राम मंदिर के दान में सेंध! ‘राम राज्य कोष’ वाला संदूक आरोपी के कमरे में कैसे पहुंचा? पढ़ें पूरी पड़ताल…

जुबिली स्पेशल डेस्क
अयोध्या | राम मंदिर दान गबन मामले में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। अब इस केस में एक ऐसा एंगल सामने आया है, जिसने न सिर्फ सुरक्षा व्यवस्था बल्कि पूरे मैनेजमेंट सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
‘राम राज्य कोष’ लिखा संदूक बना जांच का केंद्र
मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला के किराए के कमरे से एक संदूक बरामद हुआ है, जिस पर “राम राज्य कोष” लिखा हुआ है। हैरानी की बात यह है कि इस संदूक पर Paytm का QR/बारकोड भी लगा था, जिससे ऑनलाइन दान लिया जा सकता था।
सवाल यह है कि मंदिर ट्रस्ट से जुड़ा ऐसा संदूक एक निजी कमरे में कैसे पहुंचा?
दान के पैसे उसी बक्से में छिपाए जा रहे थे
पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि अविनाश शुक्ला कथित तौर पर दान में आए पैसे को उसी बक्से में छिपाकर रखता था, जिसका इस्तेमाल मंदिर में चढ़ावे के लिए होता है।
- 5 जून को पुलिस ने छापेमारी कर 20 लाख रुपये बरामद किए
- कमरे में तीन संदूक मिले, जिनमें से एक पर ट्रस्ट से जुड़ा निशान था
- पहले भी करीब 5 लाख रुपये की बरामदगी की बात सामने आई थी
योग केंद्र कनेक्शन ने बढ़ाई सस्पेंस
अविनाश शुक्ला अपने भाई अभिषेक के साथ एक योग केंद्र में रह रहा था। योगाचार्य सीमा तिवारी के अनुसार:
- दोनों भाई लंबे समय से वहीं रह रहे थे
- अविनाश को कथित तौर पर ट्रस्ट से जुड़े लोगों की सिफारिश पर ठहराया गया था
इससे यह सवाल और गहरा हो जाता है कि दान पेटी जैसे संवेदनशील संसाधन निजी ठिकाने तक कैसे पहुंचे?
सिस्टम में सेंध या अंदरूनी मिलीभगत?
जांच एजेंसियां अब इस पूरे मामले को सिर्फ चोरी नहीं, बल्कि सिस्टम फेलियर या संभावित अंदरूनी नेटवर्क के रूप में भी देख रही हैं।
- ट्रस्ट से जुड़े संसाधनों का दुरुपयोग
- ऑनलाइन दान सिस्टम का गलत इस्तेमाल
- सुरक्षा और निगरानी में खामियां
ये सभी बिंदु जांच के दायरे में हैं।
कौन है अविनाश शुक्ला?
- मूल निवासी: प्रतापगढ़
- करीब डेढ़ साल पहले अयोध्या आया
- भाई के जरिए ट्रस्ट में नौकरी मिलने की बात सामने



