Pak vs Afg जंग में कूदा अमेरिका! ट्रंप सरकार के इस एक फैसले से भड़का तालिबान, मिडिल ईस्ट में भारी तनाव

पाकिस्तान और अफगानिस्तान (Taliban) के बीच सीमा पर जारी खूनी और हिंसक झड़पों के बीच अब दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका की एंट्री हो गई है। अमेरिकी विदेश विभाग (US State Department) ने एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा बयान जारी करते हुए खुलकर पाकिस्तान का पक्ष लिया है।
व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की वापसी के बाद वाशिंगटन ने साफ कर दिया है कि वह आतंकवाद के खिलाफ पाकिस्तान के आत्मरक्षा के अधिकार का समर्थन करता है। अमेरिका के इस रुख ने अफगान तालिबान की कसमों और धमकियों के बीच बारूद में घी डालने का काम किया है।
US स्टेट डिपार्टमेंट का आधिकारिक बयान: “अमेरिका, पाकिस्तान द्वारा आतंकवादी हमलों से खुद को बचाने के अधिकार का पूरी तरह समर्थन करता है। पाकिस्तान की जनता और वहां के सैनिकों ने आतंकवादियों के हाथों बहुत नुकसान उठाया है।”
क्यों भड़की जंग? 28 बेगुनाहों की मौत से दहला अफगानिस्तान
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव इस समय अपने चरम पर है। संयुक्त राष्ट्र (UN) की हालिया रिपोर्ट और जमीनी हालात इस टकराव की भयानक तस्वीर बयां कर रहे हैं:
- 27 जून की घातक एयरस्ट्राइक: कराची में सिंध रेंजर्स के मुख्यालय पर हुए हमले (जिसमें 3 पाकिस्तानी जवान मारे गए थे) का बदला लेने के लिए पाकिस्तानी वायुसेना ने अफगानिस्तान के सीमावर्ती इलाकों में भीषण हवाई हमला किया।
- UN का बड़ा खुलासा: संयुक्त राष्ट्र ने पुष्टि की है कि पाकिस्तान की इस हालिया एयरस्ट्राइक में कम से कम 28 आम नागरिक मारे गए हैं और 49 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
- TTP पर एक्शन का दावा: इस्लामाबाद का कहना है कि उसने यह कार्रवाई तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) से जुड़े खूंखार गुट ‘जमात-उल-अहरार’ को तबाह करने के लिए की थी, जिसके हथियारों और गोला-बारूद के भंडारों को कुनार, पक्तिया और पक्तिका प्रांतों में नष्ट कर दिया गया।
ट्रंप राज में पाकिस्तान को मिला अमेरिका का ‘कवच’
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका द्वारा पाकिस्तान की इस सैन्य कार्रवाई की तरफदारी करने के पीछे बड़ी कूटनीतिक वजहें हैं:
- नॉन-NATO सहयोगी: पाकिस्तान आज भी वाशिंगटन का एक बड़ा गैर-नाटो (Non-NATO) सहयोगी है।
- डोनाल्ड ट्रंप से नजदीकी: व्हाइट हाउस में डोनाल्ड ट्रंप के दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद से इस्लामाबाद और वाशिंगटन के रिश्ते तेजी से सुधरे हैं।
- ईरान संकट में बिचौलिया: पाकिस्तान इस समय अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के हालातों को सुलझाने के लिए एक बैकचैनल ‘बिचौलिया’ (Mediator) की भूमिका निभा रहा है, जिसके बदले उसे अमेरिका का यह खुला समर्थन मिला है।
तालिबान की खुली धमकी: ‘बदला लेकर रहेंगे’
उधर, अफगानिस्तान पर राज कर रहे तालिबान ने पाकिस्तान के इस हमले को संप्रभुता का उल्लंघन बताया है। तालिबान का दावा है कि उन्होंने पाकिस्तानी सीमा के भीतर भी जवाबी कार्रवाई की है और बलूचिस्तान की तरफ आए पाकिस्तानी ड्रोनों को निशाना बनाया है।
तालिबान ने पाकिस्तान से बदला लेने की कसम खाई है और कहा है कि पाकिस्तान अपनी आंतरिक सुरक्षा और खुफिया तंत्र की नाकामियों का ठीकरा अफगानिस्तान के सिर फोड़ना बंद करे। फिलहाल दोनों देशों की सरहदें सेना और तोपों से पट चुकी हैं और अमेरिकी दखल के बाद इस जंग के और भड़कने की आशंका है।


