संसद के मकर द्वार पर धर्मेंद्र प्रधान का स्वागत, प्रियंका गांधी का विरोध; 12 बजे तक संसद स्थगित

नई दिल्ली। नीट (NEET) पेपर लीक आंदोलन और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के कड़े रुख के बाद पद से इस्तीफा देने वाले धर्मेंद्र प्रधान जब सोमवार को संसद पहुंचे, तो संसद भवन का मकर द्वार (Makar Dwar) अभूतपूर्व राजनीतिक ड्रामे का गवाह बना।

इस्तीफे के बाद पहली बार संसद पहुंचे पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का एनडीए (NDA) सांसदों ने ‘धर्मेंद्र प्रधान जिंदाबाद’ के नारों के साथ जोरदार स्वागत किया। वहीं, इसी मकर द्वार के ठीक दूसरी ओर कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा की अगुवाई में समूचा विपक्ष केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे और जवाबदेही की मांग को लेकर नारेबाजी कर रहा था।

सोमवार को जैसे ही 11 बजे संसद की कार्यवाही शुरू होने वाली थी, मकर द्वार पर दो बिल्कुल विरोधी राजनीतिक तस्वीरें देखने को मिलीं…

  • NDA का फ्रंट-फुट डिफेंस: एनडीए और बीजेपी सांसदों ने धर्मेंद्र प्रधान को घेरकर उनके समर्थन में जमकर नारेबाजी की। पार्टी यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि प्रधान ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दिया है और संगठन उनके साथ मजबूती से खड़ा है।
  • विपक्ष का पलटवार (प्रियंका गांधी का हमला): मकर द्वार पर ही धरने पर बैठीं कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को छात्रों पर हुए बल प्रयोग और पेलेट गन विवाद पर सीधे गृह मंत्री अमित शाह को घेरा।

शनिवार को धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद केंद्र सरकार और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रतिनिधिमंडल के बीच तीसरे दौर की वार्ता सफल रही थी, जिसके बाद CJP ने अपना आंदोलन आधिकारिक रूप से समाप्त कर दिया था।

हालांकि, आंदोलन खत्म होने के बावजूद संसद में इसका असर साफ दिखा

  1. हंगामे से शुरुआत: सुबह 11 बजे जैसे ही लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही शुरू हुई, विपक्ष ने पेपर लीक और जंतर-मंतर घटनाक्रम पर जमकर हंगामा किया।
  2. सदन स्थगित: हंगामे और शोर-शराबे को देखते हुए दोनों सदनों की कार्यवाही को दोपहर 12 बजे तक के लिए तुरंत स्थगित कर दिया गया।

सदन के दोबारा शुरू होने पर दोपहर 12 बजे केंद्र सरकार की ओर से नया ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) अमेंडमेंट बिल, 2026’ लोकसभा में पेश किए जाने की संभावना है।

अब डीओपीटी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह द्वारा पेश किए जाने वाले इस बिल पर विपक्ष के रुख और 8 से 10 घंटे तक चलने वाली संभावित बहस पर पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं।

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