खामेनेई के जनाजे में 2 करोड़ की भीड़ का अनुमान, 3,000 मौतों की आशंका के बीच सरकार ने क्यों खोदीं हजारों एडवांस कब्रें?

जुबिली स्पेशल डेस्क
Tehran/Berlin Media Report: ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई (Ali Khamenei) की अंतिम यात्रा को लेकर तेहरान से लेकर मशहद तक सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं।
एक जर्मन मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस ऐतिहासिक विदाई समारोह में उमड़ने वाली भारी भीड़ और भीषण गर्मी के चलते 1,500 से 3,000 लोगों की जान जाने की आशंका है। इस संभावित त्रासदी से निपटने के लिए ईरानी सरकार ने पहले से ही हजारों नई कब्रें खोदने के साथ-साथ अभूतपूर्व आपातकालीन इंतजाम शुरू कर दिए हैं।
खूफिया रिपोर्ट में खुलासा: रेड क्रिसेंट ने उपराष्ट्रपति को लिखा गोपनीय पत्र
जर्मनी के प्रतिष्ठित अखबार डाई वेल्ट (Die Welt) की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के रेड क्रिसेंट और नेशनल क्राइसिस मैनेजमेंट ऑर्गनाईजेशन ने उपराष्ट्रपति मोहम्मद रजा आरिफ को एक बेहद संवेदनशील और गोपनीय पत्र भेजा है। इस पत्र में चेतावनी दी गई है कि अत्यधिक भीड़, उमस और भगदड़ जैसी स्थितियों के कारण बड़े पैमाने पर हताहत होने का खतरा है।
सरकार ने इस इनपुट को इतनी गंभीरता से लिया है कि राजधानी तेहरान के बेहेश्त-ए-जहरा कब्रिस्तान में हजारों कब्रें एडवांस में तैयार कर दी गई हैं। इसके अलावा, मृतकों की शिनाख्त और लापता लोगों की तलाश के लिए एक विशेष प्रशासनिक यूनिट का गठन भी किया गया है।
7 दिनों का सफर: तेहरान से इराक के नजफ-करबला तक जाएगा पार्थिव शरीर
बता दें कि अली खामेनेई की मौत इस साल 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल के एक हवाई हमले में हुई थी। अब उनके अंतिम संस्कार के लिए एक हफ्ते का लंबा रूट तय किया गया है:
- 6 जुलाई तक: पार्थिव शरीर तेहरान के ग्रैंड प्रेयर हॉल में अंतिम दर्शन के लिए रहेगा।
- धार्मिक यात्रा: इसके बाद पार्थिव शरीर को शिया समुदाय के पवित्र केंद्रों—कोम (ईरान), नजफ़ और करबला (इराक) ले जाया जाएगा।
- 9 जुलाई: अंत में मशहद (Mashhad) में उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।
क्राउड मैनेजमेंट के लिए ‘वार रूम’ जैसी तैयारी
इतने बड़े पैमाने पर लोगों को संभालने के लिए तेहरान प्रशासन ने शहर को एक तरह से होल्डिंग एरिया में बदल दिया है:
- फ्री ट्रांसपोर्ट: भीड़ को नियंत्रित करने और ट्रैफ़िक जाम से बचने के लिए 24 घंटे मुफ्त मेट्रो और बस सेवाएं चालू की गई हैं।
- शेल्टर होम्स: बाहर से आने वाले करोड़ों लोगों के रुकने के लिए तेहरान के सभी स्कूलों, कॉलेजों और मस्जिदों को अस्थाई कैंपों में तब्दील कर दिया गया है।
- नो-फ्लाई ज़ोन: सुरक्षा कारणों से राजधानी के कुछ हिस्सों में हवाई सेवाओं और आम आवाजाही पर कड़े प्रतिबंध लगाए गए हैं।
इतिहास की गलतियों से सीख रहा है ईरान
ईरान का इतिहास गवाह है कि यहाँ बड़े नेताओं के जनाजे में भारी जनहानि हुई है। सरकार इस बार कोई रिस्क नहीं लेना चाहती क्योंकि:
- 2020 (कासिम सुलेमानी का जनाजा): भगदड़ मचने से 56 लोगों की मौत हुई थी और 200 से ज्यादा घायल हुए थे।
- 1989 (आयतुल्ला रुहोल्लाह खोमैनी का जनाजा): इस ऐतिहासिक जनाजे में बेकाबू भीड़ के कारण 8 लोगों की जान गई थी और 11 हजार से अधिक लोग जख्मी हुए थे।
राजनीतिक तनाव का भी है साया: रिपोर्ट के अनुसार, सुरक्षा एजेंसियों को न सिर्फ भीड़ प्रबंधन की चिंता है, बल्कि आंतरिक राजनीतिक अशांति का भी खतरा है। हाल ही में अमेरिका के साथ हुए शांति समझौते से ईरान के कुछ कट्टरपंथी गुट नाराज हैं। आशंका है कि ये गुट इस संवेदनशील मौके पर विरोध प्रदर्शन या हंगामा कर सकते हैं, जिससे भगदड़ की स्थिति पैदा हो सकती है।


