‘बहुओं को खाना बनाना सिखाएं’… केरल CM के बयान पर मचा बवाल, सोशल मीडिया पर घिरे

तिरुवनंतपुरम: केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन अपने एक बयान को लेकर विवादों में घिर गए हैं। पारंपरिक व्यंजनों के संरक्षण पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि माताओं को अपने बच्चों के साथ-साथ अपने बेटों की पत्नियों को भी पारंपरिक व्यंजन बनाना सिखाना चाहिए। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं और कई लोगों ने इसे महिलाओं की पारंपरिक भूमिका को बढ़ावा देने वाला बताया है।
क्या कहा मुख्यमंत्री ने?
मुख्यमंत्री शनिवार को चेंगन्नूर स्थित डी. चार्ली पम्पा स्मृति स्थल पर आयोजित 14वें पम्पा साहित्य महोत्सव के उद्घाटन समारोह में पहुंचे थे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें कुछ माताओं से शिकायत है, जो विशेष पारंपरिक व्यंजन तो बनाती हैं लेकिन उनकी विधि अपने बच्चों को नहीं सिखातीं।
उन्होंने कहा कि कम से कम इन व्यंजनों की जानकारी अपने बच्चों या फिर उनके होने वाले जीवनसाथी, विशेषकर बेटे की पत्नी, तक पहुंचानी चाहिए ताकि पारंपरिक खानपान की विरासत अगली पीढ़ी तक सुरक्षित रह सके। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि कला, संस्कृति और पारंपरिक व्यंजनों जैसी धरोहरों का संरक्षण समय की जरूरत है।
सोशल मीडिया पर शुरू हुई आलोचना
मुख्यमंत्री के बयान के बाद सोशल मीडिया पर कई लोगों ने इसकी आलोचना की। आलोचकों का कहना है कि यह टिप्पणी इस धारणा को मजबूत करती है कि खाना बनाना केवल महिलाओं या बहुओं की जिम्मेदारी है। उनका तर्क है कि घरेलू काम और पारंपरिक व्यंजन सीखना-सिखाना परिवार के सभी सदस्यों की साझा जिम्मेदारी होनी चाहिए, चाहे वे पुरुष हों या महिलाएं।
पूर्व शिक्षा मंत्री ने भी जताई आपत्ति
केरल के पूर्व शिक्षा मंत्री वी. शिवनकुट्टी ने भी मुख्यमंत्री के बयान की आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह टिप्पणी राज्य के स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल लैंगिक समानता के सिद्धांतों के विपरीत है। उन्होंने याद दिलाया कि पाठ्यक्रम में बदलाव कर लड़के और लड़कियों दोनों को समान रूप से घरेलू कामों में भागीदारी के लिए प्रोत्साहित किया गया है।
लेखिका शारदाकुट्टी ने भी साधा निशाना
लेखिका शारदाकुट्टी ने भी फेसबुक पोस्ट के जरिए मुख्यमंत्री की टिप्पणी पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि महिलाओं के नेतृत्व वाले आंदोलनों और समाज में हो रहे बदलावों के बावजूद ऐसी सोच का सामने आना निराशाजनक है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि समय बदल रहा है, लेकिन कुछ लोगों की सोच अब भी पुराने नजरिए से आगे नहीं बढ़ पाई है।
मुख्यमंत्री के बयान को लेकर बहस जारी है। एक पक्ष इसे पारंपरिक व्यंजनों और सांस्कृतिक विरासत को बचाने की अपील मान रहा है, जबकि दूसरा पक्ष इसे लैंगिक समानता के खिलाफ और महिलाओं की पारंपरिक भूमिकाओं को बढ़ावा देने वाला बता रहा है।



