Ram Mandir Donation Theft: महाकुंभ के दौरान हुई सबसे बड़ी चढ़ावा चोरी, ED से जांच कराने की तैयारी

अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले में जांच के दौरान बड़ा खुलासा हुआ है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, महाकुंभ 2025 के दौरान मंदिर में आने वाले चढ़ावे और दान की राशि में भारी बढ़ोतरी हुई थी और इसी अवधि में सबसे अधिक कथित चोरी हुई। अब इस मामले की जांच को और व्यापक बनाने के लिए अयोध्या पुलिस प्रवर्तन निदेशालय (ED) को पत्र भेजने की तैयारी कर रही है, ताकि पैसों के लेन-देन और मनी ट्रेल की गहराई से जांच हो सके।

पुलिस जांच के मुताबिक, महाकुंभ के दौरान श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने से मंदिर में दान और चढ़ावे की राशि में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई। जांच एजेंसियों का दावा है कि इसी दौरान आरोपियों ने कथित तौर पर सुनियोजित तरीके से चोरी को अंजाम दिया।

अब तक इस मामले में 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस का कहना है कि इनमें से कुछ आरोपी पहले भी छोटी-मोटी चोरी की घटनाओं में शामिल रहे थे, लेकिन महाकुंभ के दौरान बड़ी रकम आने पर उन्होंने मिलकर बड़ी साजिश रची।

जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार आरोपियों में लवकुश मिश्रा और उनके साले अनुकल्प मिश्रा पर सबसे अधिक रकम की कथित चोरी करने का आरोप है। पुलिस का दावा है कि चोरी की रकम से सबसे ज्यादा संपत्तियां भी इसी जोड़ी ने खरीदीं।

अब तक की जांच में दोनों से जुड़ी आधा दर्जन से अधिक संपत्तियों की जानकारी पुलिस को मिली है। इन संपत्तियों और वित्तीय लेन-देन की विस्तृत जांच की जा रही है।

पुलिस वित्तीय लेन-देन की जांच के लिए आयकर विभाग की भी मदद ले रही है। सूत्रों के मुताबिक, जांच के दौरान स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के कुछ कर्मचारियों की भूमिका भी संदेह के दायरे में आई है। हालांकि, इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है और जांच जारी है।

अयोध्या पुलिस इस मामले में ED को पत्र लिखने की तैयारी कर रही है। यदि ED जांच शुरू करती है तो चोरी की कथित रकम, उससे खरीदी गई संपत्तियों और वित्तीय लेन-देन की पूरी मनी ट्रेल की जांच की जाएगी।

पुलिस के अनुसार, अब तक सबसे अधिक नकदी अविनाश शुक्ला की निशानदेही पर बरामद की गई है।

जांच की आंच अब मंदिर ट्रस्ट की दान प्रबंधन व्यवस्था तक भी पहुंच गई है। सूत्रों के अनुसार, चंपत राय और अनिल मिश्रा से जुड़े पहलुओं की भी जांच की जा रही है। फिलहाल जांच एजेंसियां पूरे नेटवर्क और दान प्रबंधन प्रणाली की पड़ताल में जुटी हैं। इस संबंध में अभी किसी के खिलाफ दोष सिद्ध नहीं हुआ है और जांच जारी है।

प्रयागराज में महाकुंभ 2025 का आयोजन 13 जनवरी से 26 फरवरी 2025 तक हुआ था। करीब 44-45 दिनों तक चले इस धार्मिक आयोजन में 60 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने का दावा किया गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के अयोध्या आने से राम मंदिर में भी चढ़ावे की मात्रा में उल्लेखनीय वृद्धि हुई थी।

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच लगातार नए मोड़ ले रही है। पुलिस महाकुंभ के दौरान हुई कथित चोरी, आरोपियों की संपत्तियों और वित्तीय लेन-देन की गहन जांच कर रही है। ED और आयकर विभाग की संभावित जांच के बाद मामले में और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं। फिलहाल सभी आरोप जांच के अधीन हैं और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होंगे।

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