Thursday - 29 October 2020 - 7:59 PM

TRP का LOCKDOWN, क्या बदलेगी TV पत्रकारिता की तस्वीर

अविनाश भदौरिया 

पिछले दिनों टीआरपी को लेकर न्यूज चैनलों पर गंभीर आरोप लगे। इसके बाद यह लड़ाई अदालत की चौखट तक जा पहुंची। इसी बीच गुरूवार को टीआरपी जारी करने वाली संस्था बीएआरसी यानी ब्रॉडकास्ट ऑडिएंस रिसर्च काउंसिल ने सभी न्यूज़ चैनलों की साप्ताहिक टीआरपी जारी करने पर रोक लगा दी है। बीएआरसी के मुताबिक इस प्रक्रिया में सभी हिंदी, क्षेत्रीय अंग्रेजी न्यूज और बिजनेस न्यूज चैनल शामिल होंगे।

बीएआरसी ने कहा है कि उसकी टेक्निकल टीम सभी बिंदुओं पर विचार कर टीआरपी आंकने की प्रक्रिया का मूल्यांकन करेगी। बीएआरसी के मुताबिक इसमें 8 से 12 सप्ताह का समय लग सकता है।

बीएआरसी ने इस विषय में अपने अधिकारिक ट्विटर हैंडल से बयान जारी किया है। बयान में कहा गया है कि हाल में हुए डेवलेपमेंट के मद्देनजर बीएआरसी की टेक्निकल कमेटी ने तय किया है कि टीवी चैनलों की टीआरपी आंकने के मानक और प्रक्रिया का मूल्यांकन किया जाए ताकि टीआरपी सटीक हो सके। बीएआरसी का कहना है कि उसका यह कदम टीआरपी आंकने की प्रक्रिया में किसी भी दखल को रोकने के लिए जरूरी है ताकि जिन घरों में टीआरपी मीटर लगे हैं उन तक किसी की पहुंच न हो सके।

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बीएआरसी के इस फैसले पर आम लोगों से लेकर कई बड़े पत्रकार भी अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। दैनिक जागरण के वरिष्ठ पत्रकार ने अनंत विजय अपने ट्विटर पर लिखा कि, 12 हफ्ते तक TRP के चक्कर से मुक्ति।

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वहीं मनोज रंजन त्रिपाठी लिखते हैं कि, TRP का तो LOCKDOWN हो गया है। अगले 12 हफ़्ते मीडिया के पास अपनी बची खुची इज़्ज़त वापस पाने का पूरा मौक़ा है। ड्रामा, फ़र्ज़ी खबरें, चीखना, चिल्लाना बंद कर दो क्योंकि 12 हफ़्ते तक TRP तो आनी नहीं है। सुधर जाओ वर्ना जनता सुधार देगी।

जुबिली पोस्ट ने इस सम्बन्ध में समाचार पत्रों और टीवी पत्रकारिता में लम्बा अनुभव रखने वाले वरिष्ठ पत्रकार कुमार भावेश चन्द्र से बात की तो उन्होंने कहा कि, टेलीविजन की लोकप्रियता को जानने का पैमाना टीआरपी है। इसका महत्व आम आदमी के लिए कम बल्कि विज्ञापनदाताओं के लिए अधिक होता है। ऐसे में टीआरपी पर पूरी तरह से प्रतिबन्ध तो संभव ही नहीं है। बीएआरसी ने जो रोक टीआरपी जारी करने पर लगाई है वह इसलिए है कि, इसकी कमियों को समझकर दूर किया जा सके। हो सकता है कि जल्दी ही इसमे कुछ सुधार के साथ या फिर कोई व्यवस्था सामने आये।

उन्होंने बताया कि इससे पहले टाइम रेटिंग की व्यवस्था थी जिसे बदलकर यह नहीं व्यवस्था लाई गयी। अब एकबार फिर से जब इस व्यवस्था पर धांधली के आरोप लगे हैं तो उसमे बदलाव की संभवना है।

कुमार भावेश यह भी कहते हैं कि, टीवी पत्रकारिता में सुधार के लिए या फिर गड़बड़ी के लिए टीआरपी को बहुत जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। उनका मानना है कि पत्रकरिता की गुणवत्ता में सुधार के लिए तो चैनलों के हेड और संपादकों की संस्थाओं को चर्चा करनी होगी। उन्हें यह तय करना होगा की अपनी गिरती साख को कैसे बचाया जाए और जनसरोकार की पत्रकारिता को बढ़ावा दिया जाए।

मुंबई पुलिस ने TRP घोटाले का भंडाफोड़ किया है

बता दें कि मुंबई पुलिस ने कथित टीआरपी घोटाले में कम से कम पांच लोगों को गिरफ्तार किया था। मुंबई पुलिस ने इस महीने की शुरुआत में घोटाले का भंडाफोड़ किया। गिरफ्तार किए गए लोगों में समाचार चैनलों के कर्मचारी भी शामिल हैं, इस संबंध में पुलिस की जांच जारी है।

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