APJ Abdul Kalam Death Anniversary: डॉ. कलाम के 10 ‘गोल्डन रूल्स’ जो बदल देंगे हर स्टूडेंट की जिंदगी

नई दिल्ली। 27 जुलाई 2015 को जब देश ने अपने सबसे चहेते राष्ट्रपति और ‘मिसाइल मैन’ डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम को खोया था, तब वे जीवन के अंतिम क्षणों में भी शिलांग (IIM) के छात्रों के बीच ही थे।

आज के इस दौर में, जब देश का युवा सफलता की परिभाषा को केवल किसी बड़े IIT, IIM या भारी-भरकम पैकेज वाली नौकरी से जोड़कर देखने लगा है, तब डॉ. कलाम का जीवन और दर्शन एक नई दिशा दिखाता है। उनका मानना था कि असली सफलता किसी डिग्री या ब्रांड से नहीं, बल्कि दृढ़ सोच, असफलता से सीखने की क्षमता और निरंतर प्रयास से हासिल होती है।

27 जुलाई को उनकी पुण्यतिथि पर आइए जानते हैं डॉ. कलाम के वे 10 ‘सक्सेस मंत्र’, जो आज के कंपटीशन के दौर में हर युवा के लिए एक टॉर्च-बियरर का काम कर सकते हैं।

डॉ. कलाम का सबसे मशहूर विचार था— “सपने वो नहीं जो आप सोते समय देखते हैं, सपने वो हैं जो आपको सोने न दें।” उनका स्पष्ट संदेश था कि बड़ा बनने के लिए अपनी सोच का दायरा बढ़ाना होगा। जब लक्ष्य बड़ा होगा, तभी उसे पाने के लिए आपकी भूख जागेगी।

ISRO में शुरुआती रॉकेट मिशन की असफलताओं से लेकर कई प्रोजेक्ट्स के फेल होने तक, डॉ. कलाम ने खुद कई झटके सहे। उनका कहना था कि हर विफलता (Failure) आपको आपकी कमियों से रूबरू कराती है, ताकि आप अगली बार दोगुने अनुभव के साथ उतर सकें।

डॉ. कलाम के अनुसार, पढ़ाई कॉलेज की डिग्री के साथ खत्म नहीं होती। तेजी से बदलती तकनीक और स्किल के दौर में वही युवा आगे टिकेगा, जो जीवनभर एक ‘छात्र’ बनकर नया ज्ञान अर्जित करता रहेगा।

स्मार्ट वर्क के इस दौर में भी डॉ. कलाम अनुशासन, ईमानदारी और लगातार की जाने वाली मेहनत को सफलता की नींव मानते थे। उनके मुताबिक, किसी भी क्षेत्र में महारत (Mastery) रातों-रात नहीं, बल्कि वर्षों के अभ्यास से मिलती है।

समय को सबसे बड़ा संसाधन मानने वाले डॉ. कलाम कहते थे कि जो व्यक्ति अपने समय का व्यवस्थित और अनुशासित उपयोग करता है, वही अपने सपनों को तय सीमा के भीतर पूरा कर पाता है।

सार्वजनिक जीवन में सादगी और सत्यनिष्ठा का मानक पेश करने वाले डॉ. कलाम का मानना था कि कोई भी पद या डिग्री तब तक अधूरी है, जब तक आपके पास एक साफ-सुथरा चरित्र न हो। ज्ञान के साथ नैतिक मूल्यों का होना अनिवार्य है।

वे युवाओं से हमेशा कहते थे कि अपनी पढ़ाई और हुनर का उपयोग सिर्फ अपने निजी फायदों के लिए न करें। भारत को एक ‘नॉलेज सुपरपावर’ बनाने के लिए युवाओं को देश और समाज की समस्याओं का समाधान ढूँढना होगा।

मुश्किल परिस्थितियां और दबाव इंसान की छिपी हुई क्षमता (Potential) को बाहर लाते हैं। जो लोग विपत्ति के समय घबराने की जगह शांत रहकर समस्या को हल करते हैं, वही लीडर बनते हैं।

ISRO और DRDO के सफल मिशनों की मिसाल देते हुए वे कहते थे कि बड़े लक्ष्य कभी अकेले हासिल नहीं होते। एक अच्छा लीडर वही है जो टीम की सफलता का श्रेय सबको दे और असफलता की जिम्मेदारी खुद आगे बढ़कर ले।

महानता की ऊंचाइयों को छूने के बाद भी डॉ. कलाम बच्चों से लेकर वैज्ञानिकों तक के सामने हमेशा बेहद सरल और विनम्र रहते थे। उनका मानना था कि वास्तविक ज्ञान मनुष्य के भीतर अहंकार नहीं, बल्कि विनम्रता लाता है।

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