधी की री-लॉन्चिंग की तैयारियां चल रहीं हैं। इस बात को इससे भी बल मिलता है कि रैली की ठीक एक दिन पहले मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में राजस्थान और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री की तरह राहुल गांधी को फिर से अध्यक्ष बनाने की मांग की।

अब इससे बड़ा प्रमाण क्‍या चाहिए। रामलीला मैदान में आज कांग्रेसी जन सैलाब को संबोधित करने में प्रियंका गांधी ने अपने भाषण की शुरूआत ही यह कह कर की कि राहुल गांधी हमारे नेता हैं। कई महीनों के सन्‍नाटे के बाद झारखंड विधानसभा चुनाव में राहुल गांधी काफी सक्रिय रूप से पार्टी का प्रचार कर रहे हैं।

उनकी रैलियों में भीड़ भी उमड़ रही है और राहुल गांधी झारखंड वासियों को प्रदेश की खनिज संपदा में साझेदारी देने, बेरोजगारों को नौकरी देने तथा किसानों के लिए न्‍याय योजना जैसी आर्थिक योजना लागू करने की घोषणा भी कर रहे हैं। नौकरियों के संबंध में तो उन्‍होंने स्‍पष्‍ट कहा कि अगर झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस की सरकार बनती है तो खाली पड़े सरकार पद तुरंत भरे जाएंगे।

जिस तरह की खबरें झारखंड से आ रही हैं उससे लगता है कि वहां भाजपा की हालत काफी पतली है। इसी लिए वहां भी भाजपा कश्‍मीर से अनुच्‍छेद 370 हटाने और देश में नागरिकता संशोधन बिल का ढिंढोरा पीट रही है। उत्‍तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ तो वहां अयोध्‍या में मंदिर निर्माण के लिए प्रति व्‍यक्ति एक ईट और 11 रुपए दान करने की अपील करते दिखाई दे रहे हैं।जाहिर है फिर भगवान राम का ही सहारा है। इससे लगता है कि भाजपा की स्थिति वाकई पतली है। राहुल गांधी को जिस तरह झारखंड में हाथों-हाथ लिया जा रहा है उसे कांग्रेस उनकी री-लॉन्चिंग का सबसे सही वक्‍त मान रही है।

(लेखक वरिष्‍ठ पत्रकार हैं, लेख उनके निजी विचार हैं)

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