क्या रात में बार-बार भूख लगना बीमारी का संकेत है? जानिए डॉक्टर क्या कहते हैं

रात के दो या तीन बजे अचानक नींद खुलना और कुछ खाने की इच्छा होना कई लोगों के साथ कभी-कभी होता है। लेकिन अगर यह आदत बार-बार बनने लगे, बिना कुछ खाए दोबारा नींद न आए या रोजाना रात में जरूरत से ज्यादा खाना खाने की इच्छा हो, तो इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, यह Night Eating Syndrome (NES) नामक ईटिंग डिसऑर्डर का संकेत हो सकता है। इस स्थिति में व्यक्ति अपनी दिनभर की कैलोरी का बड़ा हिस्सा रात में खाता है और कई बार नींद से उठकर भी खाना खाता है।
क्या है Night Eating Syndrome?
Night Eating Syndrome (NES) एक ऐसा ईटिंग डिसऑर्डर है, जिसमें व्यक्ति की खाने की आदतें शरीर की सामान्य जैविक घड़ी (Circadian Rhythm) से प्रभावित हो जाती हैं। इस समस्या से जूझ रहे लोगों को अक्सर सुबह भूख नहीं लगती, लेकिन शाम और रात होते-होते खाने की इच्छा काफी बढ़ जाती है।
कुछ मामलों में व्यक्ति रात के बीच में उठकर खाना खाता है और उसे लगता है कि बिना कुछ खाए दोबारा नींद नहीं आएगी।
किन लक्षणों को नजरअंदाज न करें?
यदि लंबे समय तक ये लक्षण बने रहें, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी हो सकता है:
- रात में बार-बार नींद खुलना और खाने की तीव्र इच्छा होना।
- बिना कुछ खाए दोबारा नींद न आना।
- दिन की तुलना में रात में ज्यादा खाना खाना।
- सुबह भूख कम लगना या नाश्ता छोड़ देना।
- देर रात स्नैकिंग की आदत लगातार बढ़ना।
विशेषज्ञों का कहना है कि केवल एक-दो बार ऐसा होने से NES नहीं माना जाता, लेकिन यदि यह आदत सप्ताह में कई बार हो और लंबे समय तक बनी रहे तो जांच करानी चाहिए।
सिर्फ भूख नहीं, मानसिक स्वास्थ्य से भी जुड़ा है संबंध
डॉक्टरों के अनुसार, रात में बार-बार भूख लगने का संबंध केवल पेट से नहीं होता। यह शरीर की सर्कैडियन रिदम, हार्मोन, तनाव, चिंता और अवसाद जैसी मानसिक स्थितियों से भी जुड़ा हो सकता है।
Scientific Reports (Nature Portfolio) में प्रकाशित एक अध्ययन में देर रात खाने की आदत और मानसिक स्वास्थ्य के बीच संबंध पाया गया है। हालांकि, शोधकर्ताओं का कहना है कि हर व्यक्ति में इसके कारण अलग-अलग हो सकते हैं।
महिलाओं में क्यों ज्यादा देखा जाता है?
कुछ शोधों के अनुसार, Night Eating Syndrome महिलाओं में पुरुषों की तुलना में थोड़ा अधिक देखा जाता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं:
- मासिक धर्म के दौरान हार्मोनल बदलाव।
- गर्भावस्था और मेनोपॉज के समय हार्मोन में उतार-चढ़ाव।
- तनाव, चिंता और अवसाद की अपेक्षाकृत अधिक संभावना।
- इमोशनल ईटिंग (भावनात्मक तनाव में ज्यादा खाना)।
हालांकि, डॉक्टर स्पष्ट करते हैं कि यह समस्या केवल महिलाओं तक सीमित नहीं है। अनियमित दिनचर्या, खराब नींद, लंबे समय तक डाइटिंग और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं किसी भी व्यक्ति में इसका जोखिम बढ़ा सकती हैं।
इसके पीछे क्या कारण हो सकते हैं?
रात में भूख लगने के कई संभावित कारण हो सकते हैं, जैसे:
- दिनभर पर्याप्त और संतुलित भोजन न करना।
- रात का खाना बहुत जल्दी या कम मात्रा में खाना।
- देर रात तक जागना।
- तनाव, चिंता या अवसाद।
- खराब या अनियमित नींद।
- भूख नियंत्रित करने वाले हार्मोन में बदलाव।
इसी वजह से डॉक्टर केवल खानपान नहीं, बल्कि व्यक्ति की पूरी जीवनशैली और मानसिक स्वास्थ्य का भी आकलन करते हैं।
एक्सपर्ट की सलाह
हार्वर्ड-प्रशिक्षित AIIMS गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. सौरभ सेठी के अनुसार, रात 10-11 बजे के बाद मीठा या हाई-कैलोरी फूड खाने की इच्छा केवल आदत नहीं, बल्कि शरीर की जैविक प्रक्रिया का असर हो सकती है।
उनके मुताबिक, यदि नींद पूरी नहीं होती तो घ्रेलिन (भूख बढ़ाने वाला हार्मोन) बढ़ जाता है और लेप्टिन (पेट भरने का संकेत देने वाला हार्मोन) कम हो जाता है। यही कारण है कि देर रात जंक फूड और मिठाइयों की क्रेविंग बढ़ जाती है।
कैसे कम करें आधी रात की भूख?
विशेषज्ञ इन उपायों की सलाह देते हैं:
- रोजाना एक ही समय पर सोने की कोशिश करें।
- सोने से करीब एक घंटे पहले मोबाइल और अन्य स्क्रीन से दूरी बनाएं।
- रात के खाने में प्रोटीन और फाइबर शामिल करें।
- देर रात तक जागने की आदत से बचें।
- शाम के समय तेज रोशनी और कैफीन का सेवन कम करें।
- यदि समस्या लगातार बनी रहे, तो डॉक्टर या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लें।
ध्यान रखें
कभी-कभार रात में भूख लगना सामान्य हो सकता है। लेकिन यदि यह आदत नियमित हो जाए, नींद और दिनचर्या को प्रभावित करने लगे या बिना कुछ खाए नींद न आए, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। समय पर जांच और सही उपचार से Night Eating Syndrome को नियंत्रित किया जा सकता है।



