TMC में बड़ा सियासी भूचाल: ममता बनर्जी के एक पत्र के बाद चंद्रिमा भट्टाचार्य का सभी पदों से इस्तीफा, सामने आई ये बड़ी वजह

मुख्य बातें
- ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग (ECI) को पत्र लिखकर अभिषेक बनर्जी और डेरेक ओ’ब्रायन को घोषित किया था आधिकारिक प्रतिनिधि।
- इस फैसले के बाद नाराज चंद्रिमा भट्टाचार्य ने पार्टी के सभी पदों के साथ बैंक खातों के हस्ताक्षरकर्ता (Signatory) की भूमिका भी छोड़ी।
- सूत्रों के मुताबिक, बेटे सौरव बसु के बागी गुट में शामिल होने के बाद चंद्रिमा भट्टाचार्य पर उठ रहे थे सवाल।
जुबिली स्पेशल डेस्क
कोलकाता। पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर एक बड़ा संगठनात्मक फेरबदल और सियासी ड्रामा सामने आया है। टीएमसी की वरिष्ठ नेता चंद्रिमा भट्टाचार्य ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है। यह कदम मुख्यमंत्री और टीएमसी चीफ ममता बनर्जी द्वारा भारत के चुनाव आयोग (ECI) को लिखे गए एक बेहद महत्वपूर्ण पत्र के ठीक बाद सामने आया है।
ममता बनर्जी का वो पत्र, जिससे शुरू हुई कलह
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, ममता बनर्जी ने 15 जून को भारत के चुनाव आयोग (ECI) के सचिव अश्विनी मोहल को एक आधिकारिक पत्र भेजा था। इस पत्र में ममता बनर्जी ने स्पष्ट किया था कि अब से चुनाव आयोग के साथ पार्टी की ओर से किसी भी आधिकारिक संवाद या रणनीतिक बातचीत के लिए केवल दो ही नेता अधिकृत (Authorized) होंगे:
- अभिषेक बनर्जी (TMC राष्ट्रीय महासचिव)
- डेरेक ओ’ब्रायन (राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ नेता)
इस पत्र के जरिए ममता बनर्जी ने साफ कर दिया कि चुनाव आयोग के समक्ष पार्टी का प्रतिनिधित्व करने की पुरानी व्यवस्था को अब पूरी तरह बदल दिया गया है।
चंद्रिमा भट्टाचार्य का इस्तीफा: सिर्फ पद नहीं, वित्तीय कमान भी छोड़ी
ममता बनर्जी के इस फैसले के बाद आज सुबह चंद्रिमा भट्टाचार्य ने अपने इस्तीफे का ऐलान कर सबको चौंका दिया। अपने त्याग पत्र में चंद्रिमा ने स्पष्ट किया कि वह खुद को चुनाव आयोग के सामने TMC की अधिकृत प्रतिनिधि की भूमिका से पूरी तरह अलग कर रही हैं।
इतना ही नहीं, चंद्रिमा ने केवल संगठन के पदों से इस्तीफा नहीं दिया है, बल्कि वह पार्टी के बैंक खातों से जुड़ी ‘अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता’ (Authorized Signatory) की अहम भूमिका से भी पीछे हट गई हैं। राजनीतिक गलियारों में इस वित्तीय और प्रशासनिक पद को छोड़ना बेहद गंभीर माना जा रहा है।
इस्तीफे के पीछे क्या है असली वजह?
पार्टी के अंदरूनी सूत्रों की मानें तो चंद्रिमा भट्टाचार्य के अचानक नाराज होने की वजह सिर्फ चुनाव आयोग का प्रतिनिधित्व खोना नहीं है, बल्कि इसके पीछे पारिवारिक और आंतरिक गुटबाजी का एंगल भी है।
हाल ही में चंद्रिमा भट्टाचार्य के पुत्र सौरव बसु, रीताब्रता बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट में शामिल हो गए थे। इसके बाद से ही टीएमसी के भीतर चंद्रिमा भट्टाचार्य की निष्ठा और काम करने के तरीके पर लगातार सवाल उठाए जा रहे थे।
“मुझे किसी व्यक्ति से कोई निजी शिकायत या गिला-शिकवा नहीं है। लेकिन जिस तरह से मेरी वफादारी और काम पर उंगलियां उठाई गईं, उसके बाद मेरे लिए इस गरिमा के साथ पार्टी में बने रहना बिल्कुल नामुमकिन हो गया था।” — इस्तीफे के बाद पत्रकारों से चंद्रिमा भट्टाचार्य
TMC के लिए क्या हैं इसके मायने?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि टीएमसी अब पूरी तरह से एक नई व्यवस्था और यंग लीडरशिप (विशेषकर अभिषेक बनर्जी) के तहत आगे बढ़ने की तैयारी में है। हालांकि, चंद्रिमा भट्टाचार्य जैसी वरिष्ठ नेता का इस तरह नाराज होकर जाना पार्टी के भीतर आंतरिक कलह को उजागर करता है। फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम पर तृणमूल कांग्रेस की ओर से कोई आधिकारिक और विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
